बारह राशियों में नौवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 240°–270°
जन्म के समय चंद्रमा धनु में हों तो आपकी राशि धनु है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा धनु में हों, वे आशावादी, खुले दिल वाले और आज़ादी पसंद होते हैं। इसके स्वामी गुरु हैं, नक्षत्र मूल, पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा (चरण 1) हैं, और परंपरा में धनु राशि के बच्चे का नाम ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा या भे अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर धनु राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
पढ़ना-सीखना, यात्रा, धर्म और अच्छी चर्चा इन्हें प्रिय हैं, और ये सच बोलते हैं, कभी ज़रूरत से ज़्यादा सीधे। कभी ये निभा सकें उससे ज़्यादा वादा कर देते हैं। धनु गुरु की राशि है, इसलिए ये शिक्षक और सलाहकार के रूप में, क़ानून में, और यात्रा या धर्म से जुड़े कामों में अच्छा करते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र धनु राशि में हों तो जातक को पिता की संपत्ति मिलती है, वह दानी, बलवान और वाक्पटु होता है, और उसकी बुद्धि गहरी, नई बातें सोचने वाली और विवेकपूर्ण होती है। वह लेखन करता है, अनेक काम हाथ में लेता है और मूर्तिकला जैसे शिल्प में निपुण होता है। वह दबाव से नहीं, प्रेम से ही झुकता है; श्लोक संबंधियों से उसकी अनबन और लंबा चेहरा तथा लंबी गर्दन भी बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, धनु राशि और उसके स्वामी गुरु तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.9
गुरु की राशि होने से धनु वालों में मार्गदर्शक का स्वभाव होता है, इसलिए छोटे भाई-बहन दाख़िले, नौकरी के प्रस्ताव या रिश्ते के बारे में सलाह लेने इन्हीं के पास आते हैं। यह कालपुरुष की नौवीं राशि भी है, जो धर्म और तीर्थ का स्थान है, और परिवार की तीर्थयात्रा की योजना बनाकर सबको वहाँ तक पहुँचाने वाले अक्सर धनु वाले ही होते हैं। कठिन साल में इनकी अग्नि घर का हौसला बनाए रखती है।
धनु वाले बड़ी तस्वीर देखते हैं और छोटी बातें भाग्य पर छोड़ सकते हैं: खोया हुआ काग़ज़, देर से भरी गई किस्त, बिना दस्तख़त की अर्ज़ी। खुलकर दी गई सलाह जीवनसाथी या बड़े हो चुके बच्चों को उपदेश जैसी लग सकती है। घर के ज़रूरी काग़ज़ों के लिए एक अलग बस्ता, और राय देने से पहले यह पूछ लेना कि 'मेरी राय सुनना चाहोगे?', इस नेकदिल राशि को बहुत-सी खटपट से बचा लेता है।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
धनु के लिए चंद्र से दसवीं राशि कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं, इसलिए परंपरा व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और आईटी की ओर देखती है। राशि के स्वामी गुरु अध्यापन, क़ानून, वित्त और सलाह जोड़ते हैं, इसलिए अध्यापक, वकील, वित्त सलाहकार या लेखक होना इस राशि के लिए स्वाभाविक है। जैसा श्लोक कहता है, लेखन और हाथ के हुनर वाले काम भी इन्हें जँचते हैं, और प्रकाशन का काम भी।
चंद्र से सातवीं राशि मिथुन है, जिसके स्वामी बुध हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो हाज़िरजवाब, बातूनी और जिज्ञासु हो। मिथुन भी, धनु की तरह, द्विस्वभाव राशि है, इसलिए जोड़ी आसानी से तालमेल बिठाती है और बातचीत का आनंद लेती है; ध्यान बस धनु वालों की कड़वी सच्चाई और ऐसे साथी की बदलती राय पर रखना होता है। जीवनसाथी ज़ोर देने के बजाय प्यार से कहें, तो धनु वाले जल्दी मान जाते हैं।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में धनु को जंघाओं से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और अग्नि तत्त्व की राशि होने से गर्मी और सक्रिय शरीर से। पैदल चलना, यात्रा और खेल इनके लिए ठीक रहते हैं, और बढ़ती उम्र में जंघाओं और टाँगों का ध्यान रखना अच्छा है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | धनु में अंश | धनु में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| मूल | केतु | 0°–13°20′ | चारों | ये, यो, भा, भी |
| पूर्वाषाढ़ा | शुक्र | 13°20′–26°40′ | चारों | भू, धा, फा, ढा |
| उत्तराषाढ़ा | सूर्य | 26°40′–30° | 1 | भे |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर धनु राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.17–18
धनु बारह राशियों में नौवीं है, निरयन राशिचक्र के 240°–270°, और इसके स्वामी गुरु हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में धनु का सबसे अच्छा मेल कुंभ और मीन से है (13/15, धनु को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी गुरु का मंत्र ॐ गुरवे नमः, गुरुवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
हाँ: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 23 फ़रवरी 2028 तक। बीच में 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक शनि मेष (आपके पाँचवें भाव) में रहेंगे और ढैय्या नहीं रहेगी। इसके बाद: अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक। शनि मीन में हैं, धनु से चौथे भाव में।
2027 में सबसे अच्छे महीने सितंबर और अक्टूबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी और मार्च। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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