
जन्म कुंडली
Janam Kundliआपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2032 में शुरू होगी
ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। वृश्चिक राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि कुंभ या मिथुन में हों। शनि अभी मीन में हैं, वृश्चिक से पाँचवें भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। वृश्चिक राशि की दोनों ढैय्याएँ उन राशियों, कुंभ और मिथुन, में पड़ती हैं जहाँ शनि सहज रहते हैं, इसलिए ये शत्रु राशि वाली ढैय्या से हल्की रहती हैं।
5 साल 7 महीने बाद शुरू होगी · 31 मई 2032
कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।
अष्टम शनि
शनि मिथुन में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में
अगली · 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक
लगभग 2 साल 1 महीना। शनि 31 मई 2032 को मिथुन में आएँगे और 13 जुलाई 2034 को निकलेंगे, बीच में लौटेंगे नहीं। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मिथुन के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 30 जुलाई 2033 से 13 जुलाई 2034 तक।
पिछली बार: 23 जुलाई 2002 से 26 मई 2005 तक।
कंटक शनि
शनि कुंभ में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में
उसके बाद · 25 फ़रवरी 2052 से 5 फ़रवरी 2055 तक
लगभग 2 साल 11 महीने। शनि 25 फ़रवरी 2052 को कुंभ में आएँगे और 5 फ़रवरी 2055 को कुंभ को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 14 मई 2054 से 1 सितंबर 2054 तक आगे मीन में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कुंभ के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 14 फ़रवरी 2054 से 14 मई 2054 तक और 2 सितंबर 2054 से 5 फ़रवरी 2055 तक।
पिछली बार: 29 अप्रैल 2022 से 29 मार्च 2025 तक।
ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।
शनि मित्र राशि में: सहज
वृश्चिक राशि से आठवाँ भाव मिथुन है। शनि वहाँ हों तो अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। शनि आपके तीसरे भाव (भाई-बहन, साहस और परिश्रम) और चौथे भाव (घर, माता, वाहन और भूमि-भवन) के स्वामी हैं। इसलिए भाई-बहन, परिवार का घर और वाहन आठवें भाव के दायरे में आ जाते हैं। मित्र राशि होने से मिथुन में शनि का भार शत्रु राशि जितना नहीं रहता। फिर भी आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।
मिथुन से शनि की दृष्टि सिंह, धनु और मीन पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।
फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।
क्या करें वाहन चलाते और यात्रा करते समय सावधान रहें, और पैतृक संपत्ति की बात भाई-बहनों से समय रहते और खुलकर कर लें।
शनि अपनी राशि में: स्थिर
कुंभ शनि की अपनी राशि है, और वृश्चिक राशि से यही चौथा भाव है। शनि वहाँ हों तो कंटक शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। तीसरे भाव (भाई-बहन, साहस और परिश्रम) और इसी चौथे भाव के स्वामी होकर शनि अपने ही भाव में बैठते हैं। वे भाई-बहनों, आपके अपने परिश्रम और परिवार के घर को एक साथ जोड़ते हैं। फलदीपिका (26.31) के अनुसार अपनी राशि में शनि हानि नहीं करते। इसलिए चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में दी गई जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी वृश्चिक राशि वालों पर लागू नहीं होती। शनि की धीमी और स्थिर चाल फिर भी रहती है; नीचे के बिंदु बताते हैं कि वह कहाँ महसूस हो सकती है।
कुंभ से शनि की दृष्टि मेष, सिंह और वृश्चिक पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।
क्या करें यदि घर या ज़मीन भाई-बहनों के साथ साझी है, तो हर एक का हिस्सा शांति से और लिखित में तय कर लें।
शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।
ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।
शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।
नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर वृश्चिक राशि के लिए है।
आपकी राशि के स्वामी मंगल को शनि शत्रु मानते हैं, इसलिए मंगल को बल देना उस साहस और परिश्रम की रक्षा करता है जिसकी यह ढैय्या परीक्षा लेती है: मंगलवार को मंगल कवच स्तोत्र (मंगल की रक्षा-स्तुति) का पाठ करें। मंगलवार को ही हनुमान मंदिर में मसूर की दाल और गुड़ का दान (श्रद्धा से दी गई भेंट) करें; परंपरा में मंगल के लिए यही दान बताया गया है।
यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

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उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।
किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। वृश्चिक राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।
वृश्चिक राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। वृश्चिक राशि की अगली साढ़े साती 28 जनवरी 2041 से 4 दिसंबर 2049 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।
| ढैय्या | शनि किस राशि में | कब से | कब तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| कंटक शनि | कुंभ | 5 मार्च 1993 | 16 फ़रवरी 1996 | 2 साल 11 महीने | बीता |
| अष्टम शनि | मिथुन | 23 जुलाई 2002 | 26 मई 2005 | 2 साल 10 महीने | बीता |
| कंटक शनि | कुंभ | 29 अप्रैल 2022 | 29 मार्च 2025 | 2 साल 11 महीने | बीता |
| अष्टम शनि | मिथुन | 31 मई 2032 | 13 जुलाई 2034 | 2 साल 1 महीना | आगे |
| कंटक शनि | कुंभ | 25 फ़रवरी 2052 | 5 फ़रवरी 2055 | 2 साल 11 महीने | आगे |
| अष्टम शनि | मिथुन | 11 जुलाई 2061 | 9 मई 2064 | 2 साल 10 महीने | आगे |
| कंटक शनि | कुंभ | 12 अप्रैल 2081 | 20 मार्च 2084 | 2 साल 11 महीने | आगे |
एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।
इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है
नहीं। शनि मीन में हैं, वृश्चिक से पाँचवें भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है। पिछली ढैय्या, कंटक शनि, 29 मार्च 2025 को ख़त्म हुई।
अष्टम शनि 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक; कंटक शनि 25 फ़रवरी 2052 से 5 फ़रवरी 2055 तक।
कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। वृश्चिक राशि की कंटक ढैय्या में शनि कुंभ में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में मिथुन में।
दोनों बराबर नहीं हैं: अष्टम शनि वाली ढैय्या ज़्यादा भारी है। कंटक शनि वाली ढैय्या कुंभ (शनि की अपनी राशि) में पड़ती है, जो हानि नहीं करती (फलदीपिका 26.31)। अष्टम शनि वाली ढैय्या मिथुन (शनि के मित्र की राशि) में पड़ती है, जो इसे शत्रु राशि से हल्का रखती है; पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।
इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर वृश्चिक राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।
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