मेष से मीन · निरयन (स्थिर तारों वाला) राशिचक्र
आपकी राशि वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा थे। तालिका में हर राशि के स्वामी, नक्षत्र और नाम अक्षर हैं; हर राशि का पूरा विवरण पढ़ने के लिए अपनी राशि चुनें।
चरण नक्षत्र का एक चौथाई हिस्सा है, और नाम अक्षर वह अक्षर जिससे परंपरा में बच्चे का नाम शुरू होता है। निरयन राशिचक्र में हर राशि तीस अंश की होती है; गिनती मेष के 0° से शुरू होती है। सिर्फ़ जन्म की तारीख़ से राशि तय नहीं होती: चंद्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलते हैं, इसलिए समय और जगह भी चाहिए।
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| राशि | स्वामी | स्वभाव | नक्षत्र | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| मेष | मंगल | जिनके चंद्रमा मेष राशि में हों, वे फुर्तीले, साहसी और साफ़ बोलने वाले होते हैं। | अश्विनी, भरणी, कृत्तिका (चरण 1) | चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ |
| वृषभ | शुक्र | शांत, धैर्यवान और स्थिर स्वभाव के होते हैं। | कृत्तिका (चरण 2–4), रोहिणी, मृगशिरा (चरण 1–2) | ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो |
| मिथुन | बुध | जिज्ञासु, बातूनी और हाज़िरजवाब होते हैं। | मृगशिरा (चरण 3–4), आर्द्रा, पुनर्वसु (चरण 1–3) | का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा |
| कर्क | चंद्र | भावुक होते हैं और दूसरों का ख़याल रखते हैं। | पुनर्वसु (चरण 4), पुष्य, अश्लेषा | ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो |
| सिंह | सूर्य | स्वाभिमानी, उदार और दिलदार होते हैं। | मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1) | मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे |
| कन्या | बुध | सावधान, व्यावहारिक और मददगार होते हैं। | उत्तरा फाल्गुनी (चरण 2–4), हस्त, चित्रा (चरण 1–2) | टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो |
| तुला | शुक्र | मिलनसार, न्यायप्रिय और व्यवहार-कुशल होते हैं। | चित्रा (चरण 3–4), स्वाति, विशाखा (चरण 1–3) | रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते |
| वृश्चिक | मंगल | गहराई से महसूस करते हैं और बहुत कुछ मन में रखते हैं। | विशाखा (चरण 4), अनुराधा, ज्येष्ठा | तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू |
| धनु | गुरु | आशावादी, खुले दिल वाले और आज़ादी पसंद होते हैं। | मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा (चरण 1) | ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे |
| मकर | शनि | अनुशासित, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी होते हैं। | उत्तराषाढ़ा (चरण 2–4), श्रवण, धनिष्ठा (चरण 1–2) | भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी |
| कुंभ | शनि | विचारशील, स्वतंत्र और मानवता की परवाह करने वाले होते हैं। | धनिष्ठा (चरण 3–4), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद (चरण 1–3) | गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा |
| मीन | गुरु | दयालु, कल्पनाशील और आध्यात्मिक होते हैं। | पूर्वा भाद्रपद (चरण 4), उत्तरा भाद्रपद, रेवती | दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची |
शनि मीन में हैं। चंद्र राशि से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है; चौथे या आठवें में हों तो ढैय्या।
| राशि | अभी | साढ़े साती या ढैय्या कब ख़त्म | आगे |
|---|---|---|---|
| मेष | साढ़े साती, पहला दौर (शनि बारहवें भाव में) | 31 मई 2032 | कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक |
| वृषभ | कोई नहीं | — | साढ़े साती 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 13 जुलाई 2034 तक |
| मिथुन | कोई नहीं | — | साढ़े साती 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 27 अगस्त 2036 तक |
| कर्क | कोई नहीं | — | साढ़े साती 31 मई 2032 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक |
| सिंह | अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) | 23 फ़रवरी 2028 (बीच में 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे) | साढ़े साती 13 जुलाई 2034 से 28 जनवरी 2041 तक, फिर 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक |
| कन्या | कोई नहीं | — | अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक |
| तुला | कोई नहीं | — | अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक |
| वृश्चिक | कोई नहीं | — | अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक |
| धनु | कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) | 23 फ़रवरी 2028 (बीच में 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे) | अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक |
| मकर | कोई नहीं | — | कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक |
| कुंभ | साढ़े साती, आख़िरी दौर (शनि दूसरे भाव में) | 23 फ़रवरी 2028 (बीच में 3 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम, जब शनि मेष में होंगे) | कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक, फिर 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक |
| मीन | साढ़े साती, बीच का दौर (शनि पहले भाव में) | 17 अप्रैल 2030 (बीच में 8 अगस्त 2029 से 4 अक्टूबर 2029 तक विराम, जब शनि वृषभ में होंगे) | कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक |
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में थे। इसे तय करने के लिए जन्म की तारीख़, समय और जगह चाहिए।
बारह, हर एक तीस अंश की: मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन।
जन्म की तारीख़ से राशि एक या दो राशियों तक सिमट जाती है, क्योंकि चंद्रमा हर राशि में लगभग ढाई दिन रहते हैं। कई परिवार नाम राशि भी मानते हैं: वह राशि जिसके नाम अक्षर से व्यक्ति का नाम शुरू होता है, ऊपर की तालिका से। इससे नाम मिलान और मोटा राशिफल देखा जाता है, पर यह जन्म कुंडली की चंद्र राशि नहीं है।
नहीं। भारत में राशि का मतलब चंद्र राशि है। सूर्य राशि पश्चिमी राशिफल में चलती है, और लगभग बारह में से एक व्यक्ति की ही चंद्र राशि और सूर्य राशि एक होती है।
शनि मीन में हैं, इसलिए तीन राशियों पर: मेष (अभी पहला दौर; साढ़े साती 31 मई 2032 तक), कुंभ (अभी आख़िरी दौर; साढ़े साती 23 फ़रवरी 2028 तक) और मीन (अभी बीच का दौर; साढ़े साती 17 अप्रैल 2030 तक)।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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