कन्या ज्योतिष में आपकी चंद्र राशि है। इस पेज पर कन्या राशि का 2027 का हाल है, कन्या से गिने भावों में ग्रहों की चाल के हिसाब से।
2027 में सबसे अच्छे महीने अप्रैल और मई हैं और सबसे धीमे जुलाई और अगस्त — साथ में 3 जून से 19 अक्टूबर तक अष्टम शनि, यानी ढैय्या।
गुरु आपके बारहवें भाव (ख़र्च और दूर देश का भाव) में हैं। पैसा बाहर जाता है, अक्सर अच्छे कामों में, और विदेश यात्रा व साधना के योग बनते हैं।
गुरु आपके ग्यारहवें भाव (लाभ भाव) में आते हैं। आमदनी बढ़ती है, अटका पैसा आता है, और मित्र व जान-पहचान मनचाही चीज़ दिलाने में मदद करते हैं। इस दौर में गुरु कर्क राशि में हैं, जो उनकी उच्च राशि है — शास्त्रों के अनुसार यहाँ वे सबसे बलवान होते हैं।
गुरु आपके पहले भाव (आपकी अपनी राशि) में आते हैं। आत्मविश्वास लौटता है और लोग फिर आपकी ओर देखते हैं, पर अपने ऊपर ख़र्च भी बढ़ता है, इसलिए क़दम-दर-क़दम चलें।
2 जून तक, और फिर 20 अक्टूबर सेशनि आपके सातवें भाव में: विवाह और साझेदारी में धीरज चाहिए; काम से जुड़ी यात्राएँ बढ़ती हैं।
3 जून से 19 अक्टूबर तकशनि आपके आठवें भाव में (अष्टम शनि, यानी शनि की ढैय्या): देरी और अचानक बदलावों वाला धीमा, परखने वाला दौर; धीरज का फल मिलता है।
काम के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 25 जनवरी से 2 जून तक है; 3 जून से 25 जून तक और 26 नवंबर से मिला-जुला; 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए काम के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
14 अप्रैल से 2 जून तक: वेतन बढ़ाने की बात करें, बेहतर नौकरी के लिए आवेदन करें, सौदा पक्का करें या नया काम शुरू करें। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए यह समय उसके बाद से रखा गया है।
2027 में करियर का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
प्रेम और विवाह के लिए 2027 में समय 25 जनवरी से 25 जून तक और 26 नवंबर से मिला-जुला रहता है; 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक धीमा।
इस साल कोई भी समय शादी तय करने के लिए पूरी तरह आपके पक्ष में नहीं है। अगर अच्छा रिश्ता आए और दोनों परिवार राज़ी हों, तो 14 अप्रैल से 25 जून तक अपेक्षाकृत आसान समय है; वरना लोगों से मिलते रहें और बिना दबाव के बात बनने दें। इस दौर में शादी के मुहूर्त सिर्फ़ 15 अप्रैल से 25 जून तक के दौर में पड़ते हैं (हर दिन मुहूर्त पेज पर है); इस दौर का बाक़ी समय खरमास (सूर्य के धनु या मीन में रहने का महीना, जिसमें शादी का मुहूर्त नहीं होता) के कारण बंद है, इसलिए शादी की तारीख़ इन्हीं में रखें। विवाह मुहूर्त की तारीख़ें, 2027 →
2027 में प्रेम और विवाह का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
सेहत के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 25 जनवरी से 2 जून तक है; 24 जनवरी तक, 3 जून से 25 जून तक और 20 अक्टूबर से मिला-जुला; 26 जून से 19 अक्टूबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए सेहत के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
14 अप्रैल से 2 जून तक: पूरी जाँच करा लें, सैर, योग या खान-पान का जो नियम टालते आ रहे थे उसे शुरू करें, और अगर डॉक्टर ने कोई पहले से तय ऑपरेशन बताया है तो उसे इसी समय रखें।
2027 में सेहत का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
धन के लिए 2027 में समय 25 जनवरी से 25 जून तक और 26 नवंबर से मिला-जुला रहता है; 24 जनवरी तक और 26 जून से 25 नवंबर तक धीमा।
इस साल कोई भी समय बड़े निवेश के लिए पूरी तरह आपके पक्ष में नहीं है। अगर बड़ी रक़म लगानी ही हो या प्रॉपर्टी ख़रीदनी हो, तो 14 अप्रैल से 25 जून तक अपेक्षाकृत आसान समय है; वरना नियमित बचत जारी रखें और इंतज़ार करें।
2027 में पैसा का पूरा फल: हर दौर, महीने दर महीने, सावधानी की तारीख़ें और मुहूर्त के दिन →
घर-परिवार के लिए 2027 में सबसे अच्छा समय 25 जनवरी से 2 जून तक है; 24 जनवरी तक, 3 जून से 25 जून तक और 20 अक्टूबर से मिला-जुला; 26 जून से 19 अक्टूबर तक धीमा। 13 अप्रैल तक गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए घर-परिवार के अच्छे दौर का वह हिस्सा धीमा रहता है।
बारहवें भाव में गुरु दूरी लाते हैं: परिवार का कोई सदस्य काम या पढ़ाई के लिए दूर जा सकता है, या आपको कुछ समय घर से दूर रहना पड़ सकता है। घर का ख़र्च बढ़ता है — यात्रा, सेहत, किसी रिश्तेदार की ज़रूरत या धार्मिक काम पर — हालाँकि साथ मिलकर की गई तीर्थ यात्रा और दान अच्छे रहते हैं। माता-पिता से लगातार संपर्क में रहें, पारिवारिक ख़र्च का बजट पहले से बनाएँ और दिखावे के लिए क़र्ज़ न लें। इस समय गुरु की दृष्टि आपके चौथे भाव पर भी है, इसलिए घर या वाहन की योजनाओं को सहारा मिलता है और घर में सुकून लौटता है।
ग्यारहवें भाव में गुरु परिवार की इच्छाएँ पूरी करते हैं: लंबे समय से अटकी योजना — घर, शादी या बच्चे का दाख़िला — आगे बढ़ती है, और बड़े भाई-बहन साथ देते हैं। रिश्तेदार और दोस्त आसानी से जुटते हैं, और घर की आमदनी बढ़ती है। जो काम इंतज़ार में है — पारिवारिक कार्यक्रम, ख़रीदारी या सबका मिलना — उसे इसी समय पूरा करें। इस समय गुरु की दृष्टि आपके पाँचवें भाव पर भी है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई और उनसे जुड़ी अच्छी ख़बरों पर आशीर्वाद रहता है। पर आपके आठवें भाव में शनि के कारण 3 जून से 25 जून तक का समय घर-परिवार के लिए कुल मिलाकर मिला-जुला रहता है: परिवार की बड़ी योजनाएँ छोटी और बिना जल्दबाज़ी के रखें।
पहले भाव में गुरु आपको परिवार का सहारा बनाते हैं: बड़े आपकी बात सुनते हैं और आपकी एक बात से छोटे झगड़े सुलझ जाते हैं। पर शास्त्र इसे बेचैन स्थिति मानते हैं — घर बदलना या घर का ख़र्च बढ़ना आम है। माता-पिता और बच्चों को सिर्फ़ सलाह नहीं, समय दें, और परिवार की हर ज़िम्मेदारी अकेले अपने सिर न लें। इस समय गुरु की दृष्टि आपके नौवें भाव पर भी है, इसलिए पिता और बड़े आपकी योजनाओं का साथ देते हैं और परिवार के साथ तीर्थ यात्रा अच्छी रहती है।
सातवें भाव में शनि घर के माहौल को गंभीर बनाते हैं: जीवनसाथी की सेहत या काम, या ससुराल की ज़िम्मेदारियाँ आपका ज़्यादा समय लेती हैं। संयुक्त परिवार के मामले धीरे चलते हैं और धैर्य माँगते हैं। घर में ज़िम्मेदारियाँ साफ़-साफ़ बाँटें, रूठकर चुप्पी साधने से बचें, और व्यस्तता के बावजूद ससुराल आना-जाना बनाए रखें। शनि की दृष्टि आपके चौथे और नौवें भाव पर भी है: घर और प्रॉपर्टी के काम धीरे चलते हैं, और माँ को ज़्यादा देखभाल चाहिए; पिता या बड़े दूर-दूर से लग सकते हैं, इसलिए उनसे मिलते रहें और उनकी ज़िम्मेदारियों में हाथ बँटाएँ।
आठवें भाव में शनि का होना (अष्टम शनि) घर-परिवार के लिए एक चुनौती भरी स्थिति है: अचानक ख़र्च, किसी बड़े की सेहत, पुश्तैनी प्रॉपर्टी का विवाद या ससुराल से तनाव परेशान कर सकता है। इस दौर में परिवार में मेल बनाए रखने के लिए ख़ास ध्यान चाहिए। स्वास्थ्य बीमा और प्रॉपर्टी के काग़ज़ ठीक रखें, जहाँ तक हो सके परिवार के मुक़दमों से बचें, और रिश्तेदारों के बीच बड़ी रक़म का लेन-देन न करें। शनि की दृष्टि आपके दूसरे और पाँचवें भाव पर भी है: घर का पैसा तंग रहता है और ग़ुस्से में कही बात देर तक चुभती है, इसलिए सँभलकर बोलें; बच्चों को दबाव नहीं, धैर्य और लगातार सहारा चाहिए।
पाँचवें भाव में राहु बच्चों के फ़ैसलों को अलग और समझने में मुश्किल बनाते हैं; उन पर हुक्म चलाए बिना उनके क़रीब रहें, और परिवार का पैसा सट्टे से दूर रखें।
14 अप्रैल से 2 जून तक: गृह प्रवेश की योजना बनाएँ, घर या वाहन ख़रीदें, टलता आ रहा पारिवारिक कार्यक्रम करें और परिवार को एक साथ लाएँ। इस दौर में गृह प्रवेश के मुहूर्त सिर्फ़ 7 मई से 2 जून तक के दौर में पड़ते हैं (हर दिन मुहूर्त पेज पर है); इस दौर का बाक़ी समय गृह प्रवेश के लिए वर्जित हिंदू महीनों के कारण बंद है, इसलिए गृह प्रवेश की तारीख़ इन्हीं में रखें। गृह प्रवेश मुहूर्त की तारीख़ें, 2027 →
गुरु वक्री: पारिवारिक योजनाएँ और कार्यक्रम टलते हैं; तारीख़ें लचीली रखें और अभी बड़ा एडवांस न दें
मंगल वक्री: घर में ग़ुस्सा जल्दी आता है और प्रॉपर्टी के झगड़े भड़कते हैं; भाई-बहनों से बहस से बचें और निर्माण का काम शुरू न करें
बुध वक्री: परिवार में ग़लतफ़हमी आसानी से होती है; प्रॉपर्टी के काग़ज़ दोबारा पढ़ें और ज़रूरी बात आमने-सामने करें
शनि वक्री: पुराने पारिवारिक विवाद और अटके प्रॉपर्टी के मामले लौटते हैं; नई योजना से पहले उन्हें धैर्य से निपटाएँ
गुरु बारहवें भाव में — मिली-जुली जगह; शनि सातवें भाव में — भारी जगह; गुरु और मंगल वक्री
गुरु ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह, उच्च के होने से और मज़बूत; शनि सातवें भाव में — भारी जगह; गुरु, मंगल और बुध वक्री; सूर्य ग्रहण 6 फ़रवरी; चंद्र ग्रहण 21 फ़रवरी
गुरु ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह, उच्च के होने से और मज़बूत; शनि सातवें भाव में — भारी जगह; गुरु, मंगल और बुध वक्री
गुरु ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह, उच्च के होने से और मज़बूत; शनि सातवें भाव में — भारी जगह; गुरु और मंगल वक्री
गुरु ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह, उच्च के होने से और मज़बूत; शनि सातवें भाव में — भारी जगह
गुरु ग्यारहवें भाव में — अच्छी जगह, उच्च के होने से और मज़बूत; शनि आठवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; बुध वक्री
गुरु बारहवें भाव में — मिली-जुली जगह; शनि आठवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; बुध वक्री; चंद्र ग्रहण 18 जुलाई
गुरु बारहवें भाव में — मिली-जुली जगह; शनि आठवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि वक्री; सूर्य ग्रहण 2 अगस्त; चंद्र ग्रहण 17 अगस्त
गुरु बारहवें भाव में — मिली-जुली जगह; शनि आठवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि वक्री
गुरु बारहवें भाव में — मिली-जुली जगह; शनि आठवें भाव में — भारी जगह, नीच के होने से और भारी; शनि और बुध वक्री
गुरु बारहवें भाव में — मिली-जुली जगह; शनि सातवें भाव में — भारी जगह; शनि वक्री
गुरु पहले भाव में — मिली-जुली जगह; शनि सातवें भाव में — भारी जगह; शनि वक्री
गुरु वक्री 13 अप्रैल तक, आपके बारहवें भाव (ख़र्च, नींद और दूर की जगहें) में, और 25 जनवरी से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और मित्र) में: तरक़्क़ी धीमी होती है और योजनाएँ बदलती हैं।
मंगल वक्री 10 जनवरी से 1 अप्रैल तक, आपके बारहवें भाव (ख़र्च, नींद और दूर की जगहें) में, और 10 मार्च से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और मित्र) में: ग़ुस्सा जल्दी आता है; हो सके तो प्रॉपर्टी सौदे और पहले से तय ऑपरेशन टालें।
गुरु आपके ग्यारहवें भाव में: लाभ और मनोकामनाएँ पूरी — आमदनी, मित्र और जान-पहचान सब साथ देते हैं। कर्क गुरु की उच्च राशि है, जहाँ वे सबसे बलवान होते हैं।
सूर्य ग्रहण, 6 फ़रवरी: आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में।
बुध वक्री 9 फ़रवरी से 3 मार्च तक, आपके छठे भाव (रोज़ का काम, सेहत और विरोधी) में, और 24 फ़रवरी से पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में: संदेश, अनुबंध और गैजेट की ख़रीद दोबारा जाँचें।
चंद्र ग्रहण, 21 फ़रवरी: आपके बारहवें भाव (ख़र्च, नींद और दूर की जगहें) में। उपच्छाया ग्रहण।
शनि आपके आठवें भाव में (अष्टम शनि, यानी शनि की ढैय्या): देरी और अचानक बदलावों वाला धीमा, परखने वाला दौर; धीरज का फल मिलता है। मेष शनि की नीच राशि है, जहाँ वे सबसे कमज़ोर होते हैं।
बुध फिर वक्री 10 जून से 5 जुलाई तक, आपके दसवें भाव (करियर और मान-सम्मान) में; वही सावधानी रखें।
गुरु आपके बारहवें भाव में: ख़र्च, यात्रा और आध्यात्मिक काम — पैसा जाता है, अक्सर अच्छे कामों में; विदेश यात्रा के योग।
चंद्र ग्रहण, 18 जुलाई: आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में। उपच्छाया ग्रहण।
सूर्य ग्रहण, 2 अगस्त: आपके ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और मित्र) में। नई दिल्ली से दोपहर 3:53 से शाम 5:02 तक दिखेगा; सूतक रात 3:53 से।
शनि वक्री 9 अगस्त से 24 दिसंबर तक, आपके आठवें भाव (अचानक बदलाव और छिपे मामले) में, और 20 अक्टूबर से सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में: पुरानी ज़िम्मेदारियाँ लौटती हैं; अधूरे काम पूरे करें।
चंद्र ग्रहण, 17 अगस्त: आपके पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और प्रेम) में।
बुध फिर वक्री 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक, आपके दूसरे भाव (धन, परिवार और वाणी) में, और 21 अक्टूबर से पहले भाव (आप, आपकी सेहत और मन) में; वही सावधानी रखें।
शनि आपके सातवें भाव में: विवाह और साझेदारी में धीरज चाहिए; काम से जुड़ी यात्राएँ बढ़ती हैं।
गुरु आपकी चंद्र राशि के ऊपर: सोच बड़ी होती है, पर बेचैनी और अपने ऊपर ख़र्च भी बढ़ता है; परंपरा इस दौर में सँभलकर चलने को कहती है।
जिन ग्रहणों के आगे "भारत से दिखेगा" या "उपच्छाया" नहीं लिखा, वे भारत से नहीं दिखेंगे, इसलिए उनका सूतक नहीं माना जाता।
उपच्छाया ग्रहण में चंद्रमा बस हल्का धुँधला होता है, इसलिए दिखने पर भी सूतक नहीं माना जाता।
2027 में शादी के मुहूर्त 15 जनवरी से 14 मार्च तक, 15 अप्रैल से 13 जुलाई तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में पड़ते हैं, और गृह प्रवेश के 7 फ़रवरी से 14 मार्च तक, 7 मई से 4 जुलाई तक और 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक के दौर में। खरमास (सूर्य धनु या मीन में) 14 जनवरी तक, 15 मार्च से 14 अप्रैल तक और 16 दिसंबर से है, और चातुर्मास (विष्णु जी के विश्राम के चार महीने) 14 जुलाई से 9 नवंबर तक; इनमें शादी नहीं होती, और गृह प्रवेश के लिए पंचांग कुछ दिन देता है, पर उत्तर भारत के कई परिवार इनके बाद ही गृह प्रवेश करते हैं। (नई दिल्ली के अनुसार; हर दिन की तारीख़ें मुहूर्त पेज पर हैं।)
जिनके चंद्रमा कन्या में हों, वे सावधान, व्यावहारिक और मददगार होते हैं। ऐसे लोग दूसरों से छूटी बारीकियाँ देख लेते हैं, सलीका पसंद करते हैं और बात के पक्के होते हैं; सेहत, काम और सेवा इनके लिए अहम हैं। यही बारीक नज़र कभी चिंता और कमियाँ निकालने में बदल जाती है। कन्या बुध की राशि है, इसलिए ये हिसाब-किताब, चिकित्सा, विश्लेषण और पढ़ाने में अच्छे रहते हैं।
ठीक-ठाक, 100 में से 62। सबसे मज़बूत: प्रेम और सेहत (63); सँभलकर: पैसा (58)।
सबसे अच्छे: मई (74) और अप्रैल (72)। सबसे धीमे: अगस्त (51) और जुलाई (52)।
नहीं। 2027 में शनि किसी भी समय कन्या से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में नहीं हैं। पर इस साल शनि की ढैय्या चल रही है: अगला सवाल देखें।
हाँ। ढैय्या चंद्र राशि से चौथे (कंटक शनि) या आठवें भाव (अष्टम शनि) में शनि के ढाई साल हैं। 3 जून से 19 अक्टूबर तक अष्टम शनि (ढैय्या)। अष्टम शनि 3 जून 2027 को शुरू होगा और 17 अप्रैल 2030 को ख़त्म होगा; बीच में 20 अक्टूबर 2027 से 22 फ़रवरी 2028 तक विराम रहेगा, जब शनि मीन राशि में होंगे।
अंक 5, 6; रंग सफ़ेद, स्लेटी और हरा।
आपकी अपनी कुंडली सिर्फ़ आपकी है। इसे मुफ़्त बनाएँ, या 24 में से किसी भी ज्योतिषी से उस गोचर के बारे में पूछें जो सच में आप पर चल रहा है। पैसे मिनट के हिसाब से, और सिर्फ़ तब तक जब कोई जवाब दे रहा हो।
मुफ़्त कुंडली बनाएँ

