वृषभ ज्योतिष में आपकी चंद्र राशि है। इस पेज पर वृषभ राशि का 2027 का हाल है, वृषभ से गिने भावों में ग्रहों की चाल के हिसाब से।
2027 में सबसे अच्छे महीने नवंबर और दिसंबर हैं और सबसे धीमे जून और अगस्त — साथ में 3 जून से 19 अक्टूबर तक साढ़े साती का पहला चरण।
गुरु आपके चौथे भाव (घर और माता का भाव) में हैं। घर, प्रॉपर्टी और मन की शांति आपका समय माँगते हैं; घर बदलने या मरम्मत की संभावना है।
गुरु आपके तीसरे भाव (पराक्रम भाव) में आते हैं, जो उनके लिए कमज़ोर जगह है। मेहनत पूरी होती है पर नतीजे धीरे आते हैं; छोटी यात्राएँ और छोटे बदलाव व्यस्त रखते हैं। पर इस दौर में गुरु कर्क राशि में उच्च के हैं, जिससे तीसरे भाव की मुश्किलें हल्की पड़ती हैं: वे आती हैं, पर कम, और ज़रूरत पर मदद मिलती है।
गुरु आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम का भाव) में आते हैं — यह उनकी सबसे अच्छी जगहों में से एक है। सोच तेज़ रहती है, फ़ैसले सही निकलते हैं और संतान या पढ़ाई से अच्छी ख़बर की संभावना है।
2 जून तक, और फिर 20 अक्टूबर सेशनि आपके ग्यारहवें भाव में: शनि की सबसे अच्छी जगहों में से एक — लगातार लाभ, और पुरानी मेहनत का फल।
3 जून से 19 अक्टूबर तकशनि आपके बारहवें भाव में: साढ़े साती का पहला चरण — ख़र्च बढ़ता है, नींद हल्की होती है और काम घर से दूर ले जा सकता है।
काम के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 24 जनवरी तक और 20 अक्टूबर से है; 25 जनवरी से 2 जून तक और 26 जून से 19 अक्टूबर तक मिला-जुला; 3 जून से 25 जून तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए काम के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
20 अक्टूबर से: वेतन बढ़ाने की बात करें, बेहतर नौकरी के लिए आवेदन करें, सौदा पक्का करें या नया काम शुरू करें। 24 जनवरी तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए यह समय उसके बाद से रखा गया है। बस 20 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक (बुध वक्री) अनुबंध और ऑफ़र लेटर पर दस्तख़त टालें। बुध का वक्री दौर 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक है; ऊपर उसके वही दिन हैं जो इस समय में पड़ते हैं।
2027 में करियर का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
प्रेम और विवाह के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 2 जून तक और 20 अक्टूबर से है; 3 जून से 25 जून तक मिला-जुला; 26 जून से 19 अक्टूबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए प्रेम और विवाह के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
14 अप्रैल से 2 जून तक और 20 अक्टूबर से: परिवारों से मिलें, रिश्ता पक्का करें, सगाई करें या शादी की तारीख़ तय करें; अगर प्रेम में हैं, तो घरवालों से बात करें। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए यह समय उसके बाद से रखा गया है। इस दौर में शादी के मुहूर्त सिर्फ़ 15 अप्रैल से 2 जून तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में पड़ते हैं (हर दिन मुहूर्त पेज पर है); इस दौर का बाक़ी समय चातुर्मास (भगवान विष्णु के विश्राम के चार महीने, जिनमें शादी का मुहूर्त नहीं होता) और खरमास (सूर्य के धनु या मीन में रहने का महीना, जिसमें शादी का मुहूर्त नहीं होता) के कारण बंद है, इसलिए शादी की तारीख़ इन्हीं में रखें। विवाह मुहूर्त की तारीख़ें, 2027 →
2027 में प्रेम और विवाह का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
सेहत के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 2 जून तक और 20 अक्टूबर से है; 26 जून से 19 अक्टूबर तक मिला-जुला; 3 जून से 25 जून तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए सेहत के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
14 अप्रैल से 2 जून तक और 20 अक्टूबर से: पूरी जाँच करा लें, सैर, योग या खान-पान का जो नियम टालते आ रहे थे उसे शुरू करें, और अगर डॉक्टर ने कोई पहले से तय ऑपरेशन बताया है तो उसे इसी समय रखें।
2027 में सेहत का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
धन के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 24 जनवरी तक और 20 अक्टूबर से है; 25 जनवरी से 2 जून तक मिला-जुला; 3 जून से 19 अक्टूबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए धन के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
20 अक्टूबर से: एसआईपी शुरू करें या बढ़ाएँ, फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में पैसा डालें, निवेश के लिए सोना या प्रॉपर्टी ख़रीदें, और अपना बकाया पैसा माँगें। बस 20 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक (बुध वक्री) क़र्ज़ के काग़ज़ों पर दस्तख़त और बड़े निवेश टालें।
2027 में पैसा का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
घर-परिवार के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 2 जून तक और 20 अक्टूबर से है; 3 जून से 25 जून तक मिला-जुला; 26 जून से 19 अक्टूबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए घर-परिवार के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
चौथे भाव में गुरु घर को साल का मुख्य विषय बनाते हैं: घर ख़रीदना, बनवाना या उसकी मरम्मत, नया वाहन या घर बदलना — सब संभव है। परंपरा इसे अस्थिर स्थिति मानती है, इसलिए इस काम में सोच से ज़्यादा भाग-दौड़, ख़र्च और रिश्तेदारों से खटपट होती है, और माँ की सेहत पर ध्यान देना ज़रूरी है। प्रॉपर्टी की योजना पर आगे बढ़ें, पर हर काग़ज़ जाँचें और बजट से बाहर न जाएँ।
तीसरे भाव में गुरु भाई-बहनों और चचेरे-ममेरे भाई-बहनों को केंद्र में लाते हैं: इस साल किसी भाई या बहन को आपकी मदद, सलाह या पैसे की ज़रूरत पड़ सकती है। रिश्तेदारों से मिलने की छोटी यात्राएँ आम हैं, पर पारिवारिक योजनाएँ आपकी सोच से धीमी चलती हैं। भाई-बहनों की खुलकर मदद करें, लेन-देन लिखित में रखें, और छोटी ग़लतफ़हमी को बढ़ने से पहले फ़ोन या मुलाक़ात से दूर करें। इस समय गुरु की दृष्टि आपके नौवें भाव पर भी है, इसलिए पिता और बड़े आपकी योजनाओं का साथ देते हैं और परिवार के साथ तीर्थ यात्रा अच्छी रहती है।
पाँचवें भाव में गुरु संतान के लिए शुभ हैं: बच्चों की पढ़ाई या करियर से अच्छी ख़बर, बेटे-बेटी की शादी या परिवार में बच्चे का जन्म संभव है, और संतान की आशा रखने वाले दंपती के लिए यह अनुकूल समय है। पारिवारिक मामलों में आपकी समझ सही रहती है और बड़े आपके फ़ैसलों का साथ देते हैं। बच्चों को इत्मीनान से समय दें, और उनका दाख़िला या मुंडन, नामकरण जैसे संस्कार इसी समय में तय करें।
ग्यारहवें भाव में शनि परिवार को लगातार और टिकाऊ लाभ देते हैं: बड़े भाई-बहन मदद करते हैं, घर की आमदनी बढ़ती है, और लंबे समय से अटकी योजनाएँ — घर या पारिवारिक कार्यक्रम — आख़िर पूरी होती हैं। परिवार के पुराने मित्र ज़रूरत पर काम आते हैं। प्रॉपर्टी की ख़रीद पूरी करने या बड़े परिवार को एक साथ लाने के लिए बहुत अच्छा समय। फिर भी, शनि की दृष्टि आपके पाँचवें भाव पर भी है: बच्चों को दबाव नहीं, धैर्य और लगातार सहारा चाहिए।
बारहवें भाव में शनि, साढ़े साती का पहला चरण, घर का ख़र्च बढ़ाते हैं और दूरी ला सकते हैं — आपको काम के लिए दूर रहना पड़ सकता है, या परिवार का कोई सदस्य दूर जा सकता है। घर में नींद और मन की शांति पर असर पड़ता है। सोच-समझकर बजट बनाएँ, घर या किसी कार्यक्रम के लिए बड़ा क़र्ज़ न लें, और माता-पिता से लगातार संपर्क में रहें। शनि की दृष्टि आपके दूसरे और नौवें भाव पर भी है: घर का पैसा तंग रहता है और ग़ुस्से में कही बात देर तक चुभती है, इसलिए सँभलकर बोलें; पिता या बड़े दूर-दूर से लग सकते हैं, इसलिए उनसे मिलते रहें और उनकी ज़िम्मेदारियों में हाथ बँटाएँ।
नौवें भाव में राहु परंपरा और मान्यताओं को लेकर पिता या बड़ों से मतभेद ला सकते हैं; असहमति हो तब भी सम्मान से सुनें।
14 अप्रैल से 2 जून तक और 20 अक्टूबर से: गृह प्रवेश की योजना बनाएँ, घर या वाहन ख़रीदें, टलता आ रहा पारिवारिक कार्यक्रम करें और परिवार को एक साथ लाएँ। बस 20 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक (बुध वक्री) प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री और होम लोन या बिक्री के काग़ज़ों पर दस्तख़त टालें। इस दौर में गृह प्रवेश के मुहूर्त 7 मई से 2 जून तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में पड़ते हैं (हर दिन मुहूर्त पेज पर है); इस दौर का बाक़ी समय गृह प्रवेश के लिए वर्जित हिंदू महीनों के कारण बंद है; चातुर्मास और खरमास में पंचांग कुछ दिन देता है, पर उत्तर भारत के कई परिवार उनमें गृह प्रवेश नहीं रखते, इसलिए गृह प्रवेश की तारीख़ इन्हीं में रखें। गृह प्रवेश मुहूर्त की तारीख़ें, 2027 →
गुरु वक्री: पारिवारिक योजनाएँ और कार्यक्रम टलते हैं; तारीख़ें लचीली रखें और अभी बड़ा एडवांस न दें
मंगल वक्री: घर में ग़ुस्सा जल्दी आता है और प्रॉपर्टी के झगड़े भड़कते हैं; भाई-बहनों से बहस से बचें और निर्माण का काम शुरू न करें
बुध वक्री: परिवार में ग़लतफ़हमी आसानी से होती है; प्रॉपर्टी के काग़ज़ दोबारा पढ़ें और ज़रूरी बात आमने-सामने करें
शनि वक्री: पुराने पारिवारिक विवाद और अटके प्रॉपर्टी के मामले लौटते हैं; नई योजना से पहले उन्हें धैर्य से निपटाएँ
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह; गुरु और मंगल वक्री
गुरु तीसरे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह; गुरु, मंगल और बुध वक्री; सूर्य ग्रहण 6 फ़रवरी; चंद्र ग्रहण 21 फ़रवरी
गुरु तीसरे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह; गुरु, मंगल और बुध वक्री
गुरु तीसरे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह; गुरु और मंगल वक्री
गुरु तीसरे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह
गुरु तीसरे भाव में — भारी जगह, पर उच्च के होने से हल्की; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; बुध वक्री
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; बुध वक्री; चंद्र ग्रहण 18 जुलाई
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि वक्री; सूर्य ग्रहण 2 अगस्त; चंद्र ग्रहण 17 अगस्त
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि वक्री
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह; शनि बारहवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि और बुध वक्री
गुरु चौथे भाव में — भारी जगह; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह; शनि वक्री
गुरु पाँचवें भाव में — अच्छी जगह; शनि ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह; शनि वक्री
गुरु वक्री 13 अप्रैल तक, आपके चौथे भाव (घर, माँ और मन की शांति) में, और 25 जनवरी से तीसरे भाव (हिम्मत, मेहनत और छोटी यात्राएँ) में: तरक़्क़ी धीमी होती है और योजनाएँ बदलती हैं।
मंगल वक्री 10 जनवरी से 1 अप्रैल तक, आपके चौथे भाव (घर, माँ और मन की शांति) में, और 10 मार्च से तीसरे भाव (हिम्मत, मेहनत और छोटी यात्राएँ) में: ग़ुस्सा जल्दी आता है; हो सके तो प्रॉपर्टी सौदे और पहले से तय ऑपरेशन टालें।
गुरु आपके तीसरे भाव में: मेहनत का फल सामान्य से धीरे मिलता है; छोटे बदलाव, छोटी यात्राएँ और जगह बदलने का दौर। कर्क गुरु की उच्च राशि है, जिससे इस भाव की मुश्किलें हल्की पड़ती हैं।
सूर्य ग्रहण, 6 फ़रवरी: आपके नौवें भाव (भाग्य, धर्म, पिता और लंबी यात्राएँ) में।
बुध वक्री 9 फ़रवरी से 3 मार्च तक, आपके दसवें भाव (करियर और मान-सम्मान) में, और 24 फ़रवरी से नौवें भाव (भाग्य, धर्म, पिता और लंबी यात्राएँ) में: संदेश, अनुबंध और गैजेट की ख़रीद दोबारा जाँचें।
चंद्र ग्रहण, 21 फ़रवरी: आपके चौथे भाव (घर, माँ और मन की शांति) में। उपच्छाया ग्रहण।
शनि आपके बारहवें भाव में: साढ़े साती का पहला चरण — ख़र्च बढ़ता है, नींद हल्की होती है और काम घर से दूर ले जा सकता है। मेष शनि की नीच राशि है, जहाँ वे सबसे कमज़ोर होते हैं।
बुध फिर वक्री 10 जून से 5 जुलाई तक, आपके दूसरे भाव (धन, परिवार और वाणी) में; वही सावधानी रखें।
गुरु आपके चौथे भाव में: घर और मन की शांति पर ध्यान चाहिए; प्रॉपर्टी के मामले, घर बदलना या मरम्मत की संभावना।
चंद्र ग्रहण, 18 जुलाई: आपके नौवें भाव (भाग्य, धर्म, पिता और लंबी यात्राएँ) में। उपच्छाया ग्रहण।
सूर्य ग्रहण, 2 अगस्त: आपके तीसरे भाव (हिम्मत, मेहनत और छोटी यात्राएँ) में। नई दिल्ली से दोपहर 3:53 से शाम 5:02 तक दिखेगा; सूतक रात 3:53 से।
शनि वक्री 9 अगस्त से 24 दिसंबर तक, आपके बारहवें भाव (ख़र्च, नींद और दूर की जगहें) में, और 20 अक्टूबर से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और मित्र) में: पुरानी ज़िम्मेदारियाँ लौटती हैं; अधूरे काम पूरे करें।
चंद्र ग्रहण, 17 अगस्त: आपके नौवें भाव (भाग्य, धर्म, पिता और लंबी यात्राएँ) में।
बुध फिर वक्री 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक, आपके छठे भाव (रोज़ का काम, सेहत और विरोधी) में, और 21 अक्टूबर से पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में; वही सावधानी रखें।
शनि आपके ग्यारहवें भाव में: शनि की सबसे अच्छी जगहों में से एक — लगातार लाभ, और पुरानी मेहनत का फल।
गुरु आपके पाँचवें भाव में: गुरु की सबसे अच्छी जगहों में से एक — सोच तेज़, फ़ैसले सही, और संतान, पढ़ाई व प्रेम पर कृपा।
जिन ग्रहणों के आगे "भारत से दिखेगा" या "उपच्छाया" नहीं लिखा, वे भारत से नहीं दिखेंगे, इसलिए उनका सूतक नहीं माना जाता।
उपच्छाया ग्रहण में चंद्रमा बस हल्का धुँधला होता है, इसलिए दिखने पर भी सूतक नहीं माना जाता।
2027 में शादी के मुहूर्त 15 जनवरी से 14 मार्च तक, 15 अप्रैल से 13 जुलाई तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में पड़ते हैं, और गृह प्रवेश के 7 फ़रवरी से 14 मार्च तक, 7 मई से 4 जुलाई तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में। खरमास (सूर्य धनु या मीन में) 14 जनवरी तक, 15 मार्च से 14 अप्रैल तक और 16 दिसंबर से है, और चातुर्मास (विष्णु जी के विश्राम के चार महीने) 14 जुलाई से 9 नवंबर तक; इनमें शादी नहीं होती, और गृह प्रवेश के लिए पंचांग कुछ दिन देता है, पर उत्तर भारत के कई परिवार इनके बाद ही गृह प्रवेश करते हैं। (नई दिल्ली के अनुसार; हर दिन की तारीख़ें मुहूर्त पेज पर हैं।)
जिनके चंद्रमा वृषभ में हों, वे शांत, धैर्यवान और स्थिर स्वभाव के होते हैं। यहाँ चंद्रमा उच्च के होते हैं, इसलिए मन टिका रहता है: आराम, अच्छा खाना, परिवार और जोड़ा हुआ पैसा इन्हें प्रिय हैं, और एक बार साथ दें तो ये निभाते हैं। दूसरी तरफ़ ज़िद और बदलाव से परहेज़ भी है। वृषभ शुक्र की राशि है, और शुक्र सुंदरता और संगीत की समझ देते हैं।
अच्छा, 100 में से 67। चारों पहलू आसपास हैं, 65 से 69 के बीच।
सबसे अच्छे: दिसंबर (84) और नवंबर (77)। सबसे धीमे: अगस्त (56) और जून (57)।
हाँ। 3 जून से 19 अक्टूबर तक साढ़े साती का पहला चरण। 20 अक्टूबर से शनि मीन राशि में लौट आते हैं, जो इन तीन भावों से बाहर है, इसलिए साढ़े साती रुकी रहती है — 23 फ़रवरी 2028 तक। यह साढ़े साती 3 जून 2027 को शुरू होगी और 13 जुलाई 2034 को ख़त्म होगी।
अंक 2, 6; रंग हरा, नीला और सफ़ेद।
आपकी अपनी कुंडली सिर्फ़ आपकी है। इसे मुफ़्त बनाएँ, या 24 में से किसी भी ज्योतिषी से उस गोचर के बारे में पूछें जो सच में आप पर चल रहा है। पैसे मिनट के हिसाब से, और सिर्फ़ तब तक जब कोई जवाब दे रहा हो।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

