बारह राशियों में पहली · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 0°–30°
जन्म के समय चंद्रमा मेष में हों तो आपकी राशि मेष है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मेष राशि में हों, वे फुर्तीले, साहसी और साफ़ बोलने वाले होते हैं। इसके स्वामी मंगल हैं, नक्षत्र अश्विनी, भरणी और कृत्तिका (चरण 1) हैं, और परंपरा में मेष राशि के बच्चे का नाम चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो या अ अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर मेष राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ऐसे लोग काम जोश से शुरू करते हैं, मन की बात कह देते हैं और इंतज़ार पसंद नहीं करते; इसी आग से ग़ुस्सा जल्दी आता है, पर उतनी ही जल्दी उतर भी जाता है। मेष मंगल की राशि है, इसलिए सामने साफ़ लक्ष्य हो तो ये सबसे अच्छा काम करते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मेष राशि में हों तो जातक क्रोध के बाद जल्दी मान जाने वाला, यात्रा का प्रेमी, साहसी (शूर) और सेवा का मर्म जानने वाला होता है। उसे साग-सब्ज़ी और गरम भोजन प्रिय होता है, पर वह संयम से खाता है, और प्रायः भाइयों में सबसे बड़ा होता है। श्लोक यह भी कहता है कि उसका मन चंचल रहता है, स्वभाव में अभिमान होता है, धन अधिक समय नहीं टिकता और जल से उसे भय रहता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मेष राशि और उसके स्वामी मंगल तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.1
मंगल का साहस और चर राशि की फुर्ती मेष वालों को वह व्यक्ति बनाते हैं जो मुसीबत में सबसे पहले आगे बढ़ता है, चाहे आधी रात को किसी को अस्पताल ले जाना हो या दफ़्तर का अटका हुआ काम निकलवाना हो। मंगल भाई-बहनों के कारक भी हैं, इसलिए घर में अक्सर मेष वाले ही वह भाई या बहन होते हैं जिन पर बाक़ी सब भरोसा करते हैं।
मेष वाले शुरुआत अच्छी करते हैं, पर किसी योजना के धीमे, लंबे बीच के दौर में थक सकते हैं, चाहे वह घर का क़र्ज़ चुकाना हो, कोई पढ़ाई हो या नया कारोबार। राशि के स्वामी मंगल वेग, अग्नि और धारदार औज़ारों के कारक हैं, इसलिए सड़क पर और रसोई में थोड़ी अधिक सावधानी अच्छी रहती है। एक आदत काम आती है: कुछ नया हाथ में लेने से पहले कोई एक अधूरा काम पूरा कर लें या किसी को सौंप दें।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
मेष के लिए चंद्र से दसवीं राशि मकर है, जिसके स्वामी शनि हैं, इसलिए परंपरा ऐसे काम की ओर देखती है जिसमें लगातार मेहनत का फल मिले: इंजीनियरिंग, निर्माण, भूमि और मकान, या नियम-क़ायदों वाली स्थायी सरकारी नौकरी। राशि के स्वामी मंगल वर्दी वाली सेवा, सेना, सुरक्षा बल और खेल में भी रुचि जगाते हैं। मेष की तेज़ शुरुआत को काम में शनि जैसा धैर्य मिल जाए तो वह टिकती है।
चंद्र से सातवीं राशि तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, और परंपरा जीवनसाथी का स्वभाव इसी से देखती है: शिष्टाचार, संतुलन और सँवरे हुए घर को महत्व देने वाला साथी। ऐसा साथी दोनों पक्ष तौलकर चलता है, इसलिए जोशीले, सीधी बात कहने वाले मेष वाले फ़ैसले से पहले रुककर सुन लें तो दांपत्य सहज रहता है। घर की छोटी अनबन जल्दी निपट जाती है, बशर्ते कोई पुरानी बातें गिनता न रहे।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में मेष को पहले अंग, सिर, से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और अग्नि तत्त्व की राशि होने से शरीर की गर्मी से। इसलिए सिर और नींद का ध्यान रखें, ख़ासकर जब काम का दबाव हो और भोजन छूटने लगे। तपते महीनों में समय पर भोजन और भरपूर पानी शरीर को ठंडा रखते हैं।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | मेष में अंश | मेष में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| अश्विनी | केतु | 0°–13°20′ | चारों | चू, चे, चो, ला |
| भरणी | शुक्र | 13°20′–26°40′ | चारों | ली, लू, ले, लो |
| कृत्तिका | सूर्य | 26°40′–30° | 1 | अ |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मेष राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.6–7
मेष बारह राशियों में पहली है, निरयन राशिचक्र के 0°–30°, और इसके स्वामी मंगल हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मेष का सबसे अच्छा मेल कर्क और तुला से है (12/15, मेष को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी मंगल का मंत्र ॐ मंगलाय नमः, मंगलवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
हाँ: साढ़े साती 31 मई 2032 तक चलेगी। अभी पहला दौर है, शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में, 3 जून 2027 तक। इसके बाद: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक। शनि मीन में हैं, मेष से बारहवें भाव में।
2027 में सबसे अच्छे महीने जनवरी, सितंबर और नवंबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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