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मेष से मीन · निरयन (स्थिर तारों वाला) राशिचक्र

बारह राशियाँ
आपकी चंद्र राशि: स्वामी, नक्षत्र और नाम अक्षर

आपकी राशि वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा थे। तालिका में हर राशि के स्वामी, नक्षत्र और नाम अक्षर हैं; हर राशि का पूरा विवरण पढ़ने के लिए अपनी राशि चुनें।

राशि चक्र: मेष से मीन तक बारह राशियाँराशि चक्र: मेष से मीन तक बारह राशियाँ

हर राशि संक्षेप में

चरण नक्षत्र का एक चौथाई हिस्सा है, और नाम अक्षर वह अक्षर जिससे परंपरा में बच्चे का नाम शुरू होता है। निरयन राशिचक्र में हर राशि तीस अंश की होती है; गिनती मेष के 0° से शुरू होती है। सिर्फ़ जन्म की तारीख़ से राशि तय नहीं होती: चंद्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलते हैं, इसलिए समय और जगह भी चाहिए।

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राशिस्वामीस्वभावनक्षत्रनाम अक्षर
मेषमंगलजिनके चंद्रमा मेष राशि में हों, वे फुर्तीले, साहसी और साफ़ बोलने वाले होते हैं।अश्विनी, भरणी, कृत्तिका (चरण 1)चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
वृषभशुक्रशांत, धैर्यवान और स्थिर स्वभाव के होते हैं।कृत्तिका (चरण 2–4), रोहिणी, मृगशिरा (चरण 1–2)ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
मिथुनबुधजिज्ञासु, बातूनी और हाज़िरजवाब होते हैं।मृगशिरा (चरण 3–4), आर्द्रा, पुनर्वसु (चरण 1–3)का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा
कर्कचंद्रभावुक होते हैं और दूसरों का ख़याल रखते हैं।पुनर्वसु (चरण 4), पुष्य, अश्लेषाही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
सिंहसूर्यस्वाभिमानी, उदार और दिलदार होते हैं।मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1)मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
कन्याबुधसावधान, व्यावहारिक और मददगार होते हैं।उत्तरा फाल्गुनी (चरण 2–4), हस्त, चित्रा (चरण 1–2)टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
तुलाशुक्रमिलनसार, न्यायप्रिय और व्यवहार-कुशल होते हैं।चित्रा (चरण 3–4), स्वाति, विशाखा (चरण 1–3)रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
वृश्चिकमंगलगहराई से महसूस करते हैं और बहुत कुछ मन में रखते हैं।विशाखा (चरण 4), अनुराधा, ज्येष्ठातो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
धनुगुरुआशावादी, खुले दिल वाले और आज़ादी पसंद होते हैं।मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा (चरण 1)ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
मकरशनिअनुशासित, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी होते हैं।उत्तराषाढ़ा (चरण 2–4), श्रवण, धनिष्ठा (चरण 1–2)भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
कुंभशनिविचारशील, स्वतंत्र और मानवता की परवाह करने वाले होते हैं।धनिष्ठा (चरण 3–4), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद (चरण 1–3)गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
मीनगुरुदयालु, कल्पनाशील और आध्यात्मिक होते हैं।पूर्वा भाद्रपद (चरण 4), उत्तरा भाद्रपद, रेवतीदी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

अभी शनि और हर राशि

शनि मीन में हैं। चंद्र राशि से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है; चौथे या आठवें में हों तो ढैय्या।

राशिअभीसाढ़े साती या ढैय्या कब ख़त्मआगे
मेषसाढ़े साती, पहला दौर (शनि बारहवें भाव में)31 मई 2032कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक
वृषभकोई नहीं—साढ़े साती 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 13 जुलाई 2034 तक
मिथुनकोई नहीं—साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 27 अगस्त 2036 तक
कर्ककोई नहीं—साढ़े साती 31 मई 2032 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक
सिंहअष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में)23 फ़रवरी 2028 (बीच में 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे)साढ़े साती 13 जुलाई 2034 से 28 जनवरी 2041 तक, फिर 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक
कन्याकोई नहीं—अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक
तुलाकोई नहीं—अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक
वृश्चिककोई नहीं—अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक
धनुकंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में)23 फ़रवरी 2028 (बीच में 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे)अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक
मकरकोई नहीं—कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक
कुंभसाढ़े साती, आख़िरी दौर (शनि दूसरे भाव में)23 फ़रवरी 2028 (बीच में 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे)कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक
मीनसाढ़े साती, बीच का दौर (शनि पहले भाव में)17 अप्रैल 2030 (बीच में 8 अगस्त 2029 से 4 अक्टूबर 2029 तक विराम, जब शनि वृषभ में होंगे)कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक

राशि, लग्न और सूर्य राशि

  • राशिजन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हों। भारत में यही “आपकी राशि” है: राशिफल, साढ़े साती, ढैय्या और नाम अक्षर इसी से देखे जाते हैं।
  • लग्नजन्म के क्षण पूर्व में उदय हो रही राशि। यह लगभग हर दो घंटे में बदलती है, इसलिए इसके लिए जन्म का समय चाहिए; कुंडली के भाव इसी से गिने जाते हैं। अपना लग्न जानें
  • सूर्य राशिजिस राशि में सूर्य हों: पश्चिमी राशिफल इसी से चलते हैं। वैदिक राशियाँ निरयन होती हैं, यानी स्थिर तारों के हिसाब से, इसलिए ज़्यादातर लोगों की वैदिक सूर्य राशि पश्चिमी से एक राशि पहले होती है।

आम सवाल

मेरी राशि क्या है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में थे। इसे तय करने के लिए जन्म की तारीख़, समय और जगह चाहिए।

कितनी राशियाँ होती हैं?

बारह, हर एक तीस अंश की: मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन।

जन्म का समय पता न हो तो?

जन्म की तारीख़ से राशि एक या दो राशियों तक सिमट जाती है, क्योंकि चंद्रमा हर राशि में लगभग ढाई दिन रहते हैं। कई परिवार नाम राशि भी मानते हैं: वह राशि जिसके नाम अक्षर से व्यक्ति का नाम शुरू होता है, ऊपर की तालिका से। इससे नाम मिलान और मोटा राशिफल देखा जाता है, पर यह जन्म कुंडली की चंद्र राशि नहीं है।

क्या राशि और सूर्य राशि एक हैं?

नहीं। भारत में राशि का मतलब चंद्र राशि है। सूर्य राशि पश्चिमी राशिफल में चलती है, और लगभग बारह में से एक व्यक्ति की ही चंद्र राशि और सूर्य राशि एक होती है।

अभी किन राशियों पर साढ़े साती है?

शनि मीन में हैं, इसलिए तीन राशियों पर: मेष (अभी पहला दौर; साढ़े साती 31 मई 2032 तक), कुंभ (अभी आख़िरी दौर; साढ़े साती 23 फ़रवरी 2028 तक) और मीन (अभी बीच का दौर; साढ़े साती 17 अप्रैल 2030 तक)।

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