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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2027 में शुरू होगी

मकर राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 3 जून 2027 से 17 अप्रैल 2030 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। मकर राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि मेष या सिंह में हों। शनि अभी मीन में हैं, मकर से तीसरे भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। तीसरा भाव उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2)। मकर राशि की दोनों ढैय्याएँ शनि के लिए कठिन राशियों, मेष और सिंह, में पड़ती हैं। भारी है, पर निराशा की बात नहीं: नीचे दिए शनिवार के उपाय इसी के लिए हैं।

7 महीने बाद शुरू होगी · 3 जून 2027

मकर राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, मेष (कंटक) और सिंह (अष्टम) चिह्नितमकर राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, मेष (कंटक) और सिंह (अष्टम) चिह्नित

मकर राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि मेष में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 3 जून 2027 से 17 अप्रैल 2030 तक

लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 3 जून 2027 को मेष में आएँगे और 17 अप्रैल 2030 को मेष को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक वापस मीन में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी) और 8 अगस्त 2029 से 4 अक्टूबर 2029 तक आगे वृषभ में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मेष के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 3 मई 2029 से 8 अगस्त 2029 तक और 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक।

पिछली बार: 17 अप्रैल 1998 से 7 जून 2000 तक।

अष्टम शनि

शनि सिंह में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक

लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 27 अगस्त 2036 को सिंह में आएँगे और 13 जुलाई 2039 को सिंह को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 22 अक्टूबर 2038 से 4 अप्रैल 2039 तक आगे कन्या में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि सिंह के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 10 नवंबर 2037 से 11 फ़रवरी 2038 तक, 31 जुलाई 2038 से 22 अक्टूबर 2038 तक और 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक।

पिछली बार: 1 नवंबर 2006 से 10 सितंबर 2009 तक।

3 जून 2027 से क्या उम्मीद रखें

3 जून 2027 को शनि मेष में, यानी मकर राशि से चौथे भाव में, आएँगे, और यह कंटक ढैय्या 17 अप्रैल 2030 तक रहेगी। शनि आपकी अपनी राशि के स्वामी हैं, इसलिए यह ढैय्या घर के साथ-साथ आपकी अपनी सेहत और ऊर्जा के इर्द-गिर्द रहेगी। साढ़े चार महीने के पहले दौर के बाद शनि 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक फिर मीन में रहेंगे; मीन आपका तीसरा भाव है, जो उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2), इसलिए यह विराम सचमुच राहत का समय होगा। 8 अगस्त से 4 अक्टूबर 2029 तक शनि थोड़े समय के लिए वृषभ में रहेंगे, और सबसे भारी महीने मेष के आख़िरी तिहाई हिस्से में आएँगे, 3 मई से 8 अगस्त 2029 तक और 5 अक्टूबर 2029 से अंत तक (फलदीपिका 26.25)। घर बदलना या बड़ी मरम्मत टल न सके, तो उसे शनि के मेष में रहते न कराएँ: 3 जून 2027 से पहले निपटा लें, या 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 के उसी विराम में कराएँ।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर मकर राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

मकर राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि मेष में

शनि नीच के: सबसे भारी हिस्सा

शनि आपकी अपनी राशि, यानी पहले भाव (आप स्वयं, शरीर और स्वास्थ्य) के स्वामी हैं, और दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और वाणी) के भी। मकर राशि से चौथा भाव मेष है, और वहाँ से गुज़रते हुए शनि आपका अपना स्वास्थ्य और परिवार की जमा-पूँजी घर की बातों में खींच लाते हैं। इसी को कंटक शनि की ढैय्या कहते हैं, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। मेष शनि की नीच राशि है, और फलदीपिका 26.32 के अनुसार इससे गोचर का असर तीखा होता है। चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसामेष से शनि की दृष्टि आपके दसवें भाव पर पड़ती है, इसलिए जब घर अस्थिर लगे, उसी समय काम भी अधिक धैर्य माँग सकता है। घर के तनाव में नौकरी न छोड़ें; दोनों को अलग-अलग सँभालें।
  • घर-परिवारआपकी राशि के स्वामी चौथे भाव में हों, तो घर का जीवन भारी लग सकता है: मरम्मत का ढेर, या माँ को अधिक देखभाल की ज़रूरत। घर के काम और बुज़ुर्गों की सेवा पूरे परिवार में बाँटें, सब अकेले न उठाएँ।
  • विवाह और साझेदारीशनि पहले भाव के स्वामी हैं, और चौथे भाव से गुज़रते हुए वे आपको अपने भीतर सिमटा सकते हैं, और जीवनसाथी इसे सबसे पहले महसूस करते हैं। थकान हो तो चुप रहने के बजाय जीवनसाथी से कह दें।
  • सेहतआपकी ही राशि के स्वामी शनि चौथे भाव से पहले और छठे भाव को देखते हैं, इसलिए मकर राशि वाले अपनी ऊर्जा और पुरानी बीमारियों पर कड़ी नज़र रखें। सप्ताह में एक दिन विश्राम रखें और कोई दर्द टिके तो जल्दी दिखाएँ।

मेष से शनि की दृष्टि मिथुन, तुला और मकर पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें इस ढैय्या में घर या वाहन के लिए जमा-पूँजी पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ न डालें।

अष्टम शनि · शनि सिंह में

शनि शत्रु राशि में: भारी

मकर राशि से आठवाँ भाव सिंह है, जो शनि की शत्रु राशि है। इसलिए मेष वाली कंटक ढैय्या (नीच के शनि) के लिए बताया गया तीखेपन का नियम यहाँ भी लागू होता है। शनि यहाँ हों तो अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। पहले भाव (आप स्वयं और शरीर) और दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और वाणी) के स्वामी होकर शनि आपका अपना स्वास्थ्य और परिवार का धन आठवें भाव में ले आते हैं। इस भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसादसवें भाव पर शनि की दृष्टि नौकरी में धैर्य माँगती है, और आठवें भाव में बैठे दूसरे भाव के स्वामी आमदनी पर अचानक ख़र्च ला सकते हैं। आपात-निधि उस खाते से अलग रखें जिससे क़िस्तें कटती हैं।
  • घर-परिवारशनि की दृष्टि दूसरे भाव (परिवार और जमा-पूँजी) और पाँचवें भाव पर है, इसलिए परिवार के आपसी रिश्ते और बच्चों के चुनाव, दोनों ध्यान माँगते हैं। बच्चे का विषय या पेशा तय करने से पहले उसकी बात सुनें।
  • विवाह और साझेदारीपैसों को लेकर ससुराल से खटपट हो सकती है, क्योंकि आठवाँ भाव जीवनसाथी के परिवार का है, और वहाँ बैठे शनि दूसरे भाव (परिवार का धन) के भी स्वामी हैं। इस दौरान ससुराल से न उधार लें, न उन्हें दें।
  • सेहतआपकी राशि के स्वामी शनि पुराने रोगों के भाव (आठवें) में हों, तो इस अष्टम ढैय्या में शरीर पर दबाव आता है। पंद्रह दिन से ज़्यादा टिकने वाला कोई भी लक्षण चिकित्सक को दिखाएँ।

सिंह से शनि की दृष्टि तुला, कुंभ और वृषभ पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें यह ढैय्या शुरू होते ही सबसे पहले पूरी स्वास्थ्य जाँच करा लें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

मकर राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर मकर राशि के लिए है।

शनि आपकी अपनी राशि के स्वामी हैं, इसलिए सीधा मार्ग शनि की ही उपासना है: शनिवार को शनि चालीसा या दशरथकृत शनि स्तोत्र (राजा दशरथ की रची मानी जाने वाली शनि की स्तुति) का पाठ करें। इससे आपकी राशि के स्वामी शनि को बल मिलता है, जो इस गोचर में स्वयं आपकी परीक्षा लेंगे।

मकर राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ मकर लग्न होता, तो शनि पहले और दूसरे भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। मकर राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

मकर राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

मकर राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। मकर राशि की अगली साढ़े साती 8 दिसंबर 2046 से 5 फ़रवरी 2055 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2027–2030कंटक शनि · मेष3 जून 2027 – 17 अप्रैल 2030
  • 2036–2039अष्टम शनि · सिंह27 अगस्त 2036 – 13 जुलाई 2039
  • 2046–2055साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव8 दिसंबर 2046 – 5 फ़रवरी 2055
मकर राशि की हर ढैय्या, 1998 से 2089
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
कंटक शनिमेष17 अप्रैल 19987 जून 20002 साल 2 महीनेबीता
अष्टम शनिसिंह1 नवंबर 200610 सितंबर 20092 साल 10 महीनेबीता
कंटक शनिमेष3 जून 202717 अप्रैल 20302 साल 10 महीनेआगे
अष्टम शनिसिंह27 अगस्त 203613 जुलाई 20392 साल 10 महीनेआगे
कंटक शनिमेष7 अप्रैल 205727 मई 20592 साल 2 महीनेआगे
अष्टम शनिसिंह13 अक्टूबर 206530 अगस्त 20682 साल 11 महीनेआगे
कंटक शनिमेष21 मई 20865 अप्रैल 20892 साल 10 महीनेआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या मकर राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

नहीं। शनि मीन में हैं, मकर से तीसरे भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है।

मकर राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 3 जून 2027 से 17 अप्रैल 2030 तक; अष्टम शनि 27 अगस्त 2036 से 13 जुलाई 2039 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। मकर राशि की कंटक ढैय्या में शनि मेष में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में सिंह में।

क्या मकर राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

मकर राशि की दोनों ढैय्याएँ भारी ढैय्याओं में गिनी जाती हैं। कंटक शनि वाली ढैय्या मेष (शनि की नीच राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32)। अष्टम शनि वाली ढैय्या सिंह (शनि के शत्रु की राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32), आठवें भाव की अपनी कड़ी चेतावनी (26.33) के ऊपर। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

मकर राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर मकर राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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