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बारह राशियों में आठवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 210°–240°

वृश्चिक राशि
चंद्र राशि · स्वामी मंगल

जन्म के समय चंद्रमा वृश्चिक में हों तो आपकी राशि वृश्चिक है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा वृश्चिक में हों, वे गहराई से महसूस करते हैं और बहुत कुछ मन में रखते हैं। इसके स्वामी मंगल हैं, नक्षत्र विशाखा (चरण 4), अनुराधा और ज्येष्ठा हैं, और परंपरा में वृश्चिक राशि के बच्चे का नाम तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी या यू अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में वृश्चिक राशि, बारह में आठवीं, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में वृश्चिक राशि, बारह में आठवीं, शनि मीन में चिह्नित

वृश्चिक राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर वृश्चिक राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीमंगल
आकृतिबिच्छू
तत्त्वजल
स्वभावस्थिर
विषम या समसम (मेष से दूसरी, चौथी, छठी… राशि): शास्त्र सम राशियों को स्त्री और सौम्य कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)गुप्तांग (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)कीट (कीड़ा)
शुभ अंक, रंग, दिन9, लाल, मंगलवार
देवताभगवान कार्तिकेय
यहाँ बली या निर्बल ग्रहचंद्र: नीच (सबसे निर्बल)

वृश्चिक राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ये दृढ़ निश्चयी, समझदार और भरोसे के लोगों के प्रति वफ़ादार होते हैं, और आसानी से हार नहीं मानते। यहाँ चंद्रमा नीच के होते हैं, इसलिए मन में शक आ सकता है या चोट देर तक चुभती है; मन की बात ईमानदारी से कह देना मदद करता है। वृश्चिक मंगल की राशि है, इसलिए ये शोध, चिकित्सा, जाँच-पड़ताल और संकट संभालने वाले कामों में अच्छे रहते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र वृश्चिक राशि में हों तो जातक बड़ी आँखों और चौड़ी छाती वाला होता है और सत्ता में बैठे लोग उसका आदर करते हैं। श्लोक बचपन में रोग और पिता और गुरुजनों से बिछोह की चेतावनी देता है। यह भी कहता है कि ऐसा जातक हमेशा सीधा-सरल नहीं होता और अपने दोष छिपाने का प्रयास करता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, वृश्चिक राशि और उसके स्वामी मंगल तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.8

ख़ूबियाँ

वृश्चिक वालों को बताया गया भेद भेद ही रहता है, इसीलिए दोस्त और भाई-बहन अपनी वे परेशानियाँ इन्हें बताते हैं जो किसी और से नहीं कहते। स्थिर जल राशि में मंगल की दृढ़ता इन्हें लंबे, कठिन दौर झेलने की ताक़त देती है, जैसे महीनों बीमार माता या पिता की सेवा करना या प्रवेश परीक्षा दोबारा देना। जो काम दूसरे एक झटके के बाद छोड़ देते हैं, वृश्चिक वाले उसे अक्सर चुपचाप पूरा कर देते हैं।

किन बातों का ध्यान रखें

वृश्चिक कालपुरुष की आठवीं राशि है, जो छिपी बातों का स्थान है; इसलिए ये तनाव चुपचाप ढोते रहते हैं, जब तक वह थकान या घर में किसी कड़वे बोल के रूप में बाहर न आ जाए। दफ़्तर की कोई पुरानी होड़ भी बेवजह बहुत ऊर्जा खा सकती है। हर हफ़्ते किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से मन की चिंता बाँट लेना, उसके बढ़ने से पहले, मन को भीतर ही भीतर घुटने नहीं देता।

वृश्चिक राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

वृश्चिक के लिए चंद्र से दसवीं राशि सिंह है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, इसलिए परंपरा सरकार, प्रशासन और चिकित्सा की ओर देखती है। राशि के स्वामी मंगल सेना, सुरक्षा बल और सर्जरी जोड़ते हैं, इसलिए जाँच विभाग का सरकारी पद, चिकित्सक या सर्जन का काम, या रक्षा सेवा इस राशि के लिए ठीक बैठते हैं। सूर्य और मंगल स्वाभाविक मित्र हैं, इसलिए इस जोड़ में अधिकार और साहस एक ही दिशा में काम करते हैं।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि वृषभ है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो शांत, स्थिर और आराम, परिवार और बसे हुए घर को प्रिय मानने वाला हो। वृश्चिक वाले तीव्र भावनाओं के होते हैं और ऐसा साथी धैर्यवान; सातवीं राशि भी वृश्चिक की तरह स्थिर है, इसलिए दोनों ओर निष्ठा भी गहरी होती है और ज़िद भी। दांपत्य में छोटी भूल को ढकने के बजाय जल्दी मान लेना वह भरोसा बनाता है जिसकी इस जोड़ी को ज़रूरत है।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में वृश्चिक को गुप्तांगों से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और जल तत्त्व की राशि होने से शरीर के तरल पदार्थों और मन में दबी भावनाओं से। ऊपर का श्लोक बचपन के रोगों से सावधान करता है, इसलिए वृश्चिक राशि के बच्चे की सेहत पर ख़ास ध्यान देना अच्छा है। चूँकि यहाँ चंद्र नीच के होते हैं, परंपरा शांत मन को भी अच्छे स्वास्थ्य का हिस्सा मानती है।

वृश्चिक राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीवृश्चिक में अंशवृश्चिक में चरणनाम अक्षर
विशाखागुरु0°–3°20′4तो
अनुराधाशनि3°20′–16°40′चारोंना, नी, नू, ने
ज्येष्ठाबुध16°40′–30°चारोंनो, या, यी, यू

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

वृश्चिक राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर वृश्चिक राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिअभी मीन में, चंद्र राशि से पाँचवें भाव में हैं, इसलिए न साढ़े साती है, न ढैय्या। आगे: अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक और साढ़े साती 28 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक, फिर 26 सितंबर 2041 से 6 मार्च 2049 तक, फिर 10 जुलाई 2049 से 4 दिसंबर 2049 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से नौवें भाव (पिता, भाग्य, धर्म और लंबी यात्राएँ) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) में, 25 जनवरी 2027 से फिर नौवें भाव में, 26 जून 2027 से फिर दसवें भाव में और 26 नवंबर 2027 से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से चौथे भाव (घर, माँ, वाहन, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से तीसरे भाव (साहस, छोटे भाई-बहन और छोटी यात्राएँ) में रहेंगे।

वृश्चिक राशिफल 2027: महीने दर महीने →

वृश्चिक राशि का उपाय: स्वामी मंगल

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • मंगल का मंत्र, मंगलवार को 108 बारॐ मंगलाय नमःवृश्चिक राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, साहस, ऊर्जा और ज़मीन-जायदाद के मामलों के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमःमंगल के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब वृश्चिक राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • भगवान कार्तिकेय की पूजावृश्चिक राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा साहस और विरोधियों पर जीत के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में वृश्चिक राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलवृश्चिक को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में वृश्चिक का सबसे ज़्यादा मेल सिंह से (13.5/15) और सबसे कम मिथुन से (2/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। तुला, कर्क और मिथुन के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। धनु, मीन और मेष के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)वृश्चिक कीट (कीड़ा) राशि है, जिस वर्ग में कोई और राशि नहीं, इसलिए वश्य, आपसी आकर्षण का कूट, वृश्चिक को पूरे 2 अंक सिर्फ़ वृश्चिक राशि वाले साथी के साथ देता है। बाक़ी हर राशि के साथ आधा अंक मिलता है।

हर राशि से वृश्चिक का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में वृश्चिक राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: लाल-भूरा
  • पतला और रोमयुक्त शरीर
  • बहुपद (बिच्छू की तरह कई पैरों वाली)
  • दिन में बली
  • शीर्षोदय (सिर से उदय होने वाली)
  • दिशा: उत्तर
  • बिलों में वास; जल और भूमि दोनों में विचरण
  • अत्यंत तीक्ष्ण
  • स्वामी: मंगल
  • स्थिर, स्त्री और सौम्य राशि
  • कफ प्रकृति

वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.16

आम सवाल

वृश्चिक राशि क्या है?

वृश्चिक बारह राशियों में आठवीं है, निरयन राशिचक्र के 210°–240°, और इसके स्वामी मंगल हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

वृश्चिक राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

वृश्चिक राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में वृश्चिक का सबसे अच्छा मेल सिंह से है (13.5/15, वृश्चिक को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

वृश्चिक राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी मंगल का मंत्र ॐ मंगलाय नमः, मंगलवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या वृश्चिक राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, वृश्चिक से पाँचवें भाव में। आगे पहले अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक; फिर साढ़े साती 28 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक, फिर 26 सितंबर 2041 से 6 मार्च 2049 तक, फिर 10 जुलाई 2049 से 4 दिसंबर 2049 तक।

वृश्चिक राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने जून और सितंबर हैं और सबसे कमज़ोर जनवरी, फ़रवरी और नवंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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