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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2041 में शुरू होगी

कर्क राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 28 जनवरी 2041 से 30 अगस्त 2044 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। कर्क राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि तुला या कुंभ में हों। शनि अभी मीन में हैं, कर्क से नौवें भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। कर्क राशि की साढ़े साती 31 मई 2032 से शुरू होगी, बीच में 22 अक्टूबर 2038 से 4 अप्रैल 2039 तक विराम रहेगा। कर्क राशि की दोनों ढैय्याएँ उन राशियों, तुला और कुंभ, में पड़ती हैं जहाँ शनि सहज रहते हैं, इसलिए ये शत्रु राशि वाली ढैय्या से हल्की रहती हैं।

14 साल 3 महीने बाद शुरू होगी · 28 जनवरी 2041

कर्क राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, तुला (कंटक) और कुंभ (अष्टम) चिह्नितकर्क राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, तुला (कंटक) और कुंभ (अष्टम) चिह्नित

कर्क राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि तुला में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 28 जनवरी 2041 से 30 अगस्त 2044 तक

लगभग 3 साल 7 महीने। शनि 28 जनवरी 2041 को तुला में आएँगे और 30 अगस्त 2044 को तुला को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 6 फ़रवरी 2041 से 25 सितंबर 2041 तक वापस कन्या में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी) और 11 दिसंबर 2043 से 22 जून 2044 तक आगे वृश्चिक में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। पहली बार शनि तुला में सिर्फ़ 9 दिन रहेंगे। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि तुला के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 16 दिसंबर 2042 से 16 मई 2043 तक, 12 सितंबर 2043 से 11 दिसंबर 2043 तक और 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक।

पिछली बार: 15 नवंबर 2011 से 2 नवंबर 2014 तक।

अष्टम शनि

शनि कुंभ में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 25 फ़रवरी 2052 से 5 फ़रवरी 2055 तक

लगभग 2 साल 11 महीने। शनि 25 फ़रवरी 2052 को कुंभ में आएँगे और 5 फ़रवरी 2055 को कुंभ को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 14 मई 2054 से 1 सितंबर 2054 तक आगे मीन में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कुंभ के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 14 फ़रवरी 2054 से 14 मई 2054 तक और 2 सितंबर 2054 से 5 फ़रवरी 2055 तक।

पिछली बार: 29 अप्रैल 2022 से 29 मार्च 2025 तक।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर कर्क राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

कर्क राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि तुला में

शनि उच्च के: सबसे न्यायप्रिय

कर्क राशि के लिए शनि सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) और आठवें भाव (अचानक घटनाएँ, ससुराल और पैतृक संपत्ति) के स्वामी हैं। कर्क से चौथा भाव तुला है, और शनि वहाँ आएँ तो दांपत्य, जीवनसाथी का परिवार और पैतृक संपत्ति, तीनों घर के भीतर आ जाते हैं। तुला में शनि की यह ढैय्या कंटक शनि कहलाती है, और इसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। तुला शनि की उच्च राशि है, और फलदीपिका (26.31) कहती है कि उच्च के शनि कठिन भाव में भी हानि नहीं करते। इसलिए चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में दी गई जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी कर्क राशि वालों पर लागू नहीं होती। शनि की धीमी और स्थिर चाल फिर भी रहती है; नीचे के बिंदु बताते हैं कि वह कहाँ महसूस हो सकती है।

  • काम और पैसातुला से शनि की दृष्टि दसवें भाव पर पड़ती है, इसलिए काम की रफ़्तार धीमी लग सकती है और पहचान देर से मिल सकती है। लक्ष्य संयत और लिखित रखें, और वरिष्ठों से खुली बहस से बचें।
  • घर-परिवारआपके चौथे भाव में शनि घर से जुड़े काम ला सकते हैं: मरम्मत, कमरों की नई व्यवस्था, या माता-पिता या ससुराल में से किसी का साथ रहने आना। कमरे या घर बदलने की योजना हफ़्तों में नहीं, महीनों में शांति से बनाएँ।
  • विवाह और साझेदारीसातवें भाव के स्वामी होकर चौथे भाव में बैठे शनि दांपत्य और घर को कसकर जोड़ते हैं: कहाँ और किसके साथ रहना है, यह पति-पत्नी का प्रश्न बन जाता है। संयुक्त परिवार की व्यवस्था पहले जीवनसाथी के साथ तय करें, फिर बड़ों से।
  • सेहतघर की चिंताओं के बाद आने वाली थकान और उदासी पर ध्यान दें, क्योंकि शनि की दृष्टि पहले और छठे भाव पर है। सूर्यास्त के समय थोड़ी सैर और रात का भोजन जल्दी करना मन को शांत रखने में मदद करते हैं।

तुला से शनि की दृष्टि धनु, मेष और कर्क पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें घर से जुड़े निर्णय जीवनसाथी के साथ मिलकर लें, और यदि ससुराल वाले साथ रहने आएँ या संपत्ति बाँटनी हो, तो शर्तें प्रेम से और साफ़-साफ़ तय कर लें।

अष्टम शनि · शनि कुंभ में

शनि अपनी राशि में: स्थिर

कर्क राशि से आठवाँ भाव कुंभ है, और शनि आपके सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) और इसी आठवें भाव के स्वामी हैं। इसलिए कुंभ में आकर वे अपने ही भाव में बैठते हैं। यही अष्टम शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। यहाँ शनि दांपत्य और साझेदारी की बातें आठवें भाव में ले आते हैं। कुंभ शनि की अपनी राशि है, और फलदीपिका 26.31 के अनुसार अपनी राशि में शनि हानि नहीं करते। पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। इसलिए आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में दी गई संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी बहुत हल्की है, पर बेअसर नहीं।

  • काम और पैसासातवें भाव के स्वामी शनि व्यापारिक साझेदारों को आठवें भाव में ले आते हैं और दसवें भाव को देखते हैं। इसलिए ग्राहकों का भुगतान और साझा काम धीमे पड़ सकते हैं। भुगतान का हिसाब समय पर भेजें और बकाया की याद लिखित में दिलाएँ।
  • घर-परिवारबच्चे की कोई ज़रूरत और घर का कोई ख़र्च एक ही महीने आ सकते हैं, क्योंकि शनि की दृष्टि दूसरे भाव (जमा-पूँजी) और पाँचवें भाव (संतान) पर साथ-साथ पड़ती है। आपात के लिए छोटी-सी अलग रक़म रखें, जिसे रोज़ के ख़र्च में कोई न छुए।
  • विवाह और साझेदारीशनि सातवें भाव के स्वामी हैं और आठवें भाव (जीवनसाथी के परिवार का भाव) में बैठते हैं, इसलिए दांपत्य और ससुराल की चिंताएँ आपस में जुड़ जाती हैं। ससुराल के रीति-रिवाज़ का आदर करें, और परिवार की योजनाओं में जीवनसाथी के स्वास्थ्य को भी रखें।
  • सेहतइन वर्षों में कर्क राशि वालों के लिए नियमित स्वास्थ्य जाँच सामान्य से ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि आठवाँ भाव पुराने रोगों और लंबे उपचार का है। रोज़ टहलना और जल्दी सोना बनाए रखें, और दोबारा दिखाने की तारीख़ न छोड़ें।

कुंभ से शनि की दृष्टि मेष, सिंह और वृश्चिक पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें व्यापार में कोई साझेदारी हो तो उसकी शर्तें लिखित में रखें, और अपनी तथा जीवनसाथी की स्वास्थ्य जाँच के लिए समय निकालें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

कर्क राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर कर्क राशि के लिए है।

आपकी राशि के स्वामी चंद्र हैं, और शनि चंद्र को शत्रु मानते हैं, इसलिए मन को सँभालने वाला उपाय पहले आता है: सोमवार को चंद्र के देवता भगवान शिव की पूजा करें और 'ॐ सोमाय नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें, जो आपकी राशि के स्वामी चंद्र को बल देता है। शनिवार को दशरथकृत शनि स्तोत्र (राजा दशरथ की रची मानी जाने वाली शनि की स्तुति) का पाठ शनि की ओर से राहत देता है।

कर्क राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ कर्क लग्न होता, तो शनि सातवें और आठवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। कर्क राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

कर्क राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

कर्क राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। कर्क राशि की अगली साढ़े साती 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2039 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2032–2039साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव31 मई 2032 – 13 जुलाई 2039
  • 2041–2044कंटक शनि · तुला28 जनवरी 2041 – 30 अगस्त 2044
  • 2052–2055अष्टम शनि · कुंभ25 फ़रवरी 2052 – 5 फ़रवरी 2055
कर्क राशि की हर ढैय्या, 1982 से 2084
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
कंटक शनितुला6 अक्टूबर 198217 सितंबर 19852 साल 11 महीनेबीता
अष्टम शनिकुंभ5 मार्च 199316 फ़रवरी 19962 साल 11 महीनेबीता
कंटक शनितुला15 नवंबर 20112 नवंबर 20143 सालबीता
अष्टम शनिकुंभ29 अप्रैल 202229 मार्च 20252 साल 11 महीनेबीता
कंटक शनितुला28 जनवरी 204130 अगस्त 20443 साल 7 महीने (पहली बार शनि सिर्फ़ 9 दिन तुला में रहेंगे)आगे
अष्टम शनिकुंभ25 फ़रवरी 20525 फ़रवरी 20552 साल 11 महीनेआगे
कंटक शनितुला4 नवंबर 207023 अक्टूबर 20733 सालआगे
अष्टम शनिकुंभ12 अप्रैल 208120 मार्च 20842 साल 11 महीनेआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या कर्क राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

नहीं। शनि मीन में हैं, कर्क से नौवें भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है। पिछली ढैय्या, अष्टम शनि, 29 मार्च 2025 को ख़त्म हुई।

कर्क राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 28 जनवरी 2041 से 30 अगस्त 2044 तक; अष्टम शनि 25 फ़रवरी 2052 से 5 फ़रवरी 2055 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। कर्क राशि की कंटक ढैय्या में शनि तुला में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में कुंभ में।

क्या कर्क राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

कर्क राशि की दोनों ढैय्याएँ शनि की सबसे अच्छी राशियों में पड़ती हैं। कंटक शनि वाली ढैय्या तुला (शनि की उच्च राशि) में पड़ती है, जो हानि नहीं करती (फलदीपिका 26.31)। अष्टम शनि वाली ढैय्या कुंभ (शनि की अपनी राशि) में पड़ती है, जो हानि नहीं करती (फलदीपिका 26.31); पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33), इसलिए इसे काफ़ी हल्का मानें, शून्य नहीं। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

कर्क राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर कर्क राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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आचार्य पराशर से पूछें

AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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