
जन्म कुंडली
Janam Kundliआपकी पूरी कुंडली का फल: हर ग्रह, हर भाव और हर योग, दशाएँ तारीख़ों के साथ, और आपके लिए उपाय।
46 पन्नेहिंदी · अंग्रेज़ी · हिंग्लिश
ढैय्या चल रही है · कंटक शनि
ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। धनु राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि मीन या कर्क में हों। शनि अभी मीन में हैं, धनु से चौथे भाव में: कंटक शनि चल रहा है। 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक, जब शनि मेष में होंगे, यह ढैय्या थमी रहेगी। धनु राशि की दोनों ढैय्याएँ बराबर नहीं हैं: कर्क वाली अष्टम ढैय्या ज़्यादा भारी है।
1 साल 3 महीने बाक़ी · 23 फ़रवरी 2028 को ख़त्म
कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।
कंटक शनि
शनि मीन में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में
अभी चल रहा है · 23 फ़रवरी 2028 तक
लगभग 2 साल 11 महीने। शनि 29 मार्च 2025 को मीन में आए थे और 23 फ़रवरी 2028 को मीन को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक आगे मेष में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मीन के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 11 मार्च 2027 से 3 जून 2027 तक और 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक।
पिछली बार: 2 जून 1995 से 17 अप्रैल 1998 तक।
अष्टम शनि
शनि कर्क में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में
उसके बाद · 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक
लगभग 2 साल 1 महीना। शनि 13 जुलाई 2034 को कर्क में आएँगे और 27 अगस्त 2036 को निकलेंगे, बीच में लौटेंगे नहीं। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कर्क के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 14 सितंबर 2035 से 23 फ़रवरी 2036 तक और 1 जून 2036 से 27 अगस्त 2036 तक।
पिछली बार: 6 सितंबर 2004 से 16 जुलाई 2007 तक।
29 मार्च 2025 से शनि मीन में, यानी धनु राशि से चौथे भाव में हैं, और यह कंटक ढैय्या 23 फ़रवरी 2028 तक रहेगी। इसका केंद्र घर है: मकान, माँ की ज़रूरतें और परिवार की जमा-पूँजी। भारी महीने 11 मार्च से 3 जून 2027 तक और 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक रहेंगे, जब शनि मीन के आख़िरी तिहाई हिस्से में होंगे (फलदीपिका 26.25)। इनके बीच, 3 जून से 20 अक्टूबर 2027 तक, शनि मेष में रहेंगे और ढैय्या उतने समय के लिए हट जाएगी। घर बदलना हो या मरम्मत करानी हो, तो उसके लिए भारी महीनों (मार्च–जून 2027 और अक्टूबर 2027–फ़रवरी 2028) के बजाय बीच का यही विराम चुनें।
ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।
शनि सम राशि में
मीन में शनि धनु राशि से चौथे भाव में होते हैं, और मीन उनके लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। इसलिए असर न हल्का होता है, न तीखा। यह कंटक शनि की ढैय्या है, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। धनु के लिए शनि दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और वाणी) और तीसरे भाव (भाई-बहन, साहस और परिश्रम) के स्वामी हैं। इसलिए परिवार की जमा-पूँजी, घर के लोगों की आपसी बोलचाल और भाई-बहनों से व्यवहार, तीनों का असर घर पर पड़ता है। फलदीपिका 26.22 में चौथे भाव के शनि के लिए जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी है।
मीन से शनि की दृष्टि वृषभ, कन्या और धनु पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।
क्या करें जमा-पूँजी को घर के ख़र्च से अलग रखें, और घर में, विशेषकर माँ और भाई-बहनों से, नरमी से बोलें।
शनि शत्रु राशि में: भारी
धनु राशि के लिए कर्क में शनि आठवें भाव में होते हैं। इसे अष्टम शनि की ढैय्या कहते हैं, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। कर्क शनि की शत्रु राशि है, और फलदीपिका 26.32 के अनुसार इससे गोचर का असर तीखा होता है। आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है। दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और वाणी) और तीसरे भाव (भाई-बहन, साहस और परिश्रम) के स्वामी शनि ही हैं। इसलिए जमा-पूँजी, परिवार में कही गई बातें और भाई-बहनों से जुड़े मामले आठवें भाव के क्षेत्र में आते हैं।
कर्क से शनि की दृष्टि कन्या, मकर और मेष पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।
फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।
क्या करें स्वास्थ्य के लिए कुछ बचत अलग रखें, और ससुराल या भाई-बहनों से कोई कड़वी बात कहनी हो तो उसे एक दिन रुककर कहें।
शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।
ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।
शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।
नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर धनु राशि के लिए है।
आपकी राशि के स्वामी गुरु और शनि एक-दूसरे के प्रति सम हैं, इसलिए यहाँ उपाय गुरु को बलवान रखना है: गुरुवार को 'ॐ गुरवे नमः' का 108 बार जप (माला पर मंत्र का दोहराव) करें और भगवान विष्णु की पूजा करें, जिन्हें परंपरा गुरु के दिन पूजती है; यह उस विवेक और आस्था को सहारा देता है जिस पर धनु राशि वाले टिके रहते हैं। शनिवार को शनि कवच (रक्षा के लिए पढ़ी जाने वाली शनि की स्तुति) का पाठ शनि की पीड़ा से बचाव के लिए किया जाता है।
यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।
अपनी कुंडली के लिए पढ़ें

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आपका महीना दिन-ब-दिन, आपकी अपनी कुंडली से: अच्छे दिन, सँभलकर चलने वाले दिन, और ज़रूरी कामों की सही तारीख़ें।
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उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।
किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। धनु राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।
धनु राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। धनु राशि की अगली साढ़े साती 11 दिसंबर 2043 से 25 फ़रवरी 2052 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।
| ढैय्या | शनि किस राशि में | कब से | कब तक | अवधि | |
|---|---|---|---|---|---|
| कंटक शनि | मीन | 2 जून 1995 | 17 अप्रैल 1998 | 2 साल 10 महीने | बीता |
| अष्टम शनि | कर्क | 6 सितंबर 2004 | 16 जुलाई 2007 | 2 साल 10 महीने | बीता |
| कंटक शनि | मीन | 29 मार्च 2025 | 23 फ़रवरी 2028 | 2 साल 11 महीने | अभी |
| अष्टम शनि | कर्क | 13 जुलाई 2034 | 27 अगस्त 2036 | 2 साल 1 महीना | आगे |
| कंटक शनि | मीन | 14 मई 2054 | 7 अप्रैल 2057 | 2 साल 11 महीने | आगे |
| अष्टम शनि | कर्क | 24 अगस्त 2063 | 3 जुलाई 2066 | 2 साल 10 महीने | आगे |
| कंटक शनि | मीन | 20 मार्च 2084 | 8 फ़रवरी 2087 | 2 साल 11 महीने | आगे |
एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।
इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है
हाँ। कंटक शनि 29 मार्च 2025 से 23 फ़रवरी 2028 तक है, बीच में कुछ महीनों के विराम के साथ (तारीख़ें ऊपर)।
कंटक शनि अभी चल रहा है, 23 फ़रवरी 2028 तक; अष्टम शनि 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक।
कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। धनु राशि की कंटक ढैय्या में शनि मीन में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में कर्क में।
दोनों बराबर नहीं हैं: अष्टम शनि वाली ढैय्या ज़्यादा भारी है। कंटक शनि वाली ढैय्या मीन (शनि के लिए सम राशि) में पड़ती है, जो असर न घटाती है, न बढ़ाती है। अष्टम शनि वाली ढैय्या कर्क (शनि के शत्रु की राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32), आठवें भाव की अपनी कड़ी चेतावनी (26.33) के ऊपर। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।
इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर धनु राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।
ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।
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