बारह राशियों में छठी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 150°–180°
जन्म के समय चंद्रमा कन्या में हों तो आपकी राशि कन्या है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा कन्या में हों, वे सावधान, व्यावहारिक और मददगार होते हैं। इसके स्वामी बुध हैं, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (चरण 2–4), हस्त और चित्रा (चरण 1–2) हैं, और परंपरा में कन्या राशि के बच्चे का नाम टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे या पो अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर कन्या राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
ऐसे लोग दूसरों से छूटी बारीकियाँ देख लेते हैं, सलीका पसंद करते हैं और बात के पक्के होते हैं; सेहत, काम और सेवा इनके लिए अहम हैं। यही बारीक नज़र कभी चिंता और कमियाँ निकालने में बदल जाती है। कन्या बुध की राशि है, इसलिए ये हिसाब-किताब, चिकित्सा, विश्लेषण और पढ़ाने में अच्छे रहते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र कन्या राशि में हों तो जातक लज्जाशील, सत्यवादी, धर्मात्मा और बुद्धिमान होता है, उसकी आँखें कोमल और चाल सुंदर होती है। वह नृत्य, संगीत और चित्रकला में निपुण, शास्त्रों का जानकार और मधुरभाषी होता है, और सुख से रहता है। श्लोक यह भी कहता है कि वह परदेस में रह सकता है और दूसरों के घर और संपत्ति का सुख भोगता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा, कन्या राशि और उसके स्वामी बुध तीनों बली हों।
बृहत् जातक 17.6
कन्या बुध की अपनी राशि है और यहीं वे उच्च के होते हैं; यह ऐसे मन में दिखता है जो बारीक शर्तें भी पढ़ लेता है: किराये के क़रार में छिपी कोई बात, अस्पताल के हिसाब में जुड़ा फ़ालतू ख़र्च, या वह क़दम जो बाक़ी सब भूल गए। द्विस्वभाव पृथ्वी राशि होने से कन्या वाले दो भूमिकाएँ साथ-साथ निभा लेते हैं: दफ़्तर का पूरा दिन भी, और समय पर चलता घर भी।
किसी को समझाने से ज़्यादा आसान इन्हें ख़ुद कर देना लगता है, इसलिए कन्या वाले अक्सर दूसरों के हिस्से का काम भी कर देते हैं, और यह बोझ धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। श्रेय या उचित वेतन-वृद्धि माँगना भी इन्हें सहज नहीं लगता, इसलिए अच्छी मेहनत अनदेखी रह सकती है। हर महीने किए गए काम लिख लेना और फ़ैसला करने वाले से एक बार साफ़ कह देना चुपचाप काम करने वाले को उसका हक़ दिलाता है।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
कन्या के लिए चंद्र से दसवीं राशि मिथुन है, और दोनों राशियों के स्वामी बुध हैं, इसलिए बुध के कामों को दोहरा बल मिलता है: व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब और आईटी। लेखा विभाग, बैंक की नौकरी, आँकड़ों का काम या साफ़ हिसाब पर चलने वाली परिवार की दुकान, सब इस राशि के लिए ठीक रहते हैं। दूसरे शहर या परदेस की नौकरी भी इनके लिए अनजानी बात नहीं, जैसा ऊपर का श्लोक संकेत देता है।
चंद्र से सातवीं राशि मीन है, जिसके स्वामी गुरु हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो दयालु, क्षमाशील और धर्म या कला की ओर झुका हो। कन्या वाले सावधान और सटीक होते हैं और ऐसा साथी भावुक और उदार; कन्या वालों की बारीक नज़र मदद में लगे और टोका-टाकी नरम रहे तो दांपत्य फलता-फूलता है। घर में टोकने से ज़्यादा असर खुलकर की गई तारीफ़ का होता है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में कन्या को कमर और नाभि के भाग से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और पृथ्वी तत्त्व की राशि होने से दिनचर्या और पाचन से। जो बारीक नज़र नौकरी में फ़ायदा देती है, वही कभी सेहत की चिंता बन जाती है, इसलिए भोजन और टहलने की तय दिनचर्या बार-बार की चिंता से अधिक लाभ देती है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | कन्या में अंश | कन्या में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| उत्तरा फाल्गुनी | सूर्य | 0°–10° | 2–4 | टो, पा, पी |
| हस्त | चंद्र | 10°–23°20′ | चारों | पू, ष, ण, ठ |
| चित्रा | मंगल | 23°20′–30° | 1–2 | पे, पो |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर कन्या राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.13–14
कन्या बारह राशियों में छठी है, निरयन राशिचक्र के 150°–180°, और इसके स्वामी बुध हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में कन्या का सबसे अच्छा मेल मिथुन से है (15/15, कन्या को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी बुध का मंत्र ॐ बुधाय नमः, बुधवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, कन्या से सातवें भाव में। आगे पहले अष्टम शनि (ढैय्या, शनि आठवें भाव में) 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक, फिर 23 फ़रवरी 2028 से 8 अगस्त 2029 तक, फिर 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक; फिर साढ़े साती 27 अगस्त 2036 से 11 दिसंबर 2043 तक, फिर 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने अप्रैल और मई हैं और सबसे कमज़ोर जुलाई और अगस्त। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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