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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2038 में शुरू होगी

मिथुन राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 22 अक्टूबर 2038 से 26 सितंबर 2041 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। मिथुन राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि कन्या या मकर में हों। शनि अभी मीन में हैं, मिथुन से दसवें भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। मिथुन राशि की साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से शुरू होगी, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक विराम रहेगा। मिथुन राशि की दोनों ढैय्याएँ उन राशियों, कन्या और मकर, में पड़ती हैं जहाँ शनि सहज रहते हैं, इसलिए ये शत्रु राशि वाली ढैय्या से हल्की रहती हैं।

11 साल 11 महीने बाद शुरू होगी · 22 अक्टूबर 2038

मिथुन राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, कन्या (कंटक) और मकर (अष्टम) चिह्नितमिथुन राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, कन्या (कंटक) और मकर (अष्टम) चिह्नित

मिथुन राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि कन्या में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 22 अक्टूबर 2038 से 26 सितंबर 2041 तक

लगभग 2 साल 11 महीने। शनि 22 अक्टूबर 2038 को कन्या में आएँगे और 26 सितंबर 2041 को कन्या को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 5 अप्रैल 2039 से 12 जुलाई 2039 तक वापस सिंह में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी) और 28 जनवरी 2041 से 5 फ़रवरी 2041 तक आगे तुला में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कन्या के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 2 अक्टूबर 2040 से 28 जनवरी 2041 तक और 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक।

पिछली बार: 10 सितंबर 2009 से 4 अगस्त 2012 तक।

अष्टम शनि

शनि मकर में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 6 मार्च 2049 से 25 फ़रवरी 2052 तक

लगभग 3 साल। शनि 6 मार्च 2049 को मकर में आएँगे और 25 फ़रवरी 2052 को मकर को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 10 जुलाई 2049 से 3 दिसंबर 2049 तक वापस धनु में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मकर के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 28 फ़रवरी 2051 से 20 सितंबर 2051 तक और 15 नवंबर 2051 से 25 फ़रवरी 2052 तक।

पिछली बार: 24 जनवरी 2020 से 17 जनवरी 2023 तक।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर मिथुन राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

मिथुन राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि कन्या में

शनि मित्र राशि में: सहज

मिथुन राशि के लिए कंटक शनि की ढैय्या तब होती है जब शनि कन्या में, यानी चौथे भाव में हों। इसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। कन्या शनि की मित्र राशि है, इसलिए असर शत्रु राशि की तुलना में हल्का रहता है। फिर भी फलदीपिका 26.22 में चौथे भाव के शनि के लिए जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी है। मिथुन के लिए शनि आठवें भाव (अचानक घटनाएँ, ससुराल और पैतृक संपत्ति) और नौवें भाव (पिता, भाग्य और धर्म) के स्वामी हैं। इसलिए पैतृक संपत्ति, ससुराल या पिता से जुड़े काम घर तक आकर मन पर भार डाल सकते हैं।

  • काम और पैसाकन्या से शनि की दृष्टि आपके दसवें भाव (मीन) पर पड़ती है। इसलिए काम में पहचान धीरे मिल सकती है और पदोन्नति में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है। इस धीमे समय में अपने क्षेत्र का कोई नया हुनर सीखें।
  • घर-परिवारआठवें और नौवें भाव के स्वामी होकर शनि पिता के काम-काज और पैतृक बातें घर के भाव में ले आते हैं। माता-पिता के नाम की संपत्ति में उत्तराधिकारी का नाम साफ़ दर्ज हो और काग़ज़ पूरे हों, यह देख लें।
  • विवाह और साझेदारीअपने माता-पिता और ससुराल, दोनों के प्रति कर्तव्य दांपत्य के समय में से हिस्सा माँग सकते हैं, क्योंकि शनि पिता (नौवाँ भाव) और ससुराल (आठवाँ भाव), दोनों को घर से जोड़ते हैं। दोनों परिवारों के आने-जाने और काम आपस में बाँट लें।
  • सेहतपहले और छठे भाव पर शनि की दृष्टि है, इसलिए मिथुन राशि वालों के लिए भागदौड़ भरी, बेतरतीब दिनचर्या जल्दी तनाव में बदल सकती है। भोजन तय समय पर करें और सोने से पहले का आख़िरी घंटा शांत रखें।

कन्या से शनि की दृष्टि वृश्चिक, मीन और मिथुन पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें ससुराल से मिलना-जुलना सहज और बिना जल्दबाज़ी के रखें, और पिता को अपने कामकाज में ज़रूरत हो तो उनका हाथ बँटाएँ।

अष्टम शनि · शनि मकर में

शनि अपनी राशि में: स्थिर

मिथुन राशि के लिए शनि आठवें भाव और नौवें भाव (पिता, भाग्य और धर्म) के स्वामी हैं। मकर (आठवाँ भाव) उनकी अपनी राशि है, यानी स्वामी अपने ही भाव में बैठते हैं। चंद्र से आठवें भाव में शनि के इस गोचर को अष्टम शनि की ढैय्या कहते हैं, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। मिथुन के लिए इसमें पिता के परिवार की बातें भी जुड़ जाती हैं। फलदीपिका (26.31) के अनुसार अपनी राशि में बैठे शनि हानि नहीं करते, पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। इसलिए आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में दी गई संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी को मिथुन राशि वाले बहुत हल्का समझें, पर बेअसर नहीं।

  • काम और पैसामकर से आठवें भाव के स्वामी शनि दसवें भाव को देखते हैं, इसलिए नौकरी में बदलाव एकाएक नहीं, धीमी प्रक्रियाओं से होकर आता है। नियुक्ति-पत्र, भविष्य निधि और सेवा के काग़ज़ व्यवस्थित रखें।
  • घर-परिवारदूसरे भाव (परिवार और जमा-पूँजी) पर शनि की दृष्टि है, इसलिए संयुक्त परिवार का धन सावधानी से सँभालना होता है। घर का रोज़ का ख़र्च एक अलग खाते से चलाएँ, लंबी बचत से अलग।
  • विवाह और साझेदारीशनि आठवें भाव (जीवनसाथी के परिवार का भाव) में बैठते हैं, इसलिए ससुराल के मामले कभी-कभार के बड़े प्रयासों से नहीं, नियमित धैर्य से सँभलते हैं। सास-ससुर से नियमित मिलें, और उन मुलाक़ातों में पैसों की बात न लाएँ।
  • सेहतशनि आठवें भाव के स्वामी होकर उसी भाव में बैठते हैं, इसलिए पुराने रोगों का यह भाव ध्यान में रहता है, और टिकने वाली तकलीफ़ चिकित्सक को दिखानी चाहिए। दो सप्ताह से ज़्यादा चलने वाली खाँसी, दर्द या थकान को अनदेखा न करें।

मकर से शनि की दृष्टि मीन, कर्क और तुला पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें समय पर स्वास्थ्य की जाँच कराते रहें, और पिता के परिवार को जब आपकी ज़रूरत हो, उन्हें समय दें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

मिथुन राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर मिथुन राशि के लिए है।

आपकी राशि के स्वामी बुध शनि के मित्र हैं, इसलिए बुध को बल देने से ढैय्या भीतर से हल्की होती है: बुधवार को विष्णु सहस्रनाम (भगवान विष्णु के हज़ार नाम) का पाठ करें, क्योंकि बुध के देवता भगवान विष्णु हैं। उसी दिन किसी विद्यार्थी को या विष्णु मंदिर में हरी मूँग का दान (ज़रूरतमंद को श्रद्धा से दी गई भेंट) करें; परंपरा में बुध के लिए यही दान बताया गया है।

मिथुन राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ मिथुन लग्न होता, तो शनि आठवें और नौवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। मिथुन राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

मिथुन राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

मिथुन राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। मिथुन राशि की अगली साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2036 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2029–2036साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव8 अगस्त 2029 – 27 अगस्त 2036
  • 2038–2041कंटक शनि · कन्या22 अक्टूबर 2038 – 26 सितंबर 2041
  • 2049–2052अष्टम शनि · मकर6 मार्च 2049 – 25 फ़रवरी 2052
मिथुन राशि की हर ढैय्या, 1990 से 2082
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
अष्टम शनिमकर21 मार्च 199010 नवंबर 19933 साल 8 महीने (अंत में शनि 26 दिन के लिए लौटे थे)बीता
कंटक शनिकन्या10 सितंबर 20094 अगस्त 20122 साल 11 महीनेबीता
अष्टम शनिमकर24 जनवरी 202017 जनवरी 20233 सालबीता
कंटक शनिकन्या22 अक्टूबर 203826 सितंबर 20412 साल 11 महीनेआगे
अष्टम शनिमकर6 मार्च 204925 फ़रवरी 20523 सालआगे
कंटक शनिकन्या30 अगस्त 20684 नवंबर 20702 साल 2 महीनेआगे
अष्टम शनिमकर15 जनवरी 20797 जनवरी 20823 सालआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या मिथुन राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

नहीं। शनि मीन में हैं, मिथुन से दसवें भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है।

मिथुन राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 22 अक्टूबर 2038 से 26 सितंबर 2041 तक; अष्टम शनि 6 मार्च 2049 से 25 फ़रवरी 2052 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। मिथुन राशि की कंटक ढैय्या में शनि कन्या में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में मकर में।

क्या मिथुन राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

दोनों का अपना भार है, अलग-अलग कारणों से। कंटक शनि वाली ढैय्या कन्या (शनि के मित्र की राशि) में पड़ती है, जो इसे शत्रु राशि से हल्का रखती है। अष्टम शनि वाली ढैय्या मकर (शनि की अपनी राशि) में पड़ती है, जो हानि नहीं करती (फलदीपिका 26.31); पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33), इसलिए इसे काफ़ी हल्का मानें, शून्य नहीं। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

मिथुन राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर मिथुन राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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