बारह राशियों में ग्यारहवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 300°–330°
जन्म के समय चंद्रमा कुंभ में हों तो आपकी राशि कुंभ है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा कुंभ में हों, वे विचारशील, स्वतंत्र और मानवता की परवाह करने वाले होते हैं। इसके स्वामी शनि हैं, नक्षत्र धनिष्ठा (चरण 3–4), शतभिषा और पूर्वा भाद्रपद (चरण 1–3) हैं, और परंपरा में कुंभ राशि के बच्चे का नाम गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो या दा अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर कुंभ राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ऐसे लोग अलग ढंग से सोचते हैं, समाज और दोस्तों की परवाह करते हैं और व्यावहारिक मदद करना पसंद करते हैं। ये कभी उदासीन लग सकते हैं और अपनी राय पर अड़ जाते हैं। कुंभ शनि की राशि है, इसलिए ये विज्ञान, तकनीक, समाज सेवा और बड़ी संस्थाओं में अच्छा करते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र कुंभ राशि में हों तो जातक लंबा और गठीले शरीर वाला होता है, उसे फूल और सुगंध प्रिय होते हैं, वह मित्रों से जुड़ा रहता है और बिना थके लंबी दूरी पैदल चल लेता है। श्लोक कहता है कि उसकी स्थिति बारी-बारी से उठती और गिरती रहती है, और पराई स्त्री, पराए धन और ग़लत कामों की ओर झुकाव से सावधान करता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, कुंभ राशि और उसके स्वामी शनि तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.11
पराशर के ग्रह-मंत्रिमंडल में कुंभ के स्वामी शनि सेवक हैं, और कुंभ वालों में भी वही विनम्रता दिखती है: ये चपरासी और अफ़सर से एक जैसा व्यवहार करते हैं और बिना चमक-दमक वाले काम से नहीं कतराते। स्थिर वायु राशि होने से ये किसी विचार पर बरसों टिके रहते हैं, जो धीमे, मिल-जुलकर होने वाले कामों के अनुकूल है, जैसे मोहल्ला समिति, मंदिर का प्रबंध या रक्तदान शिविर।
समिति के काम, किसी नेक मक़सद या ज़रूरतमंद दोस्त के लिए शामें लगाते-लगाते कुंभ वालों का अपना घर कभी इंतज़ार करता रह जाता है। शनि की धीमी चाल अपने निजी कामों को टालने में भी दिख सकती है, जैसे सेहत की जाँच या बैंक खाते में वारिस का नाम दर्ज कराना, जो सही समय निकल जाने के बाद भी पड़े रहते हैं। हफ़्ते में एक तय शाम परिवार के लिए और अधूरे काग़ज़ी कामों के लिए एक तय तारीख़ रखकर कुंभ वाले जीवन के दोनों पहलुओं में संतुलन बनाए रखते हैं।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
कुंभ के लिए चंद्र से दसवीं राशि वृश्चिक है, जिसके स्वामी मंगल हैं, इसलिए परंपरा इंजीनियरिंग, सर्जरी, सेना, सुरक्षा बल और संकट संभालने वाले कामों की ओर देखती है। राशि के स्वामी शनि परिश्रम, भूमि और अनुशासन जोड़ते हैं, इसलिए किसी बड़े सरकारी उपक्रम में इंजीनियर का पद, सेना की तकनीकी शाखा या शोध का काम इस राशि के लिए ठीक बैठता है। ऊपर का श्लोक कहता है कि इनकी स्थिति उठती-गिरती रहती है, इसलिए जोखिम के दाँव के बजाय पक्की नौकरी और नियमित बचत इनके लिए ठीक रहती है।
चंद्र से सातवीं राशि सिंह है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो स्वाभिमानी, उदार और गर्मजोशी वाला हो और अगुवाई पसंद करता हो। सिंह भी, कुंभ की तरह, स्थिर राशि है; स्वतंत्र, थोड़ा अलग रहने वाले कुंभ वाले अपनी भावना खुलकर जताएँ और साथी को वह सम्मान दें जिसकी ऐसे स्वाभिमानी साथी को चाह होती है, तो दांपत्य सुखी रहता है। जीवनसाथी को दोस्तों की दुनिया से अलग रखने के बजाय उसमें शामिल करना घर में अपनापन बनाए रखता है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में कुंभ को पिंडलियों से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और वायु तत्त्व की राशि होने से गति और व्यस्त मन से। ऊपर के श्लोक के अनुसार पैदल चलना इनके लिए ठीक रहता है, और लंबी यात्राओं और बढ़ती उम्र में पिंडलियों का ध्यान रखना अच्छा है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | कुंभ में अंश | कुंभ में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| धनिष्ठा | मंगल | 0°–6°40′ | 3–4 | गू, गे |
| शतभिषा | राहु | 6°40′–20° | चारों | गो, सा, सी, सू |
| पूर्वा भाद्रपद | गुरु | 20°–30° | 1–3 | से, सो, दा |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर कुंभ राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.21
कुंभ बारह राशियों में ग्यारहवीं है, निरयन राशिचक्र के 300°–330°, और इसके स्वामी शनि हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में कुंभ का सबसे अच्छा मेल वृषभ से है (13/15, कुंभ को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी शनि का मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः, शनिवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
हाँ: साढ़े साती 23 फ़रवरी 2028 तक चलेगी। अभी आख़िरी दौर है, शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में, 3 जून 2027 तक। इसके बाद: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक। शनि मीन में हैं, कुंभ से दूसरे भाव में।
2027 में सबसे अच्छे महीने जुलाई, सितंबर और अक्टूबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी, मार्च और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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