
जन्म कुंडली
Janam Kundliआपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2034 में शुरू होगी
ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। मेष राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि कर्क या वृश्चिक में हों। शनि अभी मीन में हैं, मेष से बारहवें भाव में: यह मेष राशि के लिए साढ़े साती है (चंद्र राशि और उसके दोनों ओर की राशियों पर शनि, लगभग साढ़े सात साल), ढैय्या नहीं। यह 31 मई 2032 को ख़त्म होगी; उसके बाद कंटक शनि 13 जुलाई 2034 से शुरू होगा। मेष राशि की दोनों ढैय्याएँ शनि के लिए कठिन राशियों, कर्क और वृश्चिक, में पड़ती हैं। भारी है, पर निराशा की बात नहीं: नीचे दिए शनिवार के उपाय इसी के लिए हैं।
7 साल 8 महीने बाद शुरू होगी · 13 जुलाई 2034
कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।
कंटक शनि
शनि कर्क में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में
अगली · 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक
लगभग 2 साल 1 महीना। शनि 13 जुलाई 2034 को कर्क में आएँगे और 27 अगस्त 2036 को निकलेंगे, बीच में लौटेंगे नहीं। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कर्क के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 14 सितंबर 2035 से 23 फ़रवरी 2036 तक और 1 जून 2036 से 27 अगस्त 2036 तक।
पिछली बार: 6 सितंबर 2004 से 16 जुलाई 2007 तक।
अष्टम शनि
शनि वृश्चिक में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में
उसके बाद · 11 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक
लगभग 3 साल। शनि 11 दिसंबर 2043 को वृश्चिक में आएँगे और 8 दिसंबर 2046 को वृश्चिक को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 23 जून 2044 से 29 अगस्त 2044 तक वापस तुला में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि वृश्चिक के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 8 दिसंबर 2045 से 8 दिसंबर 2046 तक।
पिछली बार: 2 नवंबर 2014 से 26 अक्टूबर 2017 तक।
ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।
शनि शत्रु राशि में: भारी
मेष राशि से चौथा भाव कर्क है; शनि वहाँ हों तो कंटक शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। मेष के लिए शनि दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) और ग्यारहवें भाव (आय और लाभ) के स्वामी हैं। इसलिए नौकरी और कमाई की बातें घर तक आती हैं। काम के लंबे घंटे परिवार का समय ले सकते हैं, या नौकरी और आय का कोई निर्णय घर बदलने से जुड़ सकता है। कर्क शनि की शत्रु राशि है, और फलदीपिका 26.32 के अनुसार इससे गोचर का असर तीखा होता है। चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी देती है।
कर्क से शनि की दृष्टि कन्या, मकर और मेष पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।
क्या करें मेष राशि वालों के लिए अच्छा रहेगा कि दफ़्तर का काम शाम को घर न लाएँ, और भूमि-भवन या ऋण के काग़ज़ हस्ताक्षर से पहले धीरज से पढ़ लें।
शनि शत्रु राशि में: भारी
वृश्चिक में शनि मेष राशि से आठवें भाव में होते हैं। यही अष्टम शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है। वृश्चिक भी शनि की शत्रु राशि है, इसलिए कंटक ढैय्या के लिए बताया गया तीखेपन का नियम यहाँ भी लागू होता है। दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) और ग्यारहवें भाव (आय और लाभ) के स्वामी होकर शनि नौकरी और कमाई की बातें आठवें भाव में लाते हैं। इसलिए काम में अचानक बदलाव, आमदनी पर कोई अनचाहा बोझ या पैतृक संपत्ति का कोई प्रश्न सामने आ सकता है।
वृश्चिक से शनि की दृष्टि मकर, वृषभ और सिंह पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।
फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।
क्या करें काम की अचानक ज़रूरतों के लिए थोड़ी बचत अलग रखें, और मित्रों के साथ पैसों का लेन-देन लिखकर रखें।
शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।
ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।
शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।
नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर मेष राशि के लिए है।
मेष राशि के स्वामी मंगल हैं, और शनि मंगल को शत्रु मानते हैं, इसलिए यह ढैय्या उस साहस और उत्साह पर दबाव डालती है जो मंगल देते हैं। मंगल को बल देने के लिए मंगलवार को 'ॐ मंगलाय नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें। मंगलवार मंगल का अपना दिन है, और इसी दिन हनुमान जी की पूजा भी होती है।
यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

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आपका महीना दिन-ब-दिन, आपकी अपनी कुंडली से: अच्छे दिन, सँभलकर चलने वाले दिन, और ज़रूरी कामों की सही तारीख़ें।
27 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।
किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। मेष राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।
मेष राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। मेष राशि पर अभी साढ़े साती चल रही है, 31 मई 2032 तक। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।
| ढैय्या | शनि किस राशि में | कब से | कब तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| अष्टम शनि | वृश्चिक | 21 दिसंबर 1984 | 17 दिसंबर 1987 | 3 साल | बीता |
| कंटक शनि | कर्क | 6 सितंबर 2004 | 16 जुलाई 2007 | 2 साल 10 महीने | बीता |
| अष्टम शनि | वृश्चिक | 2 नवंबर 2014 | 26 अक्टूबर 2017 | 3 साल | बीता |
| कंटक शनि | कर्क | 13 जुलाई 2034 | 27 अगस्त 2036 | 2 साल 1 महीना | आगे |
| अष्टम शनि | वृश्चिक | 11 दिसंबर 2043 | 8 दिसंबर 2046 | 3 साल | आगे |
| कंटक शनि | कर्क | 24 अगस्त 2063 | 3 जुलाई 2066 | 2 साल 10 महीने | आगे |
| अष्टम शनि | वृश्चिक | 5 फ़रवरी 2073 | 11 अक्टूबर 2076 | 3 साल 8 महीने | आगे |
एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।
इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है
ढैय्या नहीं, साढ़े साती चल रही है, जो 31 मई 2032 तक रहेगी। शनि अभी मीन में हैं, मेष से बारहवें भाव में।
कंटक शनि 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक; अष्टम शनि 11 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक।
कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। मेष राशि की कंटक ढैय्या में शनि कर्क में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में वृश्चिक में।
मेष राशि की दोनों ढैय्याएँ भारी ढैय्याओं में गिनी जाती हैं। कंटक ढैय्या कर्क में और अष्टम वृश्चिक में पड़ती है, दोनों शनि के शत्रुओं की राशियाँ, जो दोनों को तीखा करती हैं (फलदीपिका 26.32), आठवें भाव की अपनी कड़ी चेतावनी (26.33) के ऊपर। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।
इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर मेष राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।
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