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ढैय्या चल रही है · अष्टम शनि

सिंह राशि की शनि ढैय्या
अष्टम शनि: 29 मार्च 2025 से 23 फ़रवरी 2028 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। सिंह राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि वृश्चिक या मीन में हों। शनि अभी मीन में हैं, सिंह से आठवें भाव में: अष्टम शनि चल रहा है। 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक, जब शनि मेष में होंगे, यह ढैय्या थमी रहेगी। सिंह राशि की दोनों ढैय्याओं का अपना भार है: वृश्चिक शनि के लिए कठिन राशि है, और आठवें भाव की अपनी चेतावनी है।

1 साल 3 महीने बाक़ी · 23 फ़रवरी 2028 को ख़त्म

सिंह राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, वृश्चिक (कंटक) और मीन (अष्टम) चिह्नितसिंह राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, वृश्चिक (कंटक) और मीन (अष्टम) चिह्नित

सिंह राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

अष्टम शनि

शनि मीन में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

अभी चल रहा है · 23 फ़रवरी 2028 तक

लगभग 2 साल 11 महीने। शनि 29 मार्च 2025 को मीन में आए थे और 23 फ़रवरी 2028 को मीन को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक आगे मेष में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि मीन के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 11 मार्च 2027 से 3 जून 2027 तक और 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक।

पिछली बार: 2 जून 1995 से 17 अप्रैल 1998 तक।

कंटक शनि

शनि वृश्चिक में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

उसके बाद · 11 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक

लगभग 3 साल। शनि 11 दिसंबर 2043 को वृश्चिक में आएँगे और 8 दिसंबर 2046 को वृश्चिक को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 23 जून 2044 से 29 अगस्त 2044 तक वापस तुला में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि वृश्चिक के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 8 दिसंबर 2045 से 8 दिसंबर 2046 तक।

पिछली बार: 2 नवंबर 2014 से 26 अक्टूबर 2017 तक।

23 फ़रवरी 2028 तक क्या उम्मीद रखें

शनि 29 मार्च 2025 से मीन में, यानी सिंह राशि से आठवें भाव में हैं, और यह अष्टम ढैय्या 23 फ़रवरी 2028 तक चलेगी। इस दौर में मुख्य रूप से सेहत, साझा धन और जीवनसाथी के परिवार की बातें सामने रहेंगी। सबसे भारी समय 11 मार्च से 3 जून 2027 तक और फिर 20 अक्टूबर 2027 से अंत तक रहेगा, जब शनि मीन के आख़िरी तिहाई हिस्से में होंगे (फलदीपिका 26.25)। इनके बीच शनि आगे मेष में चले जाएँगे और साढ़े चार महीने ढैय्या थमी रहेगी। साझेदारी या परिवार का कोई बड़ा काम आगे-पीछे किया जा सके, तो उसे जून–अक्टूबर 2027 के इसी विराम में रखें।

यह ढैय्या आपके लिए क्या लाएगी?आचार्य पराशर सिंह राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

सिंह राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

अष्टम शनि · शनि मीन में

शनि सम राशि में

सिंह राशि से आठवें भाव, यानी मीन में शनि के पहुँचने पर अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। छठे भाव (काम का दबाव, शत्रु, ऋण और रोग) और सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) के स्वामी होने से शनि साझेदारी और काम के दबाव की बातें आठवें भाव में ले आते हैं। मीन शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है, इसलिए असर न हल्का होता है, न तीखा। आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसामीन से शनि दसवें और दूसरे भाव को देखते हैं, और छठे भाव के स्वामी होकर काम का दबाव आठवें भाव में लाते हैं। इसलिए अधिकारी या पद का अचानक बदलना संभव है। अपना हुनर ताज़ा रखें और कुछ बचत तुरंत निकालने लायक़ रखें।
  • घर-परिवारपाँचवें भाव पर शनि की दृष्टि बच्चों की पढ़ाई को छूती है, और दूसरे भाव पर दृष्टि से परिवार के पैसों पर दबाव आ सकता है। बच्चों की परीक्षाओं को पहले रखें, और कोई बड़ी ख़रीद उनसे टकराए तो उसे टाल दें।
  • विवाह और साझेदारीसातवें भाव के स्वामी शनि आठवें भाव (जीवनसाथी के परिवार का भाव) में आते हैं, इसलिए ससुराल और जीवनसाथी के पैसों की बातें आगे आती हैं। साझा खातों में पारदर्शिता रखें, और ससुराल से बात जीवनसाथी के माध्यम से करें, उन्हें किनारे करके नहीं।
  • सेहतआठवाँ भाव लंबे और छिपे रोगों का है, और छठे भाव के स्वामी होकर शनि इसमें रोग का भाव भी जोड़ देते हैं। इसलिए अनदेखी तकलीफ़ लंबी खिंच सकती है। इलाज का हर क्रम पूरा करें और दोबारा दिखाने की हर तारीख़ निभाएँ।

मीन से शनि की दृष्टि वृषभ, कन्या और धनु पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें किसी भी व्यापारिक साझेदारी से पहले शर्तें लिखित समझौते में रखें, स्वास्थ्य की जाँच नियमित कराएँ, और ससुराल से बातचीत शांत रखें।

कंटक शनि · शनि वृश्चिक में

शनि शत्रु राशि में: भारी

सिंह राशि के लिए शनि छठे भाव (काम का दबाव, शत्रु, ऋण और रोग) और सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) के स्वामी हैं। इसलिए जब वे वृश्चिक में, यानी सिंह से चौथे भाव में आते हैं, तो घर या वाहन का ऋण, काम का तनाव और दांपत्य की खींचतान, तीनों घर तक पहुँच सकते हैं। इसे कंटक शनि की ढैय्या कहते हैं, जिसका संबंध घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से है। वृश्चिक शनि की शत्रु राशि है, और फलदीपिका 26.32 के अनुसार शत्रु राशि गोचर का असर तीखा करती है। साथ ही फलदीपिका 26.22 चौथे भाव के शनि के लिए जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसाशनि छठे भाव (प्रतिस्पर्धा और ऋण) के स्वामी हैं और वृश्चिक से उसी छठे भाव पर दृष्टि डालते हैं। इसलिए दफ़्तर की होड़ और क़र्ज़ की अदायगी धैर्य से सँभालनी होगी। हर क़िस्त समय पर भरें और आलोचकों को अपने काम से उत्तर दें।
  • घर-परिवारवृश्चिक के शनि आपके चौथे भाव में मरम्मत, बार-बार ख़राब होने वाला वाहन या घर को लेकर तनाव ला सकते हैं। वाहन की देखरेख समय पर कराएँ, और रिसाव या बिजली की ख़राबी बढ़ने से पहले ठीक करा लें।
  • विवाह और साझेदारीघर के भाव से गुज़रते शनि सातवें भाव के स्वामी हैं, इसलिए जीवनसाथी से जुड़ी बातें बाहर नहीं, घर के भीतर ही उठ सकती हैं। पैसों के मतभेद साथ बैठकर सुलझाएँ, बच्चों के सामने नहीं।
  • सेहतपहले भाव पर शनि की दृष्टि स्वाभिमानी सिंह राशि वालों की सहनशक्ति को परख सकती है, और थकान के बावजूद जुटे रहना उस दौर में ज़्यादा भारी पड़ेगा। सप्ताह में एक दिन पूरा विश्राम करें और रक्तचाप पर नज़र रखें।

वृश्चिक से शनि की दृष्टि मकर, वृषभ और सिंह पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें घर के लिए बड़ा ऋण जल्दबाज़ी में न लें, भूमि-भवन और वाहन के काग़ज़ दो बार जाँचें, और हर सप्ताह जीवनसाथी और माँ के साथ एक घंटा इत्मीनान से बात करें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

सिंह राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर सिंह राशि के लिए है।

आपकी राशि के स्वामी सूर्य और शनि एक-दूसरे को शत्रु मानते हैं, इसलिए यह ढैय्या सूर्य के आत्मविश्वास और मान पर दबाव डालती है; उगते सूर्य को जल अर्पित करते हुए 'ॐ सूर्याय नमः' कहना, या रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र (सूर्य की स्तुति) का पाठ, सूर्य को बल देता है। रविवार को सूर्योदय के समय मंदिर में या किसी ज़रूरतमंद को गेहूँ और गुड़ का दान (श्रद्धा से दी गई भेंट) करें; परंपरा में सूर्य के लिए यही दान बताया गया है।

सिंह राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ सिंह लग्न होता, तो शनि छठे और सातवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। सिंह राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

सिंह राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

सिंह राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। सिंह राशि की अगली साढ़े साती 13 जुलाई 2034 से 26 सितंबर 2041 तक है। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

सिंह राशि की हर ढैय्या, 1984 से 2087
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
कंटक शनिवृश्चिक21 दिसंबर 198417 दिसंबर 19873 सालबीता
अष्टम शनिमीन2 जून 199517 अप्रैल 19982 साल 10 महीनेबीता
कंटक शनिवृश्चिक2 नवंबर 201426 अक्टूबर 20173 सालबीता
अष्टम शनिमीन29 मार्च 202523 फ़रवरी 20282 साल 11 महीनेअभी
कंटक शनिवृश्चिक11 दिसंबर 20438 दिसंबर 20463 सालआगे
अष्टम शनिमीन14 मई 20547 अप्रैल 20572 साल 11 महीनेआगे
कंटक शनिवृश्चिक5 फ़रवरी 207311 अक्टूबर 20763 साल 8 महीनेआगे
अष्टम शनिमीन20 मार्च 20848 फ़रवरी 20872 साल 11 महीनेआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या सिंह राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

हाँ। अष्टम शनि 29 मार्च 2025 से 23 फ़रवरी 2028 तक है, बीच में कुछ महीनों के विराम के साथ (तारीख़ें ऊपर)।

सिंह राशि की अगली ढैय्या कब है?

अष्टम शनि अभी चल रहा है, 23 फ़रवरी 2028 तक; कंटक शनि 11 दिसंबर 2043 से 8 दिसंबर 2046 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। सिंह राशि की कंटक ढैय्या में शनि वृश्चिक में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में मीन में।

क्या सिंह राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

दोनों का अपना भार है, अलग-अलग कारणों से। कंटक शनि वाली ढैय्या वृश्चिक (शनि के शत्रु की राशि) में पड़ती है, जो इसे तीखा करती है (फलदीपिका 26.32)। अष्टम शनि वाली ढैय्या मीन (शनि के लिए सम राशि) में पड़ती है, जो असर न घटाती है, न बढ़ाती है; आठवाँ भाव अपने-आप में शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

सिंह राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर सिंह राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

आपकी कुंडली से रिपोर्ट

9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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