
जन्म कुंडली
Janam Kundliआपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2029 में शुरू होगी
ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। तुला राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि मकर या वृषभ में हों। शनि अभी मीन में हैं, तुला से छठे भाव में, इसलिए कोई ढैय्या नहीं चल रही। छठा भाव उन तीन भावों में है जहाँ चंद्र से शनि शुभ फल देते हैं (फलदीपिका 26.2)। तुला राशि की दोनों ढैय्याएँ उन राशियों, मकर और वृषभ, में पड़ती हैं जहाँ शनि सहज रहते हैं, इसलिए ये शत्रु राशि वाली ढैय्या से हल्की रहती हैं।
2 साल 9 महीने बाद शुरू होगी · 8 अगस्त 2029
कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।
अष्टम शनि
शनि वृषभ में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में
अगली · 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक
लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 8 अगस्त 2029 को वृषभ में आएँगे और 31 मई 2032 को वृषभ को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक वापस मेष में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि वृषभ के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 18 जून 2031 से 31 मई 2032 तक।
पिछली बार: 7 जून 2000 से 7 अप्रैल 2003 तक।
कंटक शनि
शनि मकर में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में
उसके बाद · 6 मार्च 2049 से 25 फ़रवरी 2052 तक
लगभग 3 साल। शनि 6 मार्च 2049 को मकर में आएँगे और 25 फ़रवरी 2052 को मकर को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 10 जुलाई 2049 से 3 दिसंबर 2049 तक वापस धनु में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मकर के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 28 फ़रवरी 2051 से 20 सितंबर 2051 तक और 15 नवंबर 2051 से 25 फ़रवरी 2052 तक।
पिछली बार: 24 जनवरी 2020 से 17 जनवरी 2023 तक।
ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।
शनि मित्र राशि में: सहज
वृषभ में शनि तुला राशि से आठवें भाव में होते हैं। यही अष्टम शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। तुला राशि के लिए शनि चौथे भाव (घर, माता और भूमि-भवन) और पाँचवें भाव (संतान और पढ़ाई) के स्वामी हैं। चौथा भाव केंद्र है (पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव, कुंडली के चार स्तंभ), और पाँचवाँ भाव त्रिकोण है (पहला, पाँचवाँ और नौवाँ भाव, जिन्हें लक्ष्मी-स्थान कहते हैं)। एक केंद्र और एक त्रिकोण, दोनों के स्वामी ग्रह को योगकारक कहते हैं। आपकी चंद्र राशि से गिनने पर शनि आपके योगकारक हैं, और इन्हीं दो भावों के नाते वे भूमि-भवन, माँ का स्वास्थ्य और संतान की बातें आठवें भाव में ले आते हैं। वृषभ शनि के मित्र की राशि है, इसलिए यहाँ गोचर शत्रु राशि की तुलना में हल्का रहता है। फिर भी आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।
वृषभ से शनि की दृष्टि कर्क, वृश्चिक और कुंभ पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।
फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।
क्या करें भूमि-भवन और पैतृक संपत्ति के काग़ज़ व्यवस्थित रखें, और माँ की स्वास्थ्य जाँच में उनके साथ जाने का समय निकालें।
शनि अपनी राशि में: स्थिर
तुला राशि के लिए शनि चौथे भाव और पाँचवें भाव (संतान और पढ़ाई) के स्वामी हैं। मकर (चौथा भाव) उनकी अपनी राशि है, यानी चौथे भाव के स्वामी अपने ही भाव में बैठते हैं। आपकी चंद्र राशि से गिनने पर शनि आपके योगकारक भी हैं। चंद्र से चौथे भाव में शनि के इस गोचर को कंटक शनि की ढैय्या कहते हैं, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। पाँचवें भाव के नाते बच्चों की पढ़ाई भी इसमें आ जाती है। फलदीपिका (26.31) कहती है कि अपनी राशि में बैठे शनि हानि नहीं करते। इसलिए चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में दी गई जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी तुला राशि वालों पर लागू नहीं होती। शनि की धीमी और स्थिर चाल फिर भी रहती है; नीचे के बिंदु बताते हैं कि वह कहाँ महसूस हो सकती है।
मकर से शनि की दृष्टि मीन, कर्क और तुला पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।
क्या करें ढैय्या के उन वर्षों में घर या उसके काग़ज़ों से जुड़े काम धीरे और सावधानी से करें; बच्चों की दिनचर्या पूरे समय स्थिर रखें।
शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।
ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।
शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।
नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर तुला राशि के लिए है।
तुला राशि के लिए शनि योगकारक हैं, इसलिए उन्हें केवल शांत करने के बजाय बल दें: शनिवार को शनि कवच (शनि की रक्षा-स्तुति) का पाठ करें और वह अनुशासन निभाएँ जिसका फल शनि देते हैं। आपकी राशि के स्वामी शुक्र शनि के मित्र हैं; शुक्रवार को 'ॐ शुक्राय नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें, ताकि राशि-स्वामी के बल से इस ढैय्या में घर और संतान की बातें सँभालना आसान रहे।
यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

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आपका महीना दिन-ब-दिन, आपकी अपनी कुंडली से: अच्छे दिन, सँभलकर चलने वाले दिन, और ज़रूरी कामों की सही तारीख़ें।
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उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।
किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। तुला राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।
तुला राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। तुला राशि की अगली साढ़े साती 22 अक्टूबर 2038 से 8 दिसंबर 2046 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।
| ढैय्या | शनि किस राशि में | कब से | कब तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| कंटक शनि | मकर | 21 मार्च 1990 | 10 नवंबर 1993 | 3 साल 8 महीने (अंत में शनि 26 दिन के लिए लौटे थे) | बीता |
| अष्टम शनि | वृषभ | 7 जून 2000 | 7 अप्रैल 2003 | 2 साल 10 महीने | बीता |
| कंटक शनि | मकर | 24 जनवरी 2020 | 17 जनवरी 2023 | 3 साल | बीता |
| अष्टम शनि | वृषभ | 8 अगस्त 2029 | 31 मई 2032 | 2 साल 10 महीने | आगे |
| कंटक शनि | मकर | 6 मार्च 2049 | 25 फ़रवरी 2052 | 3 साल | आगे |
| अष्टम शनि | वृषभ | 27 मई 2059 | 7 मार्च 2062 | 2 साल 9 महीने (अंत में शनि 22 दिन के लिए लौटेंगे) | आगे |
| कंटक शनि | मकर | 15 जनवरी 2079 | 7 जनवरी 2082 | 3 साल | आगे |
| अष्टम शनि | वृषभ | 18 जुलाई 2088 | 21 मई 2091 | 2 साल 10 महीने | आगे |
एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।
इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है
नहीं। शनि मीन में हैं, तुला से छठे भाव में; ढैय्या चौथे या आठवें भाव में शनि होने पर होती है।
अष्टम शनि 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक; कंटक शनि 6 मार्च 2049 से 25 फ़रवरी 2052 तक।
कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। तुला राशि की कंटक ढैय्या में शनि मकर में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में वृषभ में।
दोनों बराबर नहीं हैं: अष्टम शनि वाली ढैय्या ज़्यादा भारी है। कंटक शनि वाली ढैय्या मकर (शनि की अपनी राशि) में पड़ती है, जो हानि नहीं करती (फलदीपिका 26.31)। अष्टम शनि वाली ढैय्या वृषभ (शनि के मित्र की राशि) में पड़ती है, जो इसे शत्रु राशि से हल्का रखती है; पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। चंद्र राशि से गिनें तो शनि आपके योगकारक हैं, इसलिए दोनों में सहारा भी रहता है। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।
इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर तुला राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।
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