बारह राशियों में आठवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 210°–240°
जन्म के समय चंद्रमा वृश्चिक में हों तो आपकी राशि वृश्चिक है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा वृश्चिक में हों, वे गहराई से महसूस करते हैं और बहुत कुछ मन में रखते हैं। इसके स्वामी मंगल हैं, नक्षत्र विशाखा (चरण 4), अनुराधा और ज्येष्ठा हैं, और परंपरा में वृश्चिक राशि के बच्चे का नाम तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी या यू अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर वृश्चिक राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ये दृढ़ निश्चयी, समझदार और भरोसे के लोगों के प्रति वफ़ादार होते हैं, और आसानी से हार नहीं मानते। यहाँ चंद्रमा नीच के होते हैं, इसलिए मन में शक आ सकता है या चोट देर तक चुभती है; मन की बात ईमानदारी से कह देना मदद करता है। वृश्चिक मंगल की राशि है, इसलिए ये शोध, चिकित्सा, जाँच-पड़ताल और संकट संभालने वाले कामों में अच्छे रहते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र वृश्चिक राशि में हों तो जातक बड़ी आँखों और चौड़ी छाती वाला होता है और सत्ता में बैठे लोग उसका आदर करते हैं। श्लोक बचपन में रोग और पिता और गुरुजनों से बिछोह की चेतावनी देता है। यह भी कहता है कि ऐसा जातक हमेशा सीधा-सरल नहीं होता और अपने दोष छिपाने का प्रयास करता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, वृश्चिक राशि और उसके स्वामी मंगल तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.8
वृश्चिक वालों को बताया गया भेद भेद ही रहता है, इसीलिए दोस्त और भाई-बहन अपनी वे परेशानियाँ इन्हें बताते हैं जो किसी और से नहीं कहते। स्थिर जल राशि में मंगल की दृढ़ता इन्हें लंबे, कठिन दौर झेलने की ताक़त देती है, जैसे महीनों बीमार माता या पिता की सेवा करना या प्रवेश परीक्षा दोबारा देना। जो काम दूसरे एक झटके के बाद छोड़ देते हैं, वृश्चिक वाले उसे अक्सर चुपचाप पूरा कर देते हैं।
वृश्चिक कालपुरुष की आठवीं राशि है, जो छिपी बातों का स्थान है; इसलिए ये तनाव चुपचाप ढोते रहते हैं, जब तक वह थकान या घर में किसी कड़वे बोल के रूप में बाहर न आ जाए। दफ़्तर की कोई पुरानी होड़ भी बेवजह बहुत ऊर्जा खा सकती है। हर हफ़्ते किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से मन की चिंता बाँट लेना, उसके बढ़ने से पहले, मन को भीतर ही भीतर घुटने नहीं देता।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
वृश्चिक के लिए चंद्र से दसवीं राशि सिंह है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, इसलिए परंपरा सरकार, प्रशासन और चिकित्सा की ओर देखती है। राशि के स्वामी मंगल सेना, सुरक्षा बल और सर्जरी जोड़ते हैं, इसलिए जाँच विभाग का सरकारी पद, चिकित्सक या सर्जन का काम, या रक्षा सेवा इस राशि के लिए ठीक बैठते हैं। सूर्य और मंगल स्वाभाविक मित्र हैं, इसलिए इस जोड़ में अधिकार और साहस एक ही दिशा में काम करते हैं।
चंद्र से सातवीं राशि वृषभ है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो शांत, स्थिर और आराम, परिवार और बसे हुए घर को प्रिय मानने वाला हो। वृश्चिक वाले तीव्र भावनाओं के होते हैं और ऐसा साथी धैर्यवान; सातवीं राशि भी वृश्चिक की तरह स्थिर है, इसलिए दोनों ओर निष्ठा भी गहरी होती है और ज़िद भी। दांपत्य में छोटी भूल को ढकने के बजाय जल्दी मान लेना वह भरोसा बनाता है जिसकी इस जोड़ी को ज़रूरत है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में वृश्चिक को गुप्तांगों से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और जल तत्त्व की राशि होने से शरीर के तरल पदार्थों और मन में दबी भावनाओं से। ऊपर का श्लोक बचपन के रोगों से सावधान करता है, इसलिए वृश्चिक राशि के बच्चे की सेहत पर ख़ास ध्यान देना अच्छा है। चूँकि यहाँ चंद्र नीच के होते हैं, परंपरा शांत मन को भी अच्छे स्वास्थ्य का हिस्सा मानती है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | वृश्चिक में अंश | वृश्चिक में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| विशाखा | गुरु | 0°–3°20′ | 4 | तो |
| अनुराधा | शनि | 3°20′–16°40′ | चारों | ना, नी, नू, ने |
| ज्येष्ठा | बुध | 16°40′–30° | चारों | नो, या, यी, यू |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर वृश्चिक राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.16
वृश्चिक बारह राशियों में आठवीं है, निरयन राशिचक्र के 210°–240°, और इसके स्वामी मंगल हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में वृश्चिक का सबसे अच्छा मेल सिंह से है (13.5/15, वृश्चिक को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी मंगल का मंत्र ॐ मंगलाय नमः, मंगलवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, वृश्चिक से पाँचवें भाव में। आगे पहले अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक; फिर साढ़े साती 28 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक, फिर 26 सितंबर 2041 से 6 मार्च 2049 तक, फिर 10 जुलाई 2049 से 4 दिसंबर 2049 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने जून और सितंबर हैं और सबसे कमज़ोर जनवरी, फ़रवरी और नवंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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