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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2034 में शुरू होगी

मेष राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। मेष राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि कर्क या वृश्चिक में हों। शनि अभी मीन में हैं, मेष से बारहवें भाव में: यह मेष राशि के लिए साढ़े साती है (चंद्र राशि और उसके दोनों ओर की राशियों पर शनि, लगभग साढ़े सात साल), ढैय्या नहीं। यह 31 मई 2032 को ख़त्म होगी; उसके बाद कंटक शनि 13 जुलाई 2034 से शुरू होगा। मेष राशि की दोनों ढैय्याएँ शनि के लिए कठिन राशियों, कर्क और वृश्चिक, में पड़ती हैं। भारी है, पर निराशा की बात नहीं: नीचे दिए शनिवार के उपाय इसी के लिए हैं।

7 साल 8 महीने बाद शुरू होगी · 13 जुलाई 2034

मेष राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, कर्क (कंटक) और वृश्चिक (अष्टम) चिह्नितमेष राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, कर्क (कंटक) और वृश्चिक (अष्टम) चिह्नित

मेष राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि कर्क में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक

लगभग 2 साल 1 महीना। शनि 13 जुलाई 2034 को कर्क में आएँगे और 27 अगस्त 2036 को निकलेंगे, बीच में लौटेंगे नहीं। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कर्क के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 14 सितंबर 2035 से 23 फ़रवरी 2036 तक और 1 जून 2036 से 27 अगस्त 2036 तक।

पिछली बार: 6 सितंबर 2004 से 16 जुलाई 2007 तक।

अष्टम शनि

शनि वृश्चिक में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 11 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक

लगभग 3 साल। शनि 11 दिसंबर 2043 को वृश्चिक में आएँगे और 8 दिसंबर 2046 को वृश्चिक को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 23 जून 2044 से 29 अगस्त 2044 तक वापस तुला में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि वृश्चिक के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 8 दिसंबर 2045 से 8 दिसंबर 2046 तक।

पिछली बार: 2 नवंबर 2014 से 26 अक्टूबर 2017 तक।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर मेष राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

मेष राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि कर्क में

शनि शत्रु राशि में: भारी

मेष राशि से चौथा भाव कर्क है; शनि वहाँ हों तो कंटक शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। मेष के लिए शनि दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) और ग्यारहवें भाव (आय और लाभ) के स्वामी हैं। इसलिए नौकरी और कमाई की बातें घर तक आती हैं। काम के लंबे घंटे परिवार का समय ले सकते हैं, या नौकरी और आय का कोई निर्णय घर बदलने से जुड़ सकता है। कर्क शनि की शत्रु राशि है, और फलदीपिका 26.32 के अनुसार इससे गोचर का असर तीखा होता है। चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसामेष के लिए शनि दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र) और ग्यारहवें भाव (आय) के स्वामी हैं और कर्क से उसी दसवें भाव को देखते हैं। इसलिए नौकरी में घंटे बढ़ सकते हैं पर वेतन उतना नहीं। पद का बदलाव लिखित में पक्का होने पर ही स्वीकारें।
  • घर-परिवारकर्क में चौथे भाव के शनि घर को ही अस्थिर कर सकते हैं: माँ की ज़रूरतें, टलती मरम्मत, या काम के कारण घर बदलना। दिन का एक भोजन पूरा परिवार साथ बैठकर करे, दफ़्तर की बातों से दूर।
  • विवाह और साझेदारीमेष के लिए दांपत्य पर दबाव प्रायः इस रूप में आएगा कि काम साथ का समय खा जाए, क्योंकि इस ढैय्या में दसवें भाव के स्वामी चौथे भाव में होंगे। सप्ताह की दो शामें केवल पति या पत्नी के लिए रखें।
  • सेहतशनि की दृष्टि आपके पहले भाव (शरीर) और छठे भाव (रोग) पर भी पड़ती है, और इसका असर मेहनती मेष राशि वालों में धीरे-धीरे बढ़ती थकान के रूप में दिख सकता है। सोने का समय तय रखें और ढैय्या के दौरान रक्तचाप की जाँच कराएँ।

कर्क से शनि की दृष्टि कन्या, मकर और मेष पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें मेष राशि वालों के लिए अच्छा रहेगा कि दफ़्तर का काम शाम को घर न लाएँ, और भूमि-भवन या ऋण के काग़ज़ हस्ताक्षर से पहले धीरज से पढ़ लें।

अष्टम शनि · शनि वृश्चिक में

शनि शत्रु राशि में: भारी

वृश्चिक में शनि मेष राशि से आठवें भाव में होते हैं। यही अष्टम शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है। वृश्चिक भी शनि की शत्रु राशि है, इसलिए कंटक ढैय्या के लिए बताया गया तीखेपन का नियम यहाँ भी लागू होता है। दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) और ग्यारहवें भाव (आय और लाभ) के स्वामी होकर शनि नौकरी और कमाई की बातें आठवें भाव में लाते हैं। इसलिए काम में अचानक बदलाव, आमदनी पर कोई अनचाहा बोझ या पैतृक संपत्ति का कोई प्रश्न सामने आ सकता है।

  • काम और पैसावृश्चिक से शनि दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र) और दूसरे भाव (जमा-पूँजी) को देखते हैं और ग्यारहवें भाव (आय) की बातें आठवें भाव में ले आते हैं। इसलिए वेतन-वृद्धि या बकाया अटक सकता है। कोई नया क़र्ज़ लेने से पहले तीन महीने की क़िस्तें अलग रख लें।
  • घर-परिवारबच्चों की फ़ीस और घर का बटुआ एक ही समय दबाव में आ सकते हैं, क्योंकि शनि की दृष्टि पाँचवें भाव (संतान) और दूसरे भाव (परिवार) पर पड़ती है। पूरे साल की पढ़ाई का ख़र्च साल की शुरुआत में ही तय कर लें।
  • विवाह और साझेदारीसातवें से दूसरा होने के कारण आठवाँ भाव जीवनसाथी के परिवार का भाव है, इसलिए इस अष्टम ढैय्या में ससुराल और उनके पैसों से जुड़े प्रश्न उठ सकते हैं। ससुराल से लिया या दिया कोई भी उधार काग़ज़ पर रखें, संबंध कितने भी निकट हों।
  • सेहतआठवाँ भाव लंबे और छिपे रोगों का है, इसलिए इस अष्टम ढैय्या में छोटा लक्षण भी जल्दी ध्यान माँगेगा। मामूली तकलीफ़ का इलाज तुरंत कराएँ और साल में एक बार पूरे शरीर की जाँच कराएँ।

वृश्चिक से शनि की दृष्टि मकर, वृषभ और सिंह पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें काम की अचानक ज़रूरतों के लिए थोड़ी बचत अलग रखें, और मित्रों के साथ पैसों का लेन-देन लिखकर रखें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

मेष राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर मेष राशि के लिए है।

मेष राशि के स्वामी मंगल हैं, और शनि मंगल को शत्रु मानते हैं, इसलिए यह ढैय्या उस साहस और उत्साह पर दबाव डालती है जो मंगल देते हैं। मंगल को बल देने के लिए मंगलवार को 'ॐ मंगलाय नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें। मंगलवार मंगल का अपना दिन है, और इसी दिन हनुमान जी की पूजा भी होती है।

मेष राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ मेष लग्न होता, तो शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। मेष राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

मेष राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

मेष राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। मेष राशि पर अभी साढ़े साती चल रही है, 31 मई 2032 तक। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2025–2032साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव29 मार्च 2025 – 31 मई 2032
  • 2034–2036कंटक शनि · कर्क13 जुलाई 2034 – 27 अगस्त 2036
  • 2043–2046अष्टम शनि · वृश्चिक11 दिसंबर 2043 – 8 दिसंबर 2046
  • 2054–2062साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव14 मई 2054 – 7 मार्च 2062
मेष राशि की हर ढैय्या, 1984 से 2076
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
अष्टम शनिवृश्चिक21 दिसंबर 198417 दिसंबर 19873 सालबीता
कंटक शनिकर्क6 सितंबर 200416 जुलाई 20072 साल 10 महीनेबीता
अष्टम शनिवृश्चिक2 नवंबर 201426 अक्टूबर 20173 सालबीता
कंटक शनिकर्क13 जुलाई 203427 अगस्त 20362 साल 1 महीनाआगे
अष्टम शनिवृश्चिक11 दिसंबर 20438 दिसंबर 20463 सालआगे
कंटक शनिकर्क24 अगस्त 20633 जुलाई 20662 साल 10 महीनेआगे
अष्टम शनिवृश्चिक5 फ़रवरी 207311 अक्टूबर 20763 साल 8 महीनेआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या मेष राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

ढैय्या नहीं, साढ़े साती चल रही है, जो 31 मई 2032 तक रहेगी। शनि अभी मीन में हैं, मेष से बारहवें भाव में।

मेष राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक; अष्टम शनि 11 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। मेष राशि की कंटक ढैय्या में शनि कर्क में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में वृश्चिक में।

क्या मेष राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

मेष राशि की दोनों ढैय्याएँ भारी ढैय्याओं में गिनी जाती हैं। कंटक ढैय्या कर्क में और अष्टम वृश्चिक में पड़ती है, दोनों शनि के शत्रुओं की राशियाँ, जो दोनों को तीखा करती हैं (फलदीपिका 26.32), आठवें भाव की अपनी कड़ी चेतावनी (26.33) के ऊपर। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

मेष राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर मेष राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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आचार्य पराशर से पूछें

AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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