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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2032 में शुरू होगी

मीन राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। मीन राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि मिथुन या तुला में हों। शनि अभी मीन में हैं, आपकी चंद्र राशि में ही: यह मीन राशि के लिए साढ़े साती है (चंद्र राशि और उसके दोनों ओर की राशियों पर शनि, लगभग साढ़े सात साल), ढैय्या नहीं। 8 अगस्त 2029 से 4 अक्टूबर 2029 तक, जब शनि वृषभ में होंगे, साढ़े साती थमी रहेगी। यह 17 अप्रैल 2030 को ख़त्म होगी; उसके बाद कंटक शनि 31 मई 2032 से शुरू होगा। मीन राशि की दोनों ढैय्याएँ उन राशियों, मिथुन और तुला, में पड़ती हैं जहाँ शनि सहज रहते हैं, इसलिए ये शत्रु राशि वाली ढैय्या से हल्की रहती हैं।

5 साल 7 महीने बाद शुरू होगी · 31 मई 2032

मीन राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, मिथुन (कंटक) और तुला (अष्टम) चिह्नितमीन राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, मिथुन (कंटक) और तुला (अष्टम) चिह्नित

मीन राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि मिथुन में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक

लगभग 2 साल 1 महीना। शनि 31 मई 2032 को मिथुन में आएँगे और 13 जुलाई 2034 को निकलेंगे, बीच में लौटेंगे नहीं। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मिथुन के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 30 जुलाई 2033 से 13 जुलाई 2034 तक।

पिछली बार: 23 जुलाई 2002 से 26 मई 2005 तक।

अष्टम शनि

शनि तुला में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 28 जनवरी 2041 से 30 अगस्त 2044 तक

लगभग 3 साल 7 महीने। शनि 28 जनवरी 2041 को तुला में आएँगे और 30 अगस्त 2044 को तुला को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 6 फ़रवरी 2041 से 25 सितंबर 2041 तक वापस कन्या में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी) और 11 दिसंबर 2043 से 22 जून 2044 तक आगे वृश्चिक में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। पहली बार शनि तुला में सिर्फ़ 9 दिन रहेंगे। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि तुला के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 16 दिसंबर 2042 से 16 मई 2043 तक, 12 सितंबर 2043 से 11 दिसंबर 2043 तक और 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक।

पिछली बार: 15 नवंबर 2011 से 2 नवंबर 2014 तक।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर मीन राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

मीन राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि मिथुन में

शनि मित्र राशि में: सहज

मीन राशि के लिए शनि ग्यारहवें भाव (आय, लाभ और मित्र) और बारहवें भाव (व्यय, दूर स्थान और नींद) के स्वामी हैं। इसलिए जब वे मिथुन में, यानी चौथे भाव में हों, तो आने वाला धन और जाने वाला धन, दोनों घर से होकर गुज़रते हैं। यह घर पर ख़र्च या स्थान बदलने के रूप में दिख सकता है। शनि का यह गोचर कंटक शनि की ढैय्या कहलाता है, और इसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। मिथुन शनि की मित्र राशि है और कुछ राहत देती है। पर फलदीपिका 26.22 चौथे भाव के शनि के लिए जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी फिर भी देती है।

  • काम और पैसामिथुन से शनि की दृष्टि आपके दसवें भाव पर पड़ती है, इसलिए कर्म-क्षेत्र में उन्नति धीमी पर स्थिर हो सकती है। एक बड़ी छलाँग के इंतज़ार में छोटी-छोटी पदोन्नतियाँ न ठुकराएँ।
  • घर-परिवारग्यारहवें भाव के स्वामी होकर चौथे भाव में शनि मित्रों और बड़े भाई-बहनों को घर के मामलों में ले आते हैं, जैसे साझा ख़रीद या लंबे समय तक साथ रहना। कोई मित्र या संबंधी साथ रहने आए, तो पहले शर्तें तय कर लें।
  • विवाह और साझेदारीबिना आपसी सहमति का ख़र्च मीन राशि वालों के दांपत्य में खिंचाव ला सकता है, क्योंकि बारहवें भाव (व्यय) के स्वामी शनि घर के भाव से गुज़र रहे होते हैं। बड़ी ख़रीद मिलकर तय करें और साझा सूची रखें।
  • सेहतव्यस्त महीनों में भोजन और नींद छोड़ना यहाँ ध्यान रखने की बात है, क्योंकि पहले और छठे भाव पर शनि की दृष्टि नियमित आदतें माँगती है। पर्याप्त पानी पिएँ और भोजन तय समय पर करें।

मिथुन से शनि की दृष्टि सिंह, धनु और मीन पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें घर के ख़र्च का लिखित हिसाब रखें, और घर या वाहन गिरवी रखकर किसी मित्र को उधार देने से पहले दो बार सोचें।

अष्टम शनि · शनि तुला में

शनि उच्च के: सबसे न्यायप्रिय

तुला शनि की उच्च राशि है, और मीन राशि से यही आठवाँ भाव है। इसलिए वहाँ शनि के आने पर अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। फलदीपिका (26.31) के अनुसार उच्च के शनि हानि नहीं करते, पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। इसलिए आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में दी गई संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी को मीन राशि वाले बहुत हल्का समझें, पर बेअसर नहीं। ग्यारहवें भाव (आय, लाभ और मित्र) और बारहवें भाव (व्यय, दूर स्थान और नींद) के स्वामी होने से शनि लाभ, ख़र्च और मित्रों की बातें आठवें भाव में ले आते हैं।

  • काम और पैसातुला से शनि दसवें और दूसरे भाव पर दृष्टि डालते हैं। इसलिए काम के बदलाव में समय लगता है, और ग्यारहवें भाव (लाभ) से आने वाली आय अटक सकती है। बकाया की याद विनम्रता से, पर नियमित दिलाएँ।
  • घर-परिवारपढ़ाई में बच्चों को धैर्य भरा साथ चाहिए, क्योंकि पाँचवें भाव पर शनि की दृष्टि है, और दूसरे भाव पर वही दृष्टि परिवार के पैसों पर दबाव डाल सकती है। पढ़ाई की निधि घर के ख़र्च से अलग रखें।
  • विवाह और साझेदारीन्याय के ग्रह शनि आठवें भाव (जीवनसाथी के परिवार का भाव) में हों, तो ससुराल के मामले साफ़ शर्तों और निष्पक्षता से ही ठीक सुलझते हैं। जीवनसाथी के परिवार से वही शिष्टता रखें जो आप अपने परिवार के लिए चाहते हैं।
  • सेहतरोग आठवें भाव के विषयों में है, और बारहवें भाव के स्वामी होकर शनि इस अष्टम ढैय्या में नींद, विश्राम और अस्पताल के ख़र्च को भी छूते हैं। पूरे परिवार का स्वास्थ्य बीमा चालू रखें, और समय रहते उसका नवीनीकरण कराएँ।

तुला से शनि की दृष्टि धनु, मेष और कर्क पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें मित्रों के साथ पैसों का लेन-देन लिखकर रखें, नींद अच्छी रखें, और साल में एक बार स्वास्थ्य की जाँच कराते रहें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

मीन राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर मीन राशि के लिए है।

आपकी राशि के स्वामी गुरु हैं और वे शनि के प्रति सम हैं, इसलिए गुरु को बल देना ढैय्या में आपका विवेक स्थिर रखता है: गुरुवार को, जो परंपरा में गुरु का दिन है, बृहस्पति कवच (गुरु की रक्षा-स्तुति) का पाठ करें, या 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें। उसी दिन किसी शिक्षक को या मंदिर में चने की दाल और हल्दी का दान (श्रद्धा से दी गई भेंट) करें; परंपरा में गुरु के लिए यही दान बताया गया है।

मीन राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ मीन लग्न होता, तो शनि ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। मीन राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

मीन राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

मीन राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। मीन राशि पर अभी साढ़े साती चल रही है, 17 अप्रैल 2030 तक। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2022–2030साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव29 अप्रैल 2022 – 17 अप्रैल 2030
  • 2032–2034कंटक शनि · मिथुन31 मई 2032 – 13 जुलाई 2034
  • 2041–2044अष्टम शनि · तुला28 जनवरी 2041 – 30 अगस्त 2044
  • 2052–2059साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव25 फ़रवरी 2052 – 27 मई 2059
मीन राशि की हर ढैय्या, 1982 से 2073
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
अष्टम शनितुला6 अक्टूबर 198217 सितंबर 19852 साल 11 महीनेबीता
कंटक शनिमिथुन23 जुलाई 200226 मई 20052 साल 10 महीनेबीता
अष्टम शनितुला15 नवंबर 20112 नवंबर 20143 सालबीता
कंटक शनिमिथुन31 मई 203213 जुलाई 20342 साल 1 महीनाआगे
अष्टम शनितुला28 जनवरी 204130 अगस्त 20443 साल 7 महीने (पहली बार शनि सिर्फ़ 9 दिन तुला में रहेंगे)आगे
कंटक शनिमिथुन11 जुलाई 20619 मई 20642 साल 10 महीनेआगे
अष्टम शनितुला4 नवंबर 207023 अक्टूबर 20733 सालआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या मीन राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

ढैय्या नहीं, साढ़े साती चल रही है, जो 17 अप्रैल 2030 तक रहेगी। शनि अभी मीन में हैं, आपकी चंद्र राशि में ही।

मीन राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक; अष्टम शनि 28 जनवरी 2041 से 30 अगस्त 2044 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। मीन राशि की कंटक ढैय्या में शनि मिथुन में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में तुला में।

क्या मीन राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

दोनों का अपना भार है, अलग-अलग कारणों से। कंटक शनि वाली ढैय्या मिथुन (शनि के मित्र की राशि) में पड़ती है, जो इसे शत्रु राशि से हल्का रखती है। अष्टम शनि वाली ढैय्या तुला (शनि की उच्च राशि) में पड़ती है, जो हानि नहीं करती (फलदीपिका 26.31); पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33), इसलिए इसे काफ़ी हल्का मानें, शून्य नहीं। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

मीन राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर मीन राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

मुफ़्त कुंडली बनाएँ

आचार्य पराशर से पूछें

AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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