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अभी ढैय्या नहीं चल रही · अगली 2029 में शुरू होगी

कुंभ राशि की शनि ढैय्या
अगली: कंटक शनि, 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक

ढैय्या, जिसे छोटी पनौती भी कहते हैं, तब होती है जब शनि आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें (अष्टम शनि) भाव से गुज़रते हैं; ग्रह का किसी राशि से होकर गुज़रना गोचर कहलाता है। नाम ‘ढाई’ से बना है, क्योंकि हर एक लगभग ढाई साल चलती है; शनि वक्री होकर सीमा पार लौटें तो यह और लंबी खिंचती है। कुंभ राशि पर ढैय्या तब होती है जब शनि वृषभ या कन्या में हों। शनि अभी मीन में हैं, कुंभ से दूसरे भाव में: यह कुंभ राशि के लिए साढ़े साती है (चंद्र राशि और उसके दोनों ओर की राशियों पर शनि, लगभग साढ़े सात साल), ढैय्या नहीं। 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक, जब शनि मेष में होंगे, साढ़े साती थमी रहेगी। यह 23 फ़रवरी 2028 को ख़त्म होगी; उसके बाद कंटक शनि 8 अगस्त 2029 से शुरू होगा। कुंभ राशि की दोनों ढैय्याएँ उन राशियों, वृषभ और कन्या, में पड़ती हैं जहाँ शनि सहज रहते हैं, इसलिए ये शत्रु राशि वाली ढैय्या से हल्की रहती हैं।

2 साल 9 महीने बाद शुरू होगी · 8 अगस्त 2029

कुंभ राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, वृषभ (कंटक) और कन्या (अष्टम) चिह्नितकुंभ राशि का ढैय्या चक्र: शनि मीन में, वृषभ (कंटक) और कन्या (अष्टम) चिह्नित

कुंभ राशि की दोनों ढैय्याएँ

कंटक यानी काँटा, अष्टम यानी आठवाँ। दोनों की तारीख़ें अलग हैं, और जब शनि कुछ महीनों के लिए राशि छोड़कर लौटते हैं, तो अवधि पहले प्रवेश से आख़िरी निकास तक गिनी जाती है।

कंटक शनि

शनि वृषभ में, आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में

अगली · 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक

लगभग 2 साल 10 महीने। शनि 8 अगस्त 2029 को वृषभ में आएँगे और 31 मई 2032 को वृषभ को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक वापस मेष में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि वृषभ के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 18 जून 2031 से 31 मई 2032 तक।

पिछली बार: 7 जून 2000 से 7 अप्रैल 2003 तक।

अष्टम शनि

शनि कन्या में, आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में

उसके बाद · 22 अक्टूबर 2038 से 26 सितंबर 2041 तक

लगभग 2 साल 11 महीने। शनि 22 अक्टूबर 2038 को कन्या में आएँगे और 26 सितंबर 2041 को कन्या को आख़िरी बार छोड़ेंगे। बीच में वे 5 अप्रैल 2039 से 12 जुलाई 2039 तक वापस सिंह में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी) और 28 जनवरी 2041 से 5 फ़रवरी 2041 तक आगे तुला में जाएँगे (तब ढैय्या थमी रहेगी)। शास्त्रीय नियम (फलदीपिका 26.25) के अनुसार इसका सबसे भारी हिस्सा तब है जब शनि कन्या के आख़िरी तिहाई हिस्से (20° से 30°) में हों: 2 अक्टूबर 2040 से 28 जनवरी 2041 तक और 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक।

पिछली बार: 10 सितंबर 2009 से 4 अगस्त 2012 तक।

आपकी कुंडली में शनिआचार्य पराशर कुंभ राशि की ढैय्या आपकी अपनी कुंडली से पढ़ते हैं: आपका लग्न, आपकी दशा, शनि कहाँ बैठे हैं।

कुंभ राशि के लिए हर ढैय्या किन बातों पर असर डालती है

ढैय्या का असर चार बातों से तय होता है: आपकी चंद्र राशि से गिनकर शनि किन भावों के स्वामी हैं, किस भाव में बैठे हैं, किन तीन भावों पर उनकी दृष्टि (नज़र) पड़ती है, और उस राशि में वे कितने सहज हैं, उच्च (सबसे बली) से नीच (सबसे निर्बल) तक। नियम मंत्रेश्वर के ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के हैं।

कंटक शनि · शनि वृषभ में

शनि मित्र राशि में: सहज

कुंभ राशि से चौथा भाव वृषभ है, और वहाँ आकर आपकी राशि के स्वामी शनि ही घर के भाव से गुज़रते हैं। शनि आपके पहले भाव (आप स्वयं और शरीर) के साथ बारहवें भाव (व्यय, दूर स्थान और नींद) के भी स्वामी हैं। कंटक शनि की यह ढैय्या घर, माता, वाहन, भूमि-भवन और मन की शांति से जुड़ी है। यहाँ घर पर ख़र्च, कहीं दूर जाकर बसना या टूटी नींद इसका रूप ले सकते हैं। वृषभ शनि की मित्र राशि है, इसलिए असर शत्रु राशि की तुलना में हल्का रहता है। फिर भी चौथे भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 में जीवनसाथी, संबंधियों और धन से जुड़ी हानि की चेतावनी है।

  • काम और पैसावृषभ से शनि की दृष्टि आपके दसवें भाव पर पड़ती है, इसलिए दफ़्तर की खींचतान या अटकी स्वीकृतियाँ धैर्य की परीक्षा ले सकती हैं। वरिष्ठों से मिली स्वीकृतियाँ और निर्देश लिखित में लें।
  • घर-परिवारबारहवें भाव के स्वामी होकर चौथे भाव में शनि घर को ख़र्च और दूरी से जोड़ते हैं, जैसे दूसरे शहर जाना या माता-पिता का दूर रहना। जाना ही हो तो किराये का घर पक्का करने से पहले नई जगह एक बार देख आएँ।
  • विवाह और साझेदारीकुंभ राशि के दंपतियों को यात्रा या तबादले के कारण कुछ समय दूर रहना पड़ सकता है, क्योंकि घर के भाव से गुज़रते शनि बारहवें भाव (दूर स्थान) के स्वामी हैं। दूर हों तो रोज़ तय समय पर बात करें।
  • सेहतआपकी राशि के स्वामी मन की शांति वाले चौथे भाव से गुज़रते हुए पहले और छठे भाव को देखते हैं। इसलिए कुंभ राशि वालों में तनाव शरीर में बैठ सकता है। सोने का कमरा आराम के लिए रखें, दफ़्तर के काम के लिए नहीं।

वृषभ से शनि की दृष्टि कर्क, वृश्चिक और कुंभ पर भी पड़ती है, यानी छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी), दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) और पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) पर।

क्या करें घर या वाहन पर ख़र्च करने से पहले उसकी सीमा तय कर लें, और सोने का समय नियमित रखकर अपनी नींद सँभालें।

अष्टम शनि · शनि कन्या में

शनि मित्र राशि में: सहज

कुंभ राशि से आठवें भाव, यानी कन्या में शनि हों तो अष्टम शनि की ढैय्या होती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं, छिपी बातों, ससुराल और पैतृक संपत्ति से है। आपकी राशि के स्वामी और बारहवें भाव (व्यय, दूर स्थान और नींद) के भी स्वामी होने से शनि आपका अपना शरीर और आपका ख़र्च आठवें भाव में लाते हैं। इसलिए स्वास्थ्य, नींद और अनचाहे ख़र्च ध्यान माँगते हैं। कन्या शनि के मित्र की राशि है, जिससे यह भार कुछ नरम पड़ता है। फिर भी आठवें भाव के शनि के लिए फलदीपिका 26.22 संतान, मित्रों और धन से जुड़ी हानि तथा रोग की चेतावनी देती है।

  • काम और पैसाकन्या से शनि की दृष्टि दसवें और दूसरे भाव पर है। इसलिए काम में बदलाव धीरे आता है, और बचत को बारहवें भाव के ख़र्च से बचाना है, जिसके वे स्वामी हैं। वेतन मिलते ही एक तय हिस्सा बचत में डाल दें।
  • घर-परिवारमिथुन में पड़ने वाले पाँचवें भाव पर शनि की दृष्टि से बच्चों की पढ़ाई और मित्र-मंडली को मार्गदर्शन चाहिए, और दूसरे भाव पर दृष्टि से परिवार के पैसों पर दबाव आ सकता है। बच्चों के मित्रों और शिक्षकों को नाम से जानें।
  • विवाह और साझेदारीराशि-स्वामी शनि आठवें भाव (जीवनसाथी के परिवार का भाव) में हों तो आप ससुराल के मामलों में, कभी उनके ख़र्चों में भी, गहरे खिंच सकते हैं। मदद जितनी हो सके करें, पर उसकी सीमा पहले जीवनसाथी के साथ तय कर लें।
  • सेहतशनि अनुशासन के ग्रह हैं और आठवाँ भाव पुराने रोगों का है, इसलिए केवल आराम नहीं, नियमित चलना-फिरना इस दौर में अधिक मेल खाता है। हर दिन एक ही समय पर टहलें या योग करें।

कन्या से शनि की दृष्टि वृश्चिक, मीन और मिथुन पर भी पड़ती है, यानी दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार), दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) और पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) पर।

फलदीपिका 26.22 एक ही श्लोक है जो चंद्र से पहले आठ भावों में से हर एक के शनि का फल बताता है, इसीलिए दोनों ढैय्या में उसी का हवाला है।

क्या करें स्वास्थ्य की जाँच नियमित कराते रहें, सोने-जागने की अच्छी आदत बनाए रखें, और अचानक के ख़र्च के लिए थोड़ा धन अलग रखें।

शनि के अष्टकवर्ग बिंदु। अष्टकवर्ग जन्म कुंडली से बनी अंकों (बिंदुओं) की तालिका है। फलदीपिका (26.41, 23.10) के अनुसार जिस राशि में आपकी कुंडली में शनि के बिंदु ज़्यादा हों, वहाँ गोचर हल्का रहता है: आठ में से पाँच या ज़्यादा शुभ, चार मिले-जुले, उससे कम भारी। अपनी कुंडली में शनि के बिंदु देखें।

ढैय्या में शनिवार के उपाय

ढैय्या के वे उपाय जो घरों में पीढ़ियों से किए जाते हैं। मुफ़्त, और हर एक की वजह के साथ।

शनि मंत्र · शनिवार को 108 बार

ॐ शं शनैश्चराय नमः

शनि का छोटा मंत्र, उनके बीज अक्षर “शं” पर बना। हर हफ़्ते बिना नागा इसका जाप करना अपने-आप में वही अनुशासन है जो शनि माँगते हैं।

  • हनुमान चालीसा, मंगलवार और शनिवारकथा है कि शनिदेव ने हनुमान जी को उनके भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
  • शनिवार को काले तिल, उड़द या सरसों का तेल दान करेंया किसी मेहनतकश या बुज़ुर्ग की मदद करें: शनि मेहनत और बुढ़ापे के ग्रह हैं।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे दीयापरंपरा में पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न माने जाते हैं।
  • वादा निभाएँ, दिनचर्या बनाए रखेंशनि कर्म के कारक हैं: धैर्य और ईमानदारी वाली मेहनत को परंपरा सबसे बड़ा उपाय मानती है।

नीलम ढैय्या का आम उपाय नहीं है। यह कुछ कुंडलियों के लिए शुभ है और कुछ के लिए हानिकारक, इसलिए अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

कुंभ राशि के लिए एक उपाय

हर राशि के लिए शनिवार के उपायों के साथ, यह उपाय ख़ास तौर पर कुंभ राशि के लिए है।

कुंभ राशि के स्वामी शनि ही हैं, इसलिए शनि की सीधी उपासना सबसे अच्छी है: शनिवार को दशरथकृत शनि स्तोत्र (राजा दशरथ की रची मानी जाने वाली शनि की स्तुति) का पाठ उन शनि को बल देता है जो आपकी राशि के स्वामी हैं और ढैय्या के गोचर में आपकी परीक्षा भी लेंगे। शनिवार को किसी दिव्यांग व्यक्ति को कंबल या काला वस्त्र देना भी परंपरा में शनि का दान (श्रद्धा से दी गई भेंट) माना गया है।

कुंभ राशि के दो लोगों की ढैय्या अलग क्यों होती है

यह कैसी जाएगी, यह आपकी अपनी कुंडली तय करती है।

आपका लग्नशनि हर कुंडली में दो भावों के स्वामी हैं; वृषभ और तुला लग्न (जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि) के लिए शनि सबसे शुभ ग्रह हैं।
आपकी दशाअच्छी महादशा (चल रही मुख्य दशा) में ढैय्या हल्की निकलती है; कठिन दशा में आई ढैय्या भारी पड़ती है और बरसों याद रहती है।
जन्म के समय शनिजन्म के समय मज़बूत और अच्छी जगह हों तो ढैय्या में सहारा देते हैं; कमज़ोर हों, या मंगल, राहु, केतु जैसे कठोर ग्रहों से घिरे हों, तो ढैय्या भारी लगती है।

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एक उदाहरण: एक असली कुंडली

उदाहरण के लिए साइट की नमूना कुंडली लें: जन्म 15 जुलाई 1990, दोपहर 2:30 बजे, मुंबई। चंद्र मीन में हैं, इसलिए इस कुंडली की अगली ढैय्या कंटक शनि है, शनि मिथुन में, 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक, यानी वही तारीख़ें जो हर मीन राशि वाले की हैं। फ़र्क़ इन चार बातों से आता है।

  • लग्नतुला। इससे गिनें तो शनि चौथे और पाँचवें भाव के स्वामी हैं। इनमें एक केंद्र (कुंडली का स्तंभ भाव) है और दूसरा त्रिकोण (भाग्य का भाव), इसलिए जन्म कुंडली रिपोर्ट शनि को इस कुंडली का योगकारक, यानी सबसे शुभ ग्रह, मानती है। इसी चंद्र के साथ कुंभ लग्न होता, तो शनि पहले और बारहवें भाव के स्वामी होते।
  • दशाइस ढैय्या के दौरान: चंद्र की महादशा, 15 मई 2026 से 14 मई 2036 तक, जिसे रिपोर्ट सावधानी माँगने वाली दशा मानती है। इस कुंडली में चंद्र छठे भाव में हैं।
  • जन्म के समय शनिधनु में, लग्न से तीसरे भाव में, वक्री (पृथ्वी से देखने पर उल्टी चाल में)। धनु शनि के लिए सम (न मित्र, न शत्रु) राशि है। शनि वर्गोत्तम हैं, यानी नवांश (नौवें हिस्से वाली कुंडली) में भी उसी राशि में, पर षड्बल (छह तरह का बल) में उससे कम हैं जितना रिपोर्ट माँगती है।
  • शनि के बिंदुशनि के अपने अष्टकवर्ग बिंदु: मिथुन में 3 (भारी)।

किसी दूसरे मीन राशि वाले की तारीख़ें यही होंगी, पर बाक़ी बातें शायद ही मिलें। कुंभ राशि के दो लोगों के साथ भी यही है: इस पेज की तारीख़ें दोनों की एक हैं, पर वे क्या लाती हैं, यह एक-सा नहीं।

कुंभ राशि पर शनि, आने वाले बरसों में

कुंभ राशि की हर ढैय्या और साढ़े साती, क्रम से। कुंभ राशि पर अभी साढ़े साती चल रही है, 23 फ़रवरी 2028 तक। तारीख़ें निरयन (लाहिड़ी अयनांश, भारत सरकार का मानक) हैं; दूसरी साइटों से अंतर की एक वजह यह भी है।

  • 2020–2028साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव24 जनवरी 2020 – 23 फ़रवरी 2028
  • 2029–2032कंटक शनि · वृषभ8 अगस्त 2029 – 31 मई 2032
  • 2038–2041अष्टम शनि · कन्या22 अक्टूबर 2038 – 26 सितंबर 2041
  • 2049–2057साढ़े साती · चंद्र से बारहवाँ, पहला और दूसरा भाव6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057
कुंभ राशि की हर ढैय्या, 2000 से 2091
ढैय्याशनि किस राशि मेंकब सेकब तकअवधि
कंटक शनिवृषभ7 जून 20007 अप्रैल 20032 साल 10 महीनेबीता
अष्टम शनिकन्या10 सितंबर 20094 अगस्त 20122 साल 11 महीनेबीता
कंटक शनिवृषभ8 अगस्त 202931 मई 20322 साल 10 महीनेआगे
अष्टम शनिकन्या22 अक्टूबर 203826 सितंबर 20412 साल 11 महीनेआगे
कंटक शनिवृषभ27 मई 20597 मार्च 20622 साल 9 महीने (अंत में शनि 22 दिन के लिए लौटेंगे)आगे
अष्टम शनिकन्या30 अगस्त 20684 नवंबर 20702 साल 2 महीनेआगे
कंटक शनिवृषभ18 जुलाई 208821 मई 20912 साल 10 महीनेआगे

हर राशि की ढैय्या

एक समय में दो राशियों पर ढैय्या रहती है: जिसके चौथे भाव में शनि हैं, और जिसके आठवें में। जब शनि अगली राशि में कुछ महीने रहकर लौटते हैं, तो उतने समय ढैय्या अगली दो राशियों पर चली जाती है और फिर लौट आती है।

इस हिस्से में और: साढ़े साती · बारहों राशियों की ढैय्या · दोष क्या है

आम सवाल

क्या कुंभ राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है?

ढैय्या नहीं, साढ़े साती चल रही है, जो 23 फ़रवरी 2028 तक रहेगी। शनि अभी मीन में हैं, कुंभ से दूसरे भाव में।

कुंभ राशि की अगली ढैय्या कब है?

कंटक शनि 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक; अष्टम शनि 22 अक्टूबर 2038 से 26 सितंबर 2041 तक।

कंटक शनि और अष्टम शनि में क्या अंतर है?

कंटक शनि यानी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि का गोचर; इससे घर, माँ, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति देखी जाती है। अष्टम शनि यानी आठवें भाव में शनि का गोचर; इससे सेहत, अचानक की घटनाएँ और ससुराल देखे जाते हैं। कुंभ राशि की कंटक ढैय्या में शनि वृषभ में होते हैं, और अष्टम ढैय्या में कन्या में।

क्या कुंभ राशि के लिए ढैय्या बुरी है?

कुंभ राशि की ढैय्याएँ दूसरी राशियों की तुलना में आम तौर पर हल्की रहती हैं। कंटक ढैय्या वृषभ में और अष्टम कन्या में पड़ती है, दोनों शनि के मित्रों की राशियाँ, जो दोनों को शत्रु राशि से हल्का रखती हैं; पर आठवाँ भाव शनि की सबसे कड़ी चेतावनी वाले भावों में है (फलदीपिका 26.33)। आप पर कितना असर होगा, यह आपके लग्न, आपकी दशा और आपकी कुंडली में शनि के बिंदुओं पर निर्भर है।

कुंभ राशि की ढैय्या के उपाय क्या हैं?

इस पेज पर दिए मुफ़्त उपाय: शनिवार के उपाय जो हर राशि के लिए हैं (शनि मंत्र, हनुमान चालीसा, पीपल के नीचे दीया, मेहनतकशों और बुज़ुर्गों की सेवा), और वह उपाय जो ख़ास तौर पर कुंभ राशि के लिए है, उसकी वजह के साथ। नीलम अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनें।

आपकी ढैय्या, आपकी कुंडली से

ढैय्या क्या लाएगी, यह आपकी पूरी कुंडली से पढ़ा जाता है: आपका लग्न, आपकी दशा और शनि कहाँ बैठे हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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