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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2036 में शुरू होगी

वृषभ राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। वृषभ राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि सिंह या धनु में हों। शनि अभी मीन में हैं, वृषभ से ग्यारहवें भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। ग्यारहवाँ भाव उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2)। वृषभ राशि की साढ़े साती 3 जून 2027 से शुरू होगी, बीच में 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक विराम रहेगा। वृषभ राशि की दोनों ढैय्याओं का अपना भार है: सिंह शनि के लिए कठिन राशि है, और आठवें भाव की अपनी चेतावनी है।

9 साल 9 महीने बाद शुरू होगी · 27 अगस्त 2036

वृषभ राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, सिंह (कंटक) और धनु (अष्टम) चिह्नितवृषभ राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, सिंह (कंटक) और धनु (अष्टम) चिह्नित

वृषभ राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि सिंह में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक

लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 27 अगस्त 2036 को सिंह में आएँगे और 13 जुलाई 2039 को सिंह को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 22 अक्टूबर 2038 से 4 अप्रैल 2039 तक आगे कन्या में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि सिंह के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 10 नवंबर 2037 से 11 फ़रवरी 2038 तक, 31 जुलाई 2038 से 22 अक्टूबर 2038 तक और 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक।

पिछली बार: 1 नवंबर 2006 से 10 सितंबर 2009 तक।

अष्टम शनि

शनि धनु में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 8 दिसंबर 2046 से 4 दिसंबर 2049 तक

लगभग 3 साल। शनि 8 दिसंबर 2046 को धनु में आएँगे और 4 दिसंबर 2049 को धनु को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 6 मार्च 2049 से 9 जुलाई 2049 तक आगे मकर में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि धनु के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 12 मार्च 2048 से 7 जून 2048 तक, 6 दिसंबर 2048 से 6 मार्च 2049 तक और 10 जुलाई 2049 से 4 दिसंबर 2049 तक।

पिछली बार: 26 जनवरी 2017 से 24 जनवरी 2020 तक।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर वृषभ राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

वृषभ राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि सिंह में

शनि शत्रु राशि में: भारी

शनि जब सिंह में हों, तो वे वृषभ राशि से चौथे भाव में होते हैं। यही कंटक शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। वृषभ राशि के लिए शनि नौवें भाव (पिता, भाग्य और धर्म) और दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) के स्वामी हैं। नौवाँ भाव त्रिकोण है (पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव, जिन्हें लक्ष्मी-स्थान कहते हैं), और दसवाँ भाव केंद्र है (पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव, कुंडली के चार स्तंभ)। जो ग्रह एक केंद्र और एक त्रिकोण, दोनों के स्वामी हों, उन्हें योगकारक कहते हैं। इस तरह आपकी चंद्र राशि से गिनने पर शनि आपके योगकारक हैं। योगकारक होने से यह ढैय्या आम तौर पर हल्की मानी जाती है, पर शत्रु राशि सिंह में होने से इसमें कुछ तीखापन रहता है (फलदीपिका 26.32)। इन्हीं दो भावों के कारण पिता और बड़ों के प्रति कर्तव्य और काम की माँगें, दोनों घर तक आती हैं, जैसे माता-पिता की सेवा, घर को अस्थिर करने वाला तबादला, या पिता की ओर से आने वाली संपत्ति। चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी है।

  • काम और पैसाआपके योगकारक शनि सिंह से अपने ही दसवें भाव पर दृष्टि डालते हैं, इसलिए उसी पद पर ज़िम्मेदारी बढ़ सकती है। अतिरिक्त काम धीरज से सँभालें और जो भी पूरा करें, उसका लेखा रखें।
  • घर-परिवारनौवें भाव (पिता) के स्वामी चौथे भाव से गुज़रें, तो माता-पिता की सेवा और नौकरी का तबादला घर को दो ओर खींच सकते हैं। कहीं और जाकर बसने से पहले माता-पिता से खुलकर बात कर लें।
  • विवाह और साझेदारीपहले भाव पर शनि की दृष्टि से आपका मन चुप्पी और कर्तव्य में ही लगा रह सकता है, जिसे पति या पत्नी दूरी समझ सकते हैं। जो बात भारी लगे, उसे अकेले ढोने के बजाय कह दें।
  • सेहतछठा भाव (रोग) भी इसी दृष्टि में है, इसलिए कंटक ढैय्या में पुराने दर्द और तकलीफ़ें अधिक देखभाल माँग सकती हैं। रोज़ टहलें, और चिकित्सक की बताई दवा का क्रम बीच में न छोड़ें।

सिंह से शनि की दृष्टि तुला, कुंभ और वृषभ पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें माता-पिता की देखभाल परिवार में खुलकर बाँटें, और पुश्तैनी संपत्ति बेचने या बाँटने से पहले उसके काग़ज़ सब मिलकर देख लें।

अष्टम शनि · शनि धनु में

शनि सम राशि में

वृषभ राशि से आठवाँ भाव धनु है। शनि वहाँ हों तो अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। नौवें भाव (पिता, भाग्य और धर्म) और दसवें भाव (कर्म-क्षेत्र और मान-प्रतिष्ठा) के स्वामी होने से शनि इन दोनों की बातें यहाँ ले आते हैं। इसलिए काम में अचानक मोड़, पिता का स्वास्थ्य या उनकी ओर से आने वाली संपत्ति ध्यान माँग सकती है। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है, इसलिए असर न हल्का होता है, न तीखा। यहाँ शनि आपके योगकारक के रूप में आते हैं। फिर भी आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसाआठवें भाव से भी आपके योगकारक शनि अपने दसवें भाव को देखते हैं, इसलिए काम में अचानक मोड़ आए तो जल्दबाज़ी में त्यागपत्र देने के बजाय धैर्य रखें। नौकरी का कोई भी निर्णय किसी भरोसेमंद वरिष्ठ से बात करके लें।
  • घर-परिवारदाख़िला, पढ़ाई और बच्चे की पहली नौकरी, सब परिवार की जमा-पूँजी पर भार डाल सकते हैं, क्योंकि शनि की दृष्टि दूसरे भाव (जमा-पूँजी) और पाँचवें भाव (संतान) पर है। पढ़ाई के बड़े ख़र्च की राशि सब मिलकर पहले तय करें, फिर संस्थान चुनें।
  • विवाह और साझेदारीससुराल के मामले आठवें भाव के विषय हैं, और वहाँ शनि के रहते वे धीरे-धीरे चलते हैं, जिनमें जीवनसाथी की ओर के बुज़ुर्ग भी शामिल हो सकते हैं। सास-ससुर की मदद करें, पर उनके निर्णय अपने हाथ में न लें।
  • सेहतदो पीढ़ियों का स्वास्थ्य सामने आता है, क्योंकि आठवाँ भाव लंबे रोगों का है और शनि इसमें नौवें भाव (पिता) का स्वामित्व ले आते हैं। अपनी और माता-पिता की दवा और जाँच के काग़ज़ एक ही जगह सँभालकर रखें।

धनु से शनि की दृष्टि कुंभ, मिथुन और कन्या पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें अपनी स्वास्थ्य जाँच के साथ पिता की जाँच में भी उनके साथ जाएँ, और काम में कोई भी बदलाव हो तो चाल धीमी और स्थिर रखें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

वृषभ राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर वृषभ राशि के लिए है।

शनि आपके योगकारक हैं, इसलिए उन्हें शांत करने से ज़्यादा बल देना फलदायी है। शनिवार को शनि का व्रत रखें और सूर्यास्त के बाद उड़द की दाल जैसे सादे भोजन से व्रत खोलें, और लगन से काम और ईमानदार व्यवहार जैसे उनके गुण अपनाएँ। आपकी राशि के स्वामी शुक्र शनि के मित्र हैं, और शुक्र की देवी लक्ष्मी जी हैं, इसलिए शुक्रवार को लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ दोनों को सहारा देता है।

वृषभ राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ वृषभ लग्न होता, तो शनि नौवें और दसवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। वृषभ राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

वृषभ राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

वृषभ राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। वृषभ राशि की अगली साढ़े साती 3 जून 2027 से 13 जुलाई 2034 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2027–2034साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव3 जून 2027 – 13 जुलाई 2034
  • 2036–2039कंटक शनि · सिंह27 अगस्त 2036 – 13 जुलाई 2039
  • 2046–2049अष्टम शनि · धनु8 दिसंबर 2046 – 4 दिसंबर 2049
वृषभ राशि की हर ढैय्या, 1987 से 2079
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
अष्टम शनिधनु17 दिसंबर 198715 दिसंबर 19903 सालबीता
कंटक शनिसिंह1 नवंबर 200610 सितंबर 20092 साल 10 महीनेबीता
अष्टम शनिधनु26 जनवरी 201724 जनवरी 20203 सालबीता
कंटक शनिसिंह27 अगस्त 203613 जुलाई 20392 साल 10 महीनेआगे
अष्टम शनिधनु8 दिसंबर 20464 दिसंबर 20493 सालआगे
कंटक शनिसिंह13 अक्टूबर 206530 अगस्त 20682 साल 11 महीनेआगे
अष्टम शनिधनु16 जनवरी 207615 जनवरी 20793 सालआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या वृषभ राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

नहीं। शनि मीन में हैं, वृषभ से ग्यारहवें भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है।

वृषभ राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक; अष्टम शनि 8 दिसंबर 2046 से 4 दिसंबर 2049 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। वृषभ राशि की कंटक ढैय्या में शनि सिंह में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में धनु में।

क्या वृषभ राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

दोनों का अपना भार है, अलग-अलग कारणों से। कंटक शनि वाली ढैय्या सिंह (शनि के शत्रु की राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32)। अष्टम शनि वाली ढैय्या धनु (शनि के लिए सम राशि) में पड़ती है, जो असर न घटाती है, न बढ़ाती है; आठवाँ भाव अपने-आप में शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। चंद्र राशि से गिनें तो शनि आपके योगकारक हैं, इसलिए दोनों में सहारा भी रहता है। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

वृषभ राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर वृषभ राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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