मेष ज्योतिष में आपकी चंद्र राशि है। इस पेज पर मेष राशि का 2027 का हाल है, मेष से गिने भावों में ग्रहों की चाल के हिसाब से।
2027 में सबसे अच्छे महीने जनवरी, सितंबर और नवंबर हैं और सबसे धीमे फ़रवरी और दिसंबर — साथ में 2 जून तक और 20 अक्टूबर से साढ़े साती का पहला चरण; 3 जून से 19 अक्टूबर तक साढ़े साती का चरम, यानी दूसरा चरण।
गुरु आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम का भाव) में हैं — यह उनकी सबसे अच्छी जगहों में से एक है। सोच तेज़ रहती है, फ़ैसले सही निकलते हैं और संतान या पढ़ाई से अच्छी ख़बर की संभावना है।
गुरु आपके चौथे भाव (घर और माता का भाव) में आते हैं। घर, प्रॉपर्टी और मन की शांति आपका समय माँगते हैं; घर बदलने या मरम्मत की संभावना है। पर इस दौर में गुरु कर्क राशि में उच्च के हैं, जिससे चौथे भाव की मुश्किलें हल्की पड़ती हैं: वे आती हैं, पर कम, और ज़रूरत पर मदद मिलती है।
गुरु आपके छठे भाव (काम, सेहत और विरोधियों का भाव) में आते हैं। काम का बोझ बढ़ता है, सेहत को नियम चाहिए, और अभी लिया गया क़र्ज़ बाद में भारी पड़ता है।
2 जून तक, और फिर 20 अक्टूबर सेशनि आपके बारहवें भाव में: साढ़े साती का पहला चरण — ख़र्च बढ़ता है, नींद हल्की होती है और काम घर से दूर ले जा सकता है।
3 जून से 19 अक्टूबर तकशनि आपकी चंद्र राशि के ऊपर: साढ़े साती का बीच का चरण — ज़िम्मेदारी ज़्यादा, मदद कम और मन भारी; पर इसी समय टिकाऊ आदतें बनती हैं।
काम के लिए 2027: पूरा साल मिला-जुला रहता है।
इस साल कोई भी समय बड़े क़दम के लिए पूरी तरह आपके पक्ष में नहीं है। अगर नौकरी बदलनी ही हो, तो 14 अप्रैल से अपेक्षाकृत आसान समय है; वरना हुनर बढ़ाएँ और इंतज़ार करें।
2027 में करियर का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
प्रेम और विवाह के लिए 2027 में समय 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक मिला-जुला रहता है; 25 जनवरी से 25 जून तक और 26 नवंबर से धीमा।
इस साल कोई भी समय शादी तय करने के लिए पूरी तरह आपके पक्ष में नहीं है। अगर अच्छा रिश्ता आए और दोनों परिवार राज़ी हों, तो 26 जून से 25 नवंबर तक अपेक्षाकृत आसान समय है; वरना लोगों से मिलते रहें और बिना दबाव के बात बनने दें। इस दौर में शादी के मुहूर्त सिर्फ़ 26 जून से 13 जुलाई तक और 10 नवंबर से 25 नवंबर तक के दौर में पड़ते हैं (हर दिन मुहूर्त पेज पर है); इस दौर का बाक़ी समय चातुर्मास (भगवान विष्णु के विश्राम के चार महीने, जिनमें शादी का मुहूर्त नहीं होता) के कारण बंद है, इसलिए शादी की तारीख़ इन्हीं में रखें। विवाह मुहूर्त की तारीख़ें, 2027 →
2027 में प्रेम और विवाह का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
सेहत के लिए 2027 में समय 25 नवंबर तक मिला-जुला रहता है; 26 नवंबर से धीमा।
इस साल कोई भी समय सेहत के लिए पूरी तरह आपके पक्ष में नहीं है, इसलिए नींद, रोज़ की सैर और समय पर खाना — ये बुनियादी बातें पूरे साल बनाए रखें। पूरी जाँच या पहले से तय ऑपरेशन के लिए 14 अप्रैल से 25 नवंबर तक सबसे आसान समय है; पर जब डॉक्टर कहें कि इलाज ज़रूरी है, तो उसी समय कराएँ, ग्रह चाहे जो कहें।
2027 में सेहत का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
धन के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक है; 25 जनवरी से 25 जून तक मिला-जुला; 26 नवंबर से धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए धन के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
26 जून से 25 नवंबर तक: एसआईपी शुरू करें या बढ़ाएँ, फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में पैसा डालें, निवेश के लिए सोना या प्रॉपर्टी ख़रीदें, और अपना बकाया पैसा माँगें। 24 जनवरी तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए यह समय उसके बाद से रखा गया है। बस 26 जून से 5 जुलाई तक और 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक (बुध वक्री) क़र्ज़ के काग़ज़ों पर दस्तख़त और बड़े निवेश टालें। बुध का वक्री दौर 10 जून से 5 जुलाई तक है; ऊपर उसके वही दिन हैं जो इस समय में पड़ते हैं।
2027 में पैसा का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
घर-परिवार के लिए 2027 में समय 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक मिला-जुला रहता है; 25 जनवरी से 25 जून तक और 26 नवंबर से धीमा।
पाँचवें भाव में गुरु संतान के लिए शुभ हैं: बच्चों की पढ़ाई या करियर से अच्छी ख़बर, बेटे-बेटी की शादी या परिवार में बच्चे का जन्म संभव है, और संतान की आशा रखने वाले दंपती के लिए यह अनुकूल समय है। पारिवारिक मामलों में आपकी समझ सही रहती है और बड़े आपके फ़ैसलों का साथ देते हैं। बच्चों को इत्मीनान से समय दें, और उनका दाख़िला या मुंडन, नामकरण जैसे संस्कार इसी समय में तय करें। इस समय गुरु की दृष्टि आपके नौवें भाव पर भी है, इसलिए पिता और बड़े आपकी योजनाओं का साथ देते हैं और परिवार के साथ तीर्थ यात्रा अच्छी रहती है। पर आपके बारहवें भाव में शनि के कारण 24 जनवरी तक का समय घर-परिवार के लिए कुल मिलाकर मिला-जुला रहता है: परिवार की बड़ी योजनाएँ छोटी और बिना जल्दबाज़ी के रखें। पर आपके पहले और बारहवें भाव में शनि के कारण 26 जून से 25 नवंबर तक का समय घर-परिवार के लिए कुल मिलाकर मिला-जुला रहता है: परिवार की बड़ी योजनाएँ छोटी और बिना जल्दबाज़ी के रखें।
चौथे भाव में गुरु घर को साल का मुख्य विषय बनाते हैं: घर ख़रीदना, बनवाना या उसकी मरम्मत, नया वाहन या घर बदलना — सब संभव है। परंपरा इसे अस्थिर स्थिति मानती है, इसलिए इस काम में सोच से ज़्यादा भाग-दौड़, ख़र्च और रिश्तेदारों से खटपट होती है, और माँ की सेहत पर ध्यान देना ज़रूरी है। प्रॉपर्टी की योजना पर आगे बढ़ें, पर हर काग़ज़ जाँचें और बजट से बाहर न जाएँ।
छठे भाव में गुरु पारिवारिक जीवन में खटपट लाते हैं: किसी रिश्तेदार से विवाद, परिवार के भीतर पैसे का दावा, या किसी बड़े की सेहत जिसके लिए आपको समय देना पड़े। ननिहाल के लोग इसमें शामिल हो सकते हैं — मदद के लिए भी और मतभेद के लिए भी। पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए क़र्ज़ न लें, बड़ों की नियमित जाँच करवाते रहें, और विवाद अदालत के बजाय बातचीत से सुलझाएँ। इस समय गुरु की दृष्टि आपके दूसरे भाव पर भी है, इसलिए पारिवारिक मेल-जोल में अपनापन रहता है और घर की बचत सुधरती है।
बारहवें भाव में शनि, साढ़े साती का पहला चरण, घर का ख़र्च बढ़ाते हैं और दूरी ला सकते हैं — आपको काम के लिए दूर रहना पड़ सकता है, या परिवार का कोई सदस्य दूर जा सकता है। घर में नींद और मन की शांति पर असर पड़ता है। सोच-समझकर बजट बनाएँ, घर या किसी कार्यक्रम के लिए बड़ा क़र्ज़ न लें, और माता-पिता से लगातार संपर्क में रहें। शनि की दृष्टि आपके दूसरे और नौवें भाव पर भी है: घर का पैसा तंग रहता है और ग़ुस्से में कही बात देर तक चुभती है, इसलिए सँभलकर बोलें; पिता या बड़े दूर-दूर से लग सकते हैं, इसलिए उनसे मिलते रहें और उनकी ज़िम्मेदारियों में हाथ बँटाएँ।
पहले भाव में शनि, साढ़े साती के चरम पर, घर के माहौल पर भारी पड़ते हैं: परिवार की ज़िम्मेदारी ज़्यादा होती है, थकान रहती है और घर में आप चिड़चिड़े लग सकते हैं। परिवार वाले शायद न समझ पाएँ कि आप किस दौर से गुज़र रहे हैं। बोझ चुपचाप अकेले न उठाएँ, बाँटें; माता-पिता और बच्चों से नरमी से बात करें, और घर ख़रीदने जैसे बड़े फ़ैसले पूरी योजना के बिना न करें।
दसवें भाव में राहु आपको काम और रुतबे की ओर खींचते हैं; परिवार का नाम बढ़ता है, पर घर को दिया जाने वाला समय बचाकर रखें। चौथे भाव में केतु घर में मन उचाट कर सकते हैं; बड़ा बदलाव करने से ज़्यादा घर में छोटे बदलाव मदद करते हैं।
इस साल कोई भी समय बड़े पारिवारिक आयोजनों के लिए पूरी तरह आपके पक्ष में नहीं है। अगर गृह प्रवेश, प्रॉपर्टी की ख़रीद या पारिवारिक कार्यक्रम टल नहीं सकता, तो 26 जून से 25 नवंबर तक अपेक्षाकृत आसान समय है; वरना योजनाएँ छोटी रखें और माता-पिता के साथ समय बिताएँ। इस दौर में गृह प्रवेश के मुहूर्त 26 जून से 4 जुलाई तक और 10 नवंबर से 25 नवंबर तक के दौर में पड़ते हैं (हर दिन मुहूर्त पेज पर है); इस दौर का बाक़ी समय गृह प्रवेश के लिए वर्जित हिंदू महीनों के कारण बंद है; चातुर्मास में पंचांग कुछ दिन देता है, पर उत्तर भारत के कई परिवार उनमें गृह प्रवेश नहीं रखते, इसलिए गृह प्रवेश की तारीख़ इन्हीं में रखें। गृह प्रवेश मुहूर्त की तारीख़ें, 2027 →
गुरु वक्री: पारिवारिक योजनाएँ और कार्यक्रम टलते हैं; तारीख़ें लचीली रखें और अभी बड़ा एडवांस न दें
मंगल वक्री: घर में ग़ुस्सा जल्दी आता है और प्रॉपर्टी के झगड़े भड़कते हैं; भाई-बहनों से बहस से बचें और निर्माण का काम शुरू न करें
बुध वक्री: परिवार में ग़लतफ़हमी आसानी से होती है; प्रॉपर्टी के काग़ज़ दोबारा पढ़ें और ज़रूरी बात आमने-सामने करें
सूर्य ग्रहण: आपके चौथे भाव (घर और माता का भाव) में ग्रहण — इसके आसपास के हफ़्ते में गृह प्रवेश, मुंडन या कोई और पारिवारिक संस्कार न करें
शनि वक्री: पुराने पारिवारिक विवाद और अटके प्रॉपर्टी के मामले लौटते हैं; नई योजना से पहले उन्हें धैर्य से निपटाएँ
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह; गुरु और मंगल वक्री
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह; गुरु, मंगल और बुध वक्री; सूर्य ग्रहण 6 फ़रवरी; चंद्र ग्रहण 21 फ़रवरी
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह; गुरु, मंगल और बुध वक्री
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह; गुरु और मंगल वक्री
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि पहले भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; बुध वक्री
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि पहले भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; बुध वक्री; चंद्र ग्रहण 18 जुलाई
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि पहले भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि वक्री; सूर्य ग्रहण 2 अगस्त; चंद्र ग्रहण 17 अगस्त
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि पहले भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि वक्री
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि पहले भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि और बुध वक्री
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह; शनि वक्री
गुरु छठे भाव में — भारी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह; शनि वक्री
गुरु वक्री 13 अप्रैल तक, आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में, और 25 जनवरी से चौथे भाव (घर, माँ और मन की शांति) में: तरक़्क़ी धीमी होती है और योजनाएँ बदलती हैं।
मंगल वक्री 10 जनवरी से 1 अप्रैल तक, आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में, और 10 मार्च से चौथे भाव (घर, माँ और मन की शांति) में: ग़ुस्सा जल्दी आता है; हो सके तो प्रॉपर्टी सौदे और पहले से तय ऑपरेशन टालें।
गुरु आपके चौथे भाव में: घर और मन की शांति पर ध्यान चाहिए; प्रॉपर्टी के मामले, घर बदलना या मरम्मत की संभावना। कर्क गुरु की उच्च राशि है, जिससे इस भाव की मुश्किलें हल्की पड़ती हैं।
सूर्य ग्रहण, 6 फ़रवरी: आपके दसवें भाव (करियर और मान-सम्मान) में।
बुध वक्री 9 फ़रवरी से 3 मार्च तक, आपके ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और मित्र) में, और 24 फ़रवरी से दसवें भाव (करियर और मान-सम्मान) में: संदेश, अनुबंध और गैजेट की ख़रीद दोबारा जाँचें।
चंद्र ग्रहण, 21 फ़रवरी: आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में। उपच्छाया ग्रहण।
शनि आपकी चंद्र राशि के ऊपर: साढ़े साती का बीच का चरण — ज़िम्मेदारी ज़्यादा, मदद कम और मन भारी; पर इसी समय टिकाऊ आदतें बनती हैं। मेष शनि की नीच राशि है, जहाँ वे सबसे कमज़ोर होते हैं।
बुध फिर वक्री 10 जून से 5 जुलाई तक, आपके तीसरे भाव (हिम्मत, मेहनत और छोटी यात्राएँ) में; वही सावधानी रखें।
गुरु आपके पाँचवें भाव में: गुरु की सबसे अच्छी जगहों में से एक — सोच तेज़, फ़ैसले सही, और संतान, पढ़ाई व प्रेम पर कृपा।
चंद्र ग्रहण, 18 जुलाई: आपके दसवें भाव (करियर और मान-सम्मान) में। उपच्छाया ग्रहण।
सूर्य ग्रहण, 2 अगस्त: आपके चौथे भाव (घर, माँ और मन की शांति) में। नई दिल्ली से दोपहर 3:53 से शाम 5:02 तक दिखेगा; सूतक रात 3:53 से।
शनि वक्री 9 अगस्त से 24 दिसंबर तक, आपके पहले भाव (आप, आपकी सेहत और मन) में, और 20 अक्टूबर से बारहवें भाव (ख़र्च, नींद और दूर की जगहें) में: पुरानी ज़िम्मेदारियाँ लौटती हैं; अधूरे काम पूरे करें।
चंद्र ग्रहण, 17 अगस्त: आपके दसवें भाव (करियर और मान-सम्मान) में।
बुध फिर वक्री 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक, आपके सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, और 21 अक्टूबर से छठे भाव (रोज़ का काम, सेहत और विरोधी) में; वही सावधानी रखें।
शनि आपके बारहवें भाव में: साढ़े साती का पहला चरण — ख़र्च बढ़ता है, नींद हल्की होती है और काम घर से दूर ले जा सकता है।
गुरु आपके छठे भाव में: रोज़ के काम, सेहत और क़र्ज़ पर ध्यान चाहिए, और विरोधी सक्रिय रहते हैं।
जिन ग्रहणों के आगे "भारत से दिखेगा" या "उपच्छाया" नहीं लिखा, वे भारत से नहीं दिखेंगे, इसलिए उनका सूतक नहीं माना जाता।
उपच्छाया ग्रहण में चंद्रमा बस हल्का धुँधला होता है, इसलिए दिखने पर भी सूतक नहीं माना जाता।
2027 में शादी के मुहूर्त 15 जनवरी से 14 मार्च तक, 15 अप्रैल से 13 जुलाई तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में पड़ते हैं, और गृह प्रवेश के 7 फ़रवरी से 14 मार्च तक, 7 मई से 4 जुलाई तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में। खरमास (सूर्य धनु या मीन में) 14 जनवरी तक, 15 मार्च से 14 अप्रैल तक और 16 दिसंबर से है, और चातुर्मास (विष्णु जी के विश्राम के चार महीने) 14 जुलाई से 9 नवंबर तक; इनमें शादी नहीं होती, और गृह प्रवेश के लिए पंचांग कुछ दिन देता है, पर उत्तर भारत के कई परिवार इनके बाद ही गृह प्रवेश करते हैं। (नई दिल्ली के अनुसार; हर दिन की तारीख़ें मुहूर्त पेज पर हैं।)
जिनके चंद्रमा मेष राशि में हों, वे फुर्तीले, साहसी और साफ़ बोलने वाले होते हैं। ऐसे लोग काम जोश से शुरू करते हैं, मन की बात कह देते हैं और इंतज़ार पसंद नहीं करते; इसी आग से ग़ुस्सा जल्दी आता है, पर उतनी ही जल्दी उतर भी जाता है। मेष मंगल की राशि है, इसलिए सामने साफ़ लक्ष्य हो तो ये सबसे अच्छा काम करते हैं।
अच्छा, 100 में से 65। चारों पहलू आसपास हैं, 63 से 67 के बीच।
सबसे अच्छे: जनवरी, सितंबर और नवंबर (72)। सबसे धीमे: फ़रवरी (56) और दिसंबर (59)।
हाँ। 2 जून तक और 20 अक्टूबर से साढ़े साती का पहला चरण; 3 जून से 19 अक्टूबर तक साढ़े साती का दूसरा चरण, सबसे भारी। यह साढ़े साती 29 मार्च 2025 को शुरू हुई और 31 मई 2032 को ख़त्म होगी।
अंक 1, 9; रंग नारंगी, पीला और लाल।
आपकी अपनी कुंडली सिर्फ़ आपकी है। इसे मुफ़्त बनाएँ, या 24 में से किसी भी ज्योतिषी से उस गोचर के बारे में पूछें जो सच में आप पर चल रहा है। पैसे मिनट के हिसाब से, और सिर्फ़ तब तक जब कोई जवाब दे रहा हो।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

