
जन्म कुंडली
Janam Kundliआपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2027 में शुरू होगी
ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। कन्या राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि धनु या मेष में हों। शनि अभी मीन में हैं, कन्या से सातवें भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। कन्या राशि की दोनों ढैय्याएँ बराबर नहीं हैं: मेष वाली अष्टम ढैय्या ज़्यादा भारी है।
7 महीने बाद शुरू होगी · 3 जून 2027
कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।
अष्टम शनि
शनि मेष में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में
अगली · 3 जून 2027 से 17 अप्रैल 2030 तक
लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 3 जून 2027 को मेष में आएँगे और 17 अप्रैल 2030 को मेष को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक वापस मीन में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी) और 8 अगस्त 2029 से 4 अक्टूबर 2029 तक आगे वृषभ में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मेष के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 3 मई 2029 से 8 अगस्त 2029 तक और 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक।
पिछली बार: 17 अप्रैल 1998 से 7 जून 2000 तक।
कंटक शनि
शनि धनु में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में
उसके बाद · 8 दिसंबर 2046 से 4 दिसंबर 2049 तक
लगभग 3 साल। शनि 8 दिसंबर 2046 को धनु में आएँगे और 4 दिसंबर 2049 को धनु को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 6 मार्च 2049 से 9 जुलाई 2049 तक आगे मकर में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि धनु के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 12 मार्च 2048 से 7 जून 2048 तक, 6 दिसंबर 2048 से 6 मार्च 2049 तक और 10 जुलाई 2049 से 4 दिसंबर 2049 तक।
पिछली बार: 26 जनवरी 2017 से 24 जनवरी 2020 तक।
शनि 3 जून 2027 को मेष में, यानी कन्या राशि से आठवें भाव में, प्रवेश करेंगे, और यह अष्टम ढैय्या 17 अप्रैल 2030 तक चलेगी। इसकी मुख्य बातें सेहत, क़र्ज़ और बच्चों की ज़रूरतें रहेंगी। पहला दौर छोटा होगा: 20 अक्टूबर 2027 को शनि वापस मीन में चले जाएँगे और ढैय्या 22 फ़रवरी 2028 तक थमी रहेगी, और 8 अगस्त से 4 अक्टूबर 2029 तक, जब शनि वृषभ में होंगे, यह एक बार फिर थमेगी। सबसे भारी समय अंत में आएगा, 3 मई से 8 अगस्त 2029 तक और फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक, जब शनि मेष के आख़िरी तिहाई हिस्से में होंगे (फलदीपिका 26.25)। बच्चे की उच्च शिक्षा जैसे किसी बड़े तय ख़र्च का समय चुना जा सके, तो उसे 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 के उसी विराम में रखें, जब शनि वापस मीन में होंगे।
ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।
शनि नीच के: सबसे भारी हिस्सा
कन्या राशि के लिए अष्टम शनि की ढैय्या तब होती है जब शनि मेष में, यानी आठवें भाव में हों। इसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। मेष शनि की नीच राशि है, और फलदीपिका 26.32 के अनुसार इससे गोचर का असर तीखा होता है। शनि आपके पाँचवें भाव (संतान और पढ़ाई) और छठे भाव (काम का दबाव, शत्रु, ऋण और रोग) के स्वामी हैं। इसलिए संतान, रोग और ऋण की बातें आठवें भाव में आती हैं। ये वही बातें हैं जिनकी चेतावनी फलदीपिका 26.22 आठवें भाव के शनि के लिए देती है, यानी संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग।
मेष से शनि की दृष्टि मिथुन, तुला और मकर पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।
फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।
क्या करें इस ढैय्या में किसी मित्र या संबंधी के क़र्ज़ की ज़मानत न लें।
शनि सम राशि में
कन्या राशि से चौथा भाव धनु है, और धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। इसलिए वहाँ शनि का असर न हल्का होता है, न तीखा। यहाँ कंटक शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। फलदीपिका 26.22 में चौथे भाव के शनि के लिए जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी है। पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और बुद्धि) और छठे भाव (काम का दबाव, शत्रु, ऋण और रोग) के स्वामी शनि ही हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई, घर पर चढ़ा ऋण या लंबा चलने वाला रोग घर और मन, दोनों पर भार डाल सकता है।
धनु से शनि की दृष्टि कुंभ, मिथुन और कन्या पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।
क्या करें घर में बच्चों के लिए पढ़ाई का एक शांत कोना और बँधी हुई दिनचर्या रखें, और घर का क़र्ज़ नियमित क़िस्तों में उतारते चलें।
शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।
ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।
शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।
नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर कन्या राशि के लिए है।
शनि आपकी राशि के स्वामी बुध को मित्र मानते हैं और आपके पाँचवें और छठे भाव के स्वामी हैं, इसलिए सबसे अच्छा उपाय वह है जो संतान और क़र्ज़ के मामलों में बुद्धि साफ़ रखे: बुधवार को 'ॐ बुधाय नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें और बुध के देवता भगवान विष्णु की पूजा करें। शनिवार को शनि चालीसा का पाठ शनि की ओर से स्थिरता देता है।
यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

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आपका महीना दिन-ब-दिन, आपकी अपनी कुंडली से: अच्छे दिन, सँभलकर चलने वाले दिन, और ज़रूरी कामों की सही तारीख़ें।
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उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।
किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। कन्या राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।
कन्या राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। कन्या राशि की अगली साढ़े साती 27 अगस्त 2036 से 30 अगस्त 2044 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।
| ढैय्या | शनि किस राशि में | कब से | कब तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| कंटक शनि | धनु | 17 दिसंबर 1987 | 15 दिसंबर 1990 | 3 साल | बीता |
| अष्टम शनि | मेष | 17 अप्रैल 1998 | 7 जून 2000 | 2 साल 2 महीने | बीता |
| कंटक शनि | धनु | 26 जनवरी 2017 | 24 जनवरी 2020 | 3 साल | बीता |
| अष्टम शनि | मेष | 3 जून 2027 | 17 अप्रैल 2030 | 2 साल 10 महीने | आगे |
| कंटक शनि | धनु | 8 दिसंबर 2046 | 4 दिसंबर 2049 | 3 साल | आगे |
| अष्टम शनि | मेष | 7 अप्रैल 2057 | 27 मई 2059 | 2 साल 2 महीने | आगे |
| कंटक शनि | धनु | 16 जनवरी 2076 | 15 जनवरी 2079 | 3 साल | आगे |
| अष्टम शनि | मेष | 21 मई 2086 | 5 अप्रैल 2089 | 2 साल 10 महीने | आगे |
एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।
इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है
नहीं। शनि मीन में हैं, कन्या से सातवें भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है।
अष्टम शनि 3 जून 2027 से 17 अप्रैल 2030 तक; कंटक शनि 8 दिसंबर 2046 से 4 दिसंबर 2049 तक।
कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। कन्या राशि की कंटक ढैय्या में शनि धनु में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में मेष में।
दोनों बराबर नहीं हैं: अष्टम शनि वाली ढैय्या ज़्यादा भारी है। कंटक शनि वाली ढैय्या धनु (शनि के लिए सम राशि) में पड़ती है, जो असर न घटाती है, न बढ़ाती है। अष्टम शनि वाली ढैय्या मेष (शनि की नीच राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32), आठवें भाव की अपनी कड़ी चेतावनी (26.33) के ऊपर। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।
इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर कन्या राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।
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