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बारह राशियों में पहली · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 0°–30°

मेष राशि
चंद्र राशि · स्वामी मंगल

जन्म के समय चंद्रमा मेष में हों तो आपकी राशि मेष है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा मेष राशि में हों, वे फुर्तीले, साहसी और साफ़ बोलने वाले होते हैं। इसके स्वामी मंगल हैं, नक्षत्र अश्विनी, भरणी और कृत्तिका (चरण 1) हैं, और परंपरा में मेष राशि के बच्चे का नाम चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो या अ अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में मेष राशि, बारह में पहली, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में मेष राशि, बारह में पहली, शनि मीन में चिह्नित

मेष राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर मेष राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीमंगल
आकृतिमेढ़ा
तत्त्वअग्नि
स्वभावचर (गतिशील)
विषम या समविषम (मेष से पहली, तीसरी, पाँचवीं… राशि): शास्त्र विषम राशियों को पुरुष और क्रूर कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)सिर (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)चतुष्पद (चौपाया)
शुभ अंक, रंग, दिन9, लाल, मंगलवार
देवताभगवान हनुमान
यहाँ बली या निर्बल ग्रहसूर्य: उच्च (सबसे बली)
शनि: नीच (सबसे निर्बल)
मंगल: मूलत्रिकोण में (राशि का वह हिस्सा जहाँ ग्रह बहुत सहज रहते हैं; बल में इसका दर्जा उच्च के ठीक बाद आता है)

मेष राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग काम जोश से शुरू करते हैं, मन की बात कह देते हैं और इंतज़ार पसंद नहीं करते; इसी आग से ग़ुस्सा जल्दी आता है, पर उतनी ही जल्दी उतर भी जाता है। मेष मंगल की राशि है, इसलिए सामने साफ़ लक्ष्य हो तो ये सबसे अच्छा काम करते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र मेष राशि में हों तो जातक क्रोध के बाद जल्दी मान जाने वाला, यात्रा का प्रेमी, साहसी (शूर) और सेवा का मर्म जानने वाला होता है। उसे साग-सब्ज़ी और गरम भोजन प्रिय होता है, पर वह संयम से खाता है, और प्रायः भाइयों में सबसे बड़ा होता है। श्लोक यह भी कहता है कि उसका मन चंचल रहता है, स्वभाव में अभिमान होता है, धन अधिक समय नहीं टिकता और जल से उसे भय रहता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, मेष राशि और उसके स्वामी मंगल तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.1

ख़ूबियाँ

मंगल का साहस और चर राशि की फुर्ती मेष वालों को वह व्यक्ति बनाते हैं जो मुसीबत में सबसे पहले आगे बढ़ता है, चाहे आधी रात को किसी को अस्पताल ले जाना हो या दफ़्तर का अटका हुआ काम निकलवाना हो। मंगल भाई-बहनों के कारक भी हैं, इसलिए घर में अक्सर मेष वाले ही वह भाई या बहन होते हैं जिन पर बाक़ी सब भरोसा करते हैं।

किन बातों का ध्यान रखें

मेष वाले शुरुआत अच्छी करते हैं, पर किसी योजना के धीमे, लंबे बीच के दौर में थक सकते हैं, चाहे वह घर का क़र्ज़ चुकाना हो, कोई पढ़ाई हो या नया कारोबार। राशि के स्वामी मंगल वेग, अग्नि और धारदार औज़ारों के कारक हैं, इसलिए सड़क पर और रसोई में थोड़ी अधिक सावधानी अच्छी रहती है। एक आदत काम आती है: कुछ नया हाथ में लेने से पहले कोई एक अधूरा काम पूरा कर लें या किसी को सौंप दें।

मेष राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

मेष के लिए चंद्र से दसवीं राशि मकर है, जिसके स्वामी शनि हैं, इसलिए परंपरा ऐसे काम की ओर देखती है जिसमें लगातार मेहनत का फल मिले: इंजीनियरिंग, निर्माण, भूमि और मकान, या नियम-क़ायदों वाली स्थायी सरकारी नौकरी। राशि के स्वामी मंगल वर्दी वाली सेवा, सेना, सुरक्षा बल और खेल में भी रुचि जगाते हैं। मेष की तेज़ शुरुआत को काम में शनि जैसा धैर्य मिल जाए तो वह टिकती है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, और परंपरा जीवनसाथी का स्वभाव इसी से देखती है: शिष्टाचार, संतुलन और सँवरे हुए घर को महत्व देने वाला साथी। ऐसा साथी दोनों पक्ष तौलकर चलता है, इसलिए जोशीले, सीधी बात कहने वाले मेष वाले फ़ैसले से पहले रुककर सुन लें तो दांपत्य सहज रहता है। घर की छोटी अनबन जल्दी निपट जाती है, बशर्ते कोई पुरानी बातें गिनता न रहे।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में मेष को पहले अंग, सिर, से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और अग्नि तत्त्व की राशि होने से शरीर की गर्मी से। इसलिए सिर और नींद का ध्यान रखें, ख़ासकर जब काम का दबाव हो और भोजन छूटने लगे। तपते महीनों में समय पर भोजन और भरपूर पानी शरीर को ठंडा रखते हैं।

मेष राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीमेष में अंशमेष में चरणनाम अक्षर
अश्विनीकेतु0°–13°20′चारोंचू, चे, चो, ला
भरणीशुक्र13°20′–26°40′चारोंली, लू, ले, लो
कृत्तिकासूर्य26°40′–30°1अ

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

मेष राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर मेष राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिमेष राशि पर साढ़े साती 31 मई 2032 तक चलेगी। इस समय पहला दौर है, शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में, 3 जून 2027 तक। शनि हर साल लगभग साढ़े चार महीने वक्री (उल्टी चाल में) रहते हैं, इसलिए राशि की सीमा के पास वे आगे-पीछे आते-जाते हैं, और दौर ऐसे चलेंगे:
    · 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक बीच का दौर
    · 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक फिर पहला दौर
    · 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक फिर बीच का दौर
    · 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक आख़िरी दौर
    · 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक फिर बीच का दौर
    · 17 अप्रैल 2030 से 31 मई 2032 तक फिर आख़िरी दौर
    उसके बाद कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से चौथे भाव (घर, माँ, वाहन, ज़मीन-जायदाद और मन की शांति) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) में, 25 जनवरी 2027 से फिर चौथे भाव में, 26 जून 2027 से फिर पाँचवें भाव में और 26 नवंबर 2027 से छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से दसवें भाव (काम-काज, पद और बड़ों से व्यवहार) में रहेंगे।

मेष राशिफल 2027: महीने दर महीने →

मेष राशि का उपाय: स्वामी मंगल

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • मंगल का मंत्र, मंगलवार को 108 बारॐ मंगलाय नमःमेष राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, साहस, ऊर्जा और ज़मीन-जायदाद के मामलों के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमःमंगल के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब मेष राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • भगवान हनुमान की पूजामेष राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा साहस और कठिन समय में बल के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में मेष राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलमेष को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में मेष का सबसे ज़्यादा मेल कर्क और तुला से (12/15) और सबसे कम कन्या से (2.5/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। वृषभ और कन्या के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। मीन, सिंह, धनु और वृश्चिक के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)मेष चतुष्पद (चौपाया) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में मेष को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि मेष, वृषभ या मकर (पहला आधा) हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: धनु के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो मेष को 2 अंक मिलते हैं और मकर के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो मेष को 1 अंक मिलता है।

हर राशि से मेष का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में मेष राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: रक्त जैसा लाल
  • बड़ा शरीर
  • चतुष्पद (चार पैरों वाली)
  • रात्रि में बली
  • दिशा: पूर्व
  • पर्वतों में विचरण करने वाली
  • रजोगुणी
  • पृष्ठोदय (पीठ से उदय होने वाली)
  • अग्नि तत्त्व
  • स्वामी: मंगल
  • चर, पुरुष और क्रूर राशि
  • पित्त प्रकृति

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.6–7

आम सवाल

मेष राशि क्या है?

मेष बारह राशियों में पहली है, निरयन राशिचक्र के 0°–30°, और इसके स्वामी मंगल हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

मेष राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

मेष राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में मेष का सबसे अच्छा मेल कर्क और तुला से है (12/15, मेष को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

मेष राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी मंगल का मंत्र ॐ मंगलाय नमः, मंगलवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या मेष राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

हाँ: साढ़े साती 31 मई 2032 तक चलेगी। अभी पहला दौर है, शनि चंद्र राशि से बारहवें भाव में, 3 जून 2027 तक। इसके बाद: कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक। शनि मीन में हैं, मेष से बारहवें भाव में।

मेष राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने जनवरी, सितंबर और नवंबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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