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बारह राशियों में छठी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 150°–180°

कन्या राशि
चंद्र राशि · स्वामी बुध

जन्म के समय चंद्रमा कन्या में हों तो आपकी राशि कन्या है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा कन्या में हों, वे सावधान, व्यावहारिक और मददगार होते हैं। इसके स्वामी बुध हैं, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (चरण 2–4), हस्त और चित्रा (चरण 1–2) हैं, और परंपरा में कन्या राशि के बच्चे का नाम टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे या पो अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में कन्या राशि, बारह में छठी, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में कन्या राशि, बारह में छठी, शनि मीन में चिह्नित

कन्या राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर कन्या राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीबुध
आकृतिनाव में बैठी कन्या, हाथ में अनाज और अग्नि
तत्त्वपृथ्वी
स्वभावद्विस्वभाव (चर और स्थिर के बीच, दोनों गुणों वाली)
विषम या समसम (मेष से दूसरी, चौथी, छठी… राशि): शास्त्र सम राशियों को स्त्री और सौम्य कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)कमर और नाभि (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)मानव (मनुष्य)
शुभ अंक, रंग, दिन5, हरा, बुधवार
देवताभगवान गणेश
यहाँ बली या निर्बल ग्रहबुध: उच्च (सबसे बली) और मूलत्रिकोण में (राशि का वह हिस्सा जहाँ ग्रह बहुत सहज रहते हैं; बल में इसका दर्जा उच्च के ठीक बाद आता है)
शुक्र: नीच (सबसे निर्बल)

कन्या राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

ऐसे लोग दूसरों से छूटी बारीकियाँ देख लेते हैं, सलीका पसंद करते हैं और बात के पक्के होते हैं; सेहत, काम और सेवा इनके लिए अहम हैं। यही बारीक नज़र कभी चिंता और कमियाँ निकालने में बदल जाती है। कन्या बुध की राशि है, इसलिए ये हिसाब-किताब, चिकित्सा, विश्लेषण और पढ़ाने में अच्छे रहते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र कन्या राशि में हों तो जातक लज्जाशील, सत्यवादी, धर्मात्मा और बुद्धिमान होता है, उसकी आँखें कोमल और चाल सुंदर होती है। वह नृत्य, संगीत और चित्रकला में निपुण, शास्त्रों का जानकार और मधुरभाषी होता है, और सुख से रहता है। श्लोक यह भी कहता है कि वह परदेस में रह सकता है और दूसरों के घर और संपत्ति का सुख भोगता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, कन्या राशि और उसके स्वामी बुध तीनों बली हों।

बृहत् जातक 17.6

ख़ूबियाँ

कन्या बुध की अपनी राशि है और यहीं वे उच्च के होते हैं; यह ऐसे मन में दिखता है जो बारीक शर्तें भी पढ़ लेता है: किराये के क़रार में छिपी कोई बात, अस्पताल के हिसाब में जुड़ा फ़ालतू ख़र्च, या वह क़दम जो बाक़ी सब भूल गए। द्विस्वभाव पृथ्वी राशि होने से कन्या वाले दो भूमिकाएँ साथ-साथ निभा लेते हैं: दफ़्तर का पूरा दिन भी, और समय पर चलता घर भी।

किन बातों का ध्यान रखें

किसी को समझाने से ज़्यादा आसान इन्हें ख़ुद कर देना लगता है, इसलिए कन्या वाले अक्सर दूसरों के हिस्से का काम भी कर देते हैं, और यह बोझ धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। श्रेय या उचित वेतन-वृद्धि माँगना भी इन्हें सहज नहीं लगता, इसलिए अच्छी मेहनत अनदेखी रह सकती है। हर महीने किए गए काम लिख लेना और फ़ैसला करने वाले से एक बार साफ़ कह देना चुपचाप काम करने वाले को उसका हक़ दिलाता है।

कन्या राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

कन्या के लिए चंद्र से दसवीं राशि मिथुन है, और दोनों राशियों के स्वामी बुध हैं, इसलिए बुध के कामों को दोहरा बल मिलता है: व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और आईटी। लेखा विभाग, बैंक की नौकरी, आँकड़ों का काम या साफ़ हिसाब पर चलने वाली परिवार की दुकान, सब इस राशि के लिए ठीक रहते हैं। दूसरे शहर या परदेस की नौकरी भी इनके लिए अनजानी बात नहीं, जैसा ऊपर का श्लोक संकेत देता है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि मीन है, जिसके स्वामी गुरु हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो दयालु, क्षमाशील और धर्म या कला की ओर झुका हो। कन्या वाले सावधान और सटीक होते हैं और ऐसा साथी भावुक और उदार; कन्या वालों की बारीक नज़र मदद में लगे और टोका-टाकी नरम रहे तो दांपत्य फलता-फूलता है। घर में टोकने से ज़्यादा असर खुलकर की गई तारीफ़ का होता है।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में कन्या को कमर और नाभि के भाग से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और पृथ्वी तत्त्व की राशि होने से दिनचर्या और पाचन से। जो बारीक नज़र नौकरी में फ़ायदा देती है, वही कभी सेहत की चिंता बन जाती है, इसलिए भोजन और टहलने की तय दिनचर्या बार-बार की चिंता से अधिक लाभ देती है।

कन्या राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीकन्या में अंशकन्या में चरणनाम अक्षर
उत्तरा फाल्गुनीसूर्य0°–10°2–4टो, पा, पी
हस्तचंद्र10°–23°20′चारोंपू, ष, ण, ठ
चित्रामंगल23°20′–30°1–2पे, पो

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

कन्या राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर कन्या राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिअभी मीन में, चंद्र राशि से सातवें भाव में हैं, इसलिए न साढ़े साती है, न ढैय्या। आगे: अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक और साढ़े साती 27 अगस्त 2036 से 11 दिसंबर 2043 तक, फिर 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव (आमदनी, लाभ और बड़े भाई-बहन) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से बारहवें भाव (ख़र्च, नींद, विदेश यात्रा और त्याग) में, 25 जनवरी 2027 से फिर ग्यारहवें भाव में, 26 जून 2027 से फिर बारहवें भाव में और 26 नवंबर 2027 से पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से छठे भाव (दबाव वाला काम, विरोधी, क़र्ज़ और बीमारी) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से पाँचवें भाव (संतान, पढ़ाई और समझ-बूझ) में रहेंगे।

कन्या राशिफल 2027: महीने दर महीने →

कन्या राशि का उपाय: स्वामी बुध

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • बुध का मंत्र, बुधवार को 108 बारॐ बुधाय नमःकन्या राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, साफ़ बोलचाल, पढ़ाई और व्यापार के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमःबुध के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब कन्या राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • भगवान गणेश की पूजाकन्या राशि से परंपरा में जुड़े देवता, जिनकी पूजा विघ्न दूर करने और काम की अच्छी शुरुआत के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में कन्या राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलकन्या को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में कन्या का सबसे ज़्यादा मेल मिथुन से (15/15) और सबसे कम मेष से (1.5/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। सिंह, मकर, कुंभ और मेष के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। तुला और वृषभ के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)कन्या मानव (मनुष्य) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में कन्या को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि कन्या, मिथुन, तुला, धनु (पहला आधा) या कुंभ हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: धनु के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो कन्या को 1 अंक मिलता है।

हर राशि से कन्या का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में कन्या राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: चित्र-विचित्र (कई रंगों वाला)
  • मध्यम शरीर
  • स्वरूप: हाथों में अन्न और अग्नि लिए कन्या
  • द्विपद (दो पैरों वाली)
  • दिन में बली
  • दिशा: दक्षिण
  • पर्वतों में विचरण करने वाली
  • तमोगुणी
  • शीर्षोदय (सिर से उदय होने वाली)
  • स्वामी: बुध
  • द्विस्वभाव, स्त्री और सौम्य राशि
  • वात प्रकृति

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.13–14

आम सवाल

कन्या राशि क्या है?

कन्या बारह राशियों में छठी है, निरयन राशिचक्र के 150°–180°, और इसके स्वामी बुध हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

कन्या राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

कन्या राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में कन्या का सबसे अच्छा मेल मिथुन से है (15/15, कन्या को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

कन्या राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी बुध का मंत्र ॐ बुधाय नमः, बुधवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या कन्या राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, कन्या से सातवें भाव में। आगे पहले अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक; फिर साढ़े साती 27 अगस्त 2036 से 11 दिसंबर 2043 तक, फिर 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक।

कन्या राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने अप्रैल और मई हैं और सबसे कमज़ोर जुलाई और अगस्त। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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