बारह राशियों में दूसरी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 30°–60°
जन्म के समय चंद्रमा वृषभ में हों तो आपकी राशि वृषभ है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा वृषभ में हों, वे शांत, धैर्यवान और स्थिर स्वभाव के होते हैं। इसके स्वामी शुक्र हैं, नक्षत्र कृत्तिका (चरण 2–4), रोहिणी और मृगशिरा (चरण 1–2) हैं, और परंपरा में वृषभ राशि के बच्चे का नाम ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे या वो अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर वृषभ राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
यहाँ चंद्रमा उच्च के होते हैं, इसलिए मन टिका रहता है: आराम, अच्छा खाना, परिवार और जोड़ा हुआ पैसा इन्हें प्रिय हैं, और एक बार साथ दें तो ये निभाते हैं। दूसरी तरफ़ ज़िद और बदलाव से परहेज़ भी है। वृषभ शुक्र की राशि है, और शुक्र सुंदरता और संगीत की समझ देते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र वृषभ राशि में हों तो जातक सुंदर, मनोहर चाल वाला, दानी, धैर्यवान, मधुर व्यवहार वाला और मित्रों से स्नेह रखने वाला होता है। श्लोक उसे प्रभाव और अधिकार, अच्छी भूख और मध्य आयु और बुढ़ापे में सुख देता है, और कहता है कि वह कष्ट सहने में समर्थ होता है। साथ ही कफ के रोगों की प्रवृत्ति बताता है और बंधु-बांधव, धन और संतान से बिछोह की चेतावनी देता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, वृषभ राशि और उसके स्वामी शुक्र तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.2
शुक्र राशि के स्वामी हैं, इसलिए वृषभ वालों को अच्छी चीज़ की परख होती है, चाहे शादी के लिए कपड़ा चुनना हो, घर बसाना हो या यह जानना हो कि किस दुकान पर ईमानदार दाम मिलता है। स्थिर और पृथ्वी तत्त्व की राशि होने से ये धीरे-धीरे बनाते हैं और जो बनाते हैं उसे सँभालकर रखते हैं: पारिवारिक कारोबार, सलीके से चलती रसोई, और ऐसा घर जहाँ त्योहारों पर रिश्तेदार बेझिझक आते हैं।
शुक्र का दिया आराम धीरे-धीरे अपनी जगह से न हिलने का बहाना बन सकता है, जैसे ऐसी नौकरी में टिके रहना जो अब ठीक वेतन नहीं देती, या आदतन सारी बचत किसी एक पुराने खाते में पड़ी रहने देना। साल में एक बार, धनतेरस या नए वित्त वर्ष के आसपास, परिवार के काग़ज़, बचत और बीमा लेकर बैठ जाना वृषभ की स्थिरता को सही काम में लगाता है।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
वृषभ के लिए चंद्र से दसवीं राशि कुंभ है, जिसके स्वामी शनि हैं; यह अनुशासन से धीरे-धीरे बनने वाले काम की ओर इशारा है: भूमि, इंजीनियरिंग, बड़ी संस्थाएँ और एक ही जगह लंबी सेवा। राशि के स्वामी शुक्र कला, आतिथ्य, सुंदर वस्तुओं और वाहनों में हुनर देते हैं, इसलिए वाहनों की दुकान, होटल या वस्त्र और सजावट का पारिवारिक व्यापार इस राशि के लिए ठीक बैठता है। ग्रहों की स्वाभाविक मित्रता में शुक्र और शनि आपस में मित्र हैं, इसलिए हुनर और अनुशासन एक ही काम में आसानी से साथ चलते हैं, जैसे वास्तुकला में या सलीके से चलने वाले पारिवारिक कारोबार में।
चंद्र से सातवीं राशि वृश्चिक है, जिसके स्वामी मंगल हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो गहराई से महसूस करे, पूरी निष्ठा से निभाए और जिसकी अपनी पक्की राय हो। वृश्चिक भी, वृषभ की तरह, स्थिर राशि है, इसलिए रिश्ता टिकाऊ होता है पर ज़िद भी दोनों ओर हो सकती है; छोटी बातों पर कोई न अड़े तो दांपत्य सुखी रहता है। राशि के स्वामी शुक्र विवाह के कारक भी हैं, इसलिए परंपरा सातवें भाव के साथ पूरी कुंडली में शुक्र का बल भी देखती है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में वृषभ को मुख से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और पृथ्वी तत्त्व की राशि होने से भारी और स्थिर शरीर से। ऊपर का श्लोक भी कफ की ओर झुकाव बताता है, इसलिए भोजन में संयम, और बरसात व जाड़े में सर्दी-खाँसी से बचाव ही परंपरा की सलाह है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | वृषभ में अंश | वृषभ में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| कृत्तिका | सूर्य | 0°–10° | 2–4 | ई, उ, ए |
| रोहिणी | चंद्र | 10°–23°20′ | चारों | ओ, वा, वी, वू |
| मृगशिरा | मंगल | 23°20′–30° | 1–2 | वे, वो |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर वृषभ राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.8
वृषभ बारह राशियों में दूसरी है, निरयन राशिचक्र के 30°–60°, और इसके स्वामी शुक्र हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में वृषभ का सबसे अच्छा मेल कुंभ से है (14/15, वृषभ को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी शुक्र का मंत्र ॐ शुक्राय नमः, शुक्रवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, वृषभ से ग्यारहवें भाव में। आगे पहले साढ़े साती 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 13 जुलाई 2034 तक; फिर कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 27 अगस्त 2036 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने नवंबर और दिसंबर हैं और सबसे कमज़ोर जून और अगस्त। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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