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बारह राशियों में ग्यारहवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 300°–330°

कुंभ राशि
चंद्र राशि · स्वामी शनि

जन्म के समय चंद्रमा कुंभ में हों तो आपकी राशि कुंभ है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा कुंभ में हों, वे विचारशील, स्वतंत्र और मानवता की परवाह करने वाले होते हैं। इसके स्वामी शनि हैं, नक्षत्र धनिष्ठा (चरण 3–4), शतभिषा और पूर्वा भाद्रपद (चरण 1–3) हैं, और परंपरा में कुंभ राशि के बच्चे का नाम गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो या दा अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में कुंभ राशि, बारह में ग्यारहवीं, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में कुंभ राशि, बारह में ग्यारहवीं, शनि मीन में चिह्नित

कुंभ राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर कुंभ राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीशनि
आकृतिघड़ा लिए पुरुष
तत्त्ववायु
स्वभावस्थिर
विषम या समविषम (मेष से पहली, तीसरी, पाँचवीं… राशि): शास्त्र विषम राशियों को पुरुष और क्रूर कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)पिंडलियाँ (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)मानव (मनुष्य)
शुभ अंक, रंग, दिन8, काला, शनिवार
देवताशनि देव
यहाँ बली या निर्बल ग्रहशनि: मूलत्रिकोण में (राशि का वह हिस्सा जहाँ ग्रह बहुत सहज रहते हैं; बल में इसका दर्जा उच्च के ठीक बाद आता है)

कुंभ राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग अलग ढंग से सोचते हैं, समाज और दोस्तों की परवाह करते हैं और व्यावहारिक मदद करना पसंद करते हैं। ये कभी उदासीन लग सकते हैं और अपनी राय पर अड़ जाते हैं। कुंभ शनि की राशि है, इसलिए ये विज्ञान, तकनीक, समाज सेवा और बड़ी संस्थाओं में अच्छा करते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र कुंभ राशि में हों तो जातक लंबा और गठीले शरीर वाला होता है, उसे फूल और सुगंध प्रिय होते हैं, वह मित्रों से जुड़ा रहता है और बिना थके लंबी दूरी पैदल चल लेता है। श्लोक कहता है कि उसकी स्थिति बारी-बारी से उठती और गिरती रहती है, और पराई स्त्री, पराए धन और ग़लत कामों की ओर झुकाव से सावधान करता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, कुंभ राशि और उसके स्वामी शनि तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.11

ख़ूबियाँ

पराशर के ग्रह-मंत्रिमंडल में कुंभ के स्वामी शनि सेवक हैं, और कुंभ वालों में भी वही विनम्रता दिखती है: ये चपरासी और अफ़सर से एक जैसा व्यवहार करते हैं और बिना चमक-दमक वाले काम से नहीं कतराते। स्थिर वायु राशि होने से ये किसी विचार पर बरसों टिके रहते हैं, जो धीमे, मिल-जुलकर होने वाले कामों के अनुकूल है, जैसे मोहल्ला समिति, मंदिर का प्रबंध या रक्तदान शिविर।

किन बातों का ध्यान रखें

समिति के काम, किसी नेक मक़सद या ज़रूरतमंद दोस्त के लिए शामें लगाते-लगाते कुंभ वालों का अपना घर कभी इंतज़ार करता रह जाता है। शनि की धीमी चाल अपने निजी कामों को टालने में भी दिख सकती है, जैसे सेहत की जाँच या बैंक खाते में वारिस का नाम दर्ज कराना, जो सही समय निकल जाने के बाद भी पड़े रहते हैं। हफ़्ते में एक तय शाम परिवार के लिए और अधूरे काग़ज़ी कामों के लिए एक तय तारीख़ रखकर कुंभ वाले जीवन के दोनों पहलुओं में संतुलन बनाए रखते हैं।

कुंभ राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

कुंभ के लिए चंद्र से दसवीं राशि वृश्चिक है, जिसके स्वामी मंगल हैं, इसलिए परंपरा इंजीनियरिंग, सर्जरी, सेना, सुरक्षा बल और संकट संभालने वाले कामों की ओर देखती है। राशि के स्वामी शनि परिश्रम, भूमि और अनुशासन जोड़ते हैं, इसलिए किसी बड़े सरकारी उपक्रम में इंजीनियर का पद, सेना की तकनीकी शाखा या शोध का काम इस राशि के लिए ठीक बैठता है। ऊपर का श्लोक कहता है कि इनकी स्थिति उठती-गिरती रहती है, इसलिए जोखिम के दाँव के बजाय पक्की नौकरी और नियमित बचत इनके लिए ठीक रहती है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि सिंह है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो स्वाभिमानी, उदार और गर्मजोशी वाला हो और अगुवाई पसंद करता हो। सिंह भी, कुंभ की तरह, स्थिर राशि है; स्वतंत्र, थोड़ा अलग रहने वाले कुंभ वाले अपनी भावना खुलकर जताएँ और साथी को वह सम्मान दें जिसकी ऐसे स्वाभिमानी साथी को चाह होती है, तो दांपत्य सुखी रहता है। जीवनसाथी को दोस्तों की दुनिया से अलग रखने के बजाय उसमें शामिल करना घर में अपनापन बनाए रखता है।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में कुंभ को पिंडलियों से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और वायु तत्त्व की राशि होने से गति और व्यस्त मन से। ऊपर के श्लोक के अनुसार पैदल चलना इनके लिए ठीक रहता है, और लंबी यात्राओं और बढ़ती उम्र में पिंडलियों का ध्यान रखना अच्छा है।

कुंभ राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीकुंभ में अंशकुंभ में चरणनाम अक्षर
धनिष्ठामंगल0°–6°40′3–4गू, गे
शतभिषाराहु6°40′–20°चारोंगो, सा, सी, सू
पूर्वा भाद्रपदगुरु20°–30°1–3से, सो, दा

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

कुंभ राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर कुंभ राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिकुंभ राशि पर साढ़े साती 23 फ़रवरी 2028 तक चलेगी। इस समय आख़िरी दौर है, शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में, 3 जून 2027 तक। शनि हर साल लगभग साढ़े चार महीने वक्री (उल्टी चाल में) रहते हैं, इसलिए राशि की सीमा के पास वे आगे-पीछे आते-जाते हैं, और दौर ऐसे चलेंगे:
    · 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे
    · 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक फिर आख़िरी दौर
    उसके बाद कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से सातवें भाव (विवाह, साझेदार और कारोबारी लेन-देन) में, 25 जनवरी 2027 से फिर छठे भाव में, 26 जून 2027 से फिर सातवें भाव में और 26 नवंबर 2027 से आठवें भाव (सेहत, अचानक की घटनाएँ, छिपी बातें और ससुराल) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से बारहवें भाव (ख़र्च, नींद, विदेश यात्रा और त्याग) में रहेंगे।

कुंभ राशिफल 2027: महीने दर महीने →

कुंभ राशि का उपाय: स्वामी शनि

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • शनि का मंत्र, शनिवार को 108 बारॐ शं शनैश्चराय नमःकुंभ राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, टिकाऊ काम, धैर्य और अनुशासन के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमःशनि के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब कुंभ राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • शनि देव की पूजाकुंभ राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा धैर्य और लगन के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में कुंभ राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलकुंभ को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में कुंभ का सबसे ज़्यादा मेल वृषभ से (13/15) और सबसे कम कर्क से (1.5/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। मीन, मिथुन, कर्क और कन्या के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। मकर और तुला के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)कुंभ मानव (मनुष्य) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में कुंभ को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि कुंभ, मिथुन, कन्या, तुला या धनु (पहला आधा) हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: धनु के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो कुंभ को 1 अंक मिलता है।

हर राशि से कुंभ का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में कुंभ राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: गहरा भूरा
  • मध्यम शरीर
  • स्वरूप: घड़ा लिए पुरुष
  • द्विपद (दो पैरों वाली)
  • दिन में अत्यंत बली
  • दिशा: पश्चिम
  • गहरे जल में वास
  • तमोगुणी
  • वायु तत्त्व
  • शीर्षोदय (सिर से उदय होने वाली)
  • स्वामी: शनि
  • स्थिर, पुरुष और क्रूर राशि
  • सम प्रकृति (वात, पित्त, कफ तीनों संतुलित)

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.21

आम सवाल

कुंभ राशि क्या है?

कुंभ बारह राशियों में ग्यारहवीं है, निरयन राशिचक्र के 300°–330°, और इसके स्वामी शनि हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

कुंभ राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

कुंभ राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में कुंभ का सबसे अच्छा मेल वृषभ से है (13/15, कुंभ को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

कुंभ राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी शनि का मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः, शनिवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या कुंभ राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

हाँ: साढ़े साती 23 फ़रवरी 2028 तक चलेगी। अभी आख़िरी दौर है, शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में, 3 जून 2027 तक। इसके बाद: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक। शनि मीन में हैं, कुंभ से दूसरे भाव में।

कुंभ राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने जुलाई, सितंबर और अक्टूबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी, मार्च और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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