
जन्म कुंडली
Janam Kundliआपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2036 में शुरू होगी
ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। वृषभ राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि सिंह या धनु में हों। शनि अभी मीन में हैं, वृषभ से ग्यारहवें भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। ग्यारहवाँ भाव उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2)। वृषभ राशि की साढ़े साती 3 जून 2027 से शुरू होगी, बीच में 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक विराम रहेगा। वृषभ राशि की दोनों ढैय्याओं का अपना भार है: सिंह शनि के लिए कठिन राशि है, और आठवें भाव की अपनी चेतावनी है।
9 साल 9 महीने बाद शुरू होगी · 27 अगस्त 2036
कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।
कंटक शनि
शनि सिंह में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में
अगली · 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक
लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 27 अगस्त 2036 को सिंह में आएँगे और 13 जुलाई 2039 को सिंह को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 22 अक्टूबर 2038 से 4 अप्रैल 2039 तक आगे कन्या में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि सिंह के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 10 नवंबर 2037 से 11 फ़रवरी 2038 तक, 31 जुलाई 2038 से 22 अक्टूबर 2038 तक और 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक।
पिछली बार: 1 नवंबर 2006 से 10 सितंबर 2009 तक।
अष्टम शनि
शनि धनु में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में
उसके बाद · 8 दिसंबर 2046 से 4 दिसंबर 2049 तक
लगभग 3 साल। शनि 8 दिसंबर 2046 को धनु में आएँगे और 4 दिसंबर 2049 को धनु को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 6 मार्च 2049 से 9 जुलाई 2049 तक आगे मकर में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि धनु के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 12 मार्च 2048 से 7 जून 2048 तक, 6 दिसंबर 2048 से 6 मार्च 2049 तक और 10 जुलाई 2049 से 4 दिसंबर 2049 तक।
पिछली बार: 26 जनवरी 2017 से 24 जनवरी 2020 तक।
ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।
शनि शत्रु राशि में: भारी
शनि जब सिंह में हों, तो वे वृषभ राशि से चौथे भाव में होते हैं। यही कंटक शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। वृषभ राशि के लिए शनि नौवें भाव (पिता, भाग्य और धर्म) और दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) के स्वामी हैं। नौवाँ भाव त्रिकोण है (पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव, जिन्हें लक्ष्मी-स्थान कहते हैं), और दसवाँ भाव केंद्र है (पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव, कुंडली के चार स्तंभ)। जो ग्रह एक केंद्र और एक त्रिकोण, दोनों के स्वामी हों, उन्हें योगकारक कहते हैं। इस तरह आपकी चंद्र राशि से गिनने पर शनि आपके योगकारक हैं। योगकारक होने से यह ढैय्या आम तौर पर हल्की मानी जाती है, पर शत्रु राशि सिंह में होने से इसमें कुछ तीखापन रहता है (फलदीपिका 26.32)। इन्हीं दो भावों के कारण पिता और बड़ों के प्रति कर्तव्य और काम की माँगें, दोनों घर तक आती हैं, जैसे माता-पिता की सेवा, घर को अस्थिर करने वाला तबादला, या पिता की ओर से आने वाली संपत्ति। चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी है।
सिंह से शनि की दृष्टि तुला, कुंभ और वृषभ पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।
क्या करें माता-पिता की देखभाल परिवार में खुलकर बाँटें, और पुश्तैनी संपत्ति बेचने या बाँटने से पहले उसके काग़ज़ सब मिलकर देख लें।
शनि सम राशि में
वृषभ राशि से आठवाँ भाव धनु है। शनि वहाँ हों तो अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। नौवें भाव (पिता, भाग्य और धर्म) और दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) के स्वामी होने से शनि इन दोनों की बातें यहाँ ले आते हैं। इसलिए काम में अचानक मोड़, पिता का स्वास्थ्य या उनकी ओर से आने वाली संपत्ति ध्यान माँग सकती है। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है, इसलिए असर न हल्का होता है, न तीखा। यहाँ शनि आपके योगकारक के रूप में आते हैं। फिर भी आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।
धनु से शनि की दृष्टि कुंभ, मिथुन और कन्या पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।
फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।
क्या करें अपनी स्वास्थ्य जाँच के साथ पिता की जाँच में भी उनके साथ जाएँ, और काम में कोई भी बदलाव हो तो चाल धीमी और स्थिर रखें।
शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।
ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।
शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।
नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर वृषभ राशि के लिए है।
शनि आपके योगकारक हैं, इसलिए उन्हें शांत करने से ज़्यादा बल देना फलदायी है। शनिवार को शनि का व्रत रखें और सूर्यास्त के बाद उड़द की दाल जैसे सादे भोजन से व्रत खोलें, और लगन से काम और ईमानदार व्यवहार जैसे उनके गुण अपनाएँ। आपकी राशि के स्वामी शुक्र शनि के मित्र हैं, और शुक्र की देवी लक्ष्मी जी हैं, इसलिए शुक्रवार को लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ दोनों को सहारा देता है।
यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

आपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
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आपका महीना दिन-ब-दिन, आपकी अपनी कुंडली से: अच्छे दिन, सँभलकर चलने वाले दिन, और ज़रूरी कामों की सही तारीख़ें।
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उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।
किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। वृषभ राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।
वृषभ राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। वृषभ राशि की अगली साढ़े साती 3 जून 2027 से 13 जुलाई 2034 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।
| ढैय्या | शनि किस राशि में | कब से | कब तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| अष्टम शनि | धनु | 17 दिसंबर 1987 | 15 दिसंबर 1990 | 3 साल | बीता |
| कंटक शनि | सिंह | 1 नवंबर 2006 | 10 सितंबर 2009 | 2 साल 10 महीने | बीता |
| अष्टम शनि | धनु | 26 जनवरी 2017 | 24 जनवरी 2020 | 3 साल | बीता |
| कंटक शनि | सिंह | 27 अगस्त 2036 | 13 जुलाई 2039 | 2 साल 10 महीने | आगे |
| अष्टम शनि | धनु | 8 दिसंबर 2046 | 4 दिसंबर 2049 | 3 साल | आगे |
| कंटक शनि | सिंह | 13 अक्टूबर 2065 | 30 अगस्त 2068 | 2 साल 11 महीने | आगे |
| अष्टम शनि | धनु | 16 जनवरी 2076 | 15 जनवरी 2079 | 3 साल | आगे |
एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।
इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है
नहीं। शनि मीन में हैं, वृषभ से ग्यारहवें भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है।
कंटक शनि 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक; अष्टम शनि 8 दिसंबर 2046 से 4 दिसंबर 2049 तक।
कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। वृषभ राशि की कंटक ढैय्या में शनि सिंह में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में धनु में।
दोनों का अपना भार है, अलग-अलग कारणों से। कंटक शनि वाली ढैय्या सिंह (शनि के शत्रु की राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32)। अष्टम शनि वाली ढैय्या धनु (शनि के लिए सम राशि) में पड़ती है, जो असर न घटाती है, न बढ़ाती है; आठवाँ भाव अपने-आप में शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। चंद्र राशि से गिनें तो शनि आपके योगकारक हैं, इसलिए दोनों में सहारा भी रहता है। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।
इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर वृषभ राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।
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