बारह राशियों में पाँचवीं · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 120°–150°
जन्म के समय चंद्रमा सिंह में हों तो आपकी राशि सिंह है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा सिंह में हों, वे स्वाभिमानी, उदार और दिलदार होते हैं। इसके स्वामी सूर्य हैं, नक्षत्र मघा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1) हैं, और परंपरा में सिंह राशि के बच्चे का नाम मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू या टे अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर सिंह राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
अगुवाई करना, सम्मान पाना और काम शान से करना इन्हें पसंद है; जो इन पर निर्भर हों, ये उनकी रक्षा करते हैं और खुलकर देते हैं। अहं और पहचान की चाह से इन्हें सलाह देना मुश्किल हो सकता है। सिंह सूर्य की राशि है, इसलिए ये अधिकार वाले पदों और सरकारी कामों में अच्छा करते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र सिंह राशि में हों तो जातक दानी, युद्ध में निडर, अपने सिद्धांतों पर अडिग, स्वाभिमानी और माता का भक्त होता है। वह जल्दी क्रोधित होता है, छोटी बातों पर देर तक रूठा रहता है और उसे वन तथा पर्वत प्रिय होते हैं। श्लोक भूख-प्यास, पेट और दाँत के कष्ट और मानसिक चिंता से सावधान करता है, और उसका जबड़ा भारी, चेहरा चौड़ा और आँखें भूरी बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, सिंह राशि और उसके स्वामी सूर्य तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.5
पिता और राजकाज के कारक सूर्य सिंह वालों को कुल की मर्यादा का बोध देते हैं, इसलिए ज़मीन-जायदाद का मामला न्याय से निपटाना हो या अफ़सरों के सामने घर की बात रखनी हो, अक्सर यही आगे आते हैं। स्थिर अग्नि राशि होने से इनका संकल्प टिकता है: दफ़्तर में या मोहल्ले में कोई काम हाथ में लें तो उसे अंजाम तक पहुँचाते हैं। सबके सामने दिया गया सिंह वालों का वचन लोग भरोसे लायक़ मानते हैं।
दिखावे के लिए किया गया ख़र्च सिंह वालों को महँगा पड़ सकता है, चाहे हैसियत से बढ़कर की गई शादी हो या रौब जमाने के लिए दिया गया महँगा उपहार। हर ज़िम्मेदारी अकेले उठाना इस बलवान राशि को भी थका देता है। बड़े पारिवारिक आयोजन से पहले ख़र्च की सीमा तय कर लेना और एक काम घर के किसी छोटे सदस्य को सौंप देना जेब और ऊर्जा, दोनों को बचाए रखता है।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
सिंह के लिए चंद्र से दसवीं राशि वृषभ है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, इसलिए परंपरा कला, आतिथ्य, सुंदर वस्तुओं, वाहनों और चीज़ों को सँवारने वाले कामों की ओर देखती है। राशि के स्वामी सूर्य सरकार, प्रशासन और चिकित्सा जोड़ते हैं, इसलिए सरकारी विभाग का पद, अस्पताल का प्रबंधन या वस्त्र और आतिथ्य का पारिवारिक व्यापार इस राशि के लिए ठीक बैठता है। जहाँ ज़िम्मेदारी इन्हें सौंपी जाए और इन पर भरोसा किया जाए, वहाँ सिंह वाले सबसे अच्छा काम करते हैं।
चंद्र से सातवीं राशि कुंभ है, जिसके स्वामी शनि हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो गंभीर, स्थिर और कर्तव्य को दिल से निभाने वाला हो। कुंभ भी, सिंह की तरह, स्थिर राशि है, इसलिए दोनों अपनी बात पर टिके रहते हैं; सिंह वाले साथी को अपनी जगह दें और साथी उन्हें वह सम्मान दे जो उन्हें प्रिय है, तो दांपत्य सुखी रहता है। छोटी अनबन को उसी दिन सुलझा लेना, ताकि वह गाँठ न बन जाए, घर में अपनापन बनाए रखता है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में सिंह को उदर, यानी पेट, से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और अग्नि तत्त्व की राशि होने से शरीर की गर्मी से। ऊपर का श्लोक भी पेट और दाँतों से सावधान करता है, इसलिए समय पर भोजन करें, भरपूर पानी पिएँ और दाँतों की देखभाल करें; परंपरा यही सलाह देती है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | सिंह में अंश | सिंह में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| मघा | केतु | 0°–13°20′ | चारों | मा, मी, मू, मे |
| पूर्वा फाल्गुनी | शुक्र | 13°20′–26°40′ | चारों | मो, टा, टी, टू |
| उत्तरा फाल्गुनी | सूर्य | 26°40′–30° | 1 | टे |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर सिंह राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.12
सिंह बारह राशियों में पाँचवीं है, निरयन राशिचक्र के 120°–150°, और इसके स्वामी सूर्य हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में सिंह का सबसे अच्छा मेल मिथुन और वृश्चिक से है (12.5/15, सिंह को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी सूर्य का मंत्र ॐ सूर्याय नमः, रविवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
हाँ: अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 23 फ़रवरी 2028 तक। बीच में 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक शनि मेष (आपके नौवें भाव) में रहेंगे और ढैय्या नहीं रहेगी। इसके बाद: साढ़े साती 13 जुलाई 2034 से 28 जनवरी 2041 तक, फिर 6 फ़रवरी 2041 से 26 सितंबर 2041 तक। शनि मीन में हैं, सिंह से आठवें भाव में।
2027 में सबसे अच्छे महीने सितंबर और दिसंबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी और मार्च। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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