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बारह राशियों में चौथी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 90°–120°

कर्क राशि
चंद्र राशि · स्वामी चंद्र

जन्म के समय चंद्रमा कर्क में हों तो आपकी राशि कर्क है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा कर्क में हों, वे भावुक होते हैं और दूसरों का ख़याल रखते हैं। इसके स्वामी चंद्र हैं, नक्षत्र पुनर्वसु (चरण 4), पुष्य और अश्लेषा हैं, और परंपरा में कर्क राशि के बच्चे का नाम ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे या डो अक्षर से रखा जाता है।

राशि चक्र में कर्क राशि, बारह में चौथी, शनि मीन में चिह्नितराशि चक्र में कर्क राशि, बारह में चौथी, शनि मीन में चिह्नित

कर्क राशि एक नज़र में

राशि की अपनी बातें, जो हर कर्क राशि वाले के लिए एक-सी हैं।

स्वामीचंद्र
आकृतिकेकड़ा
तत्त्वजल
स्वभावचर (गतिशील)
विषम या समसम (मेष से दूसरी, चौथी, छठी… राशि): शास्त्र सम राशियों को स्त्री और सौम्य कहते हैं; यह नाम भर है, स्वभाव पर फ़ैसला नहीं
कालपुरुष में (पूरा राशिचक्र एक शरीर के रूप में)हृदय (बृहत् जातक 1.4)
वश्य (मिलान में आपसी आकर्षण का वर्ग)जलचर (जल में रहने वाला)
शुभ अंक, रंग, दिन2, सफ़ेद, सोमवार
देवीपार्वती जी
यहाँ बली या निर्बल ग्रहगुरु: उच्च (सबसे बली)
मंगल: नीच (सबसे निर्बल)

कर्क राशि वालों का स्वभाव

चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।

यह चंद्रमा की अपनी राशि है, इसलिए भावनाएँ, घर और माँ इनके लिए बहुत मायने रखते हैं: ये रक्षा करने वाले और वफ़ादार होते हैं और हर भलाई याद रखते हैं, पर मन ज्वार-भाटे की तरह चढ़ता-उतरता है और दिल की चोट देर तक रहती है। घर में सुकून हो तो ये सबसे स्थिर रहते हैं।

वराहमिहिर क्या कहते हैं

बृहत् जातक के अनुसार चंद्र कर्क राशि में हों तो जातक तेज़ चलने वाला, सच्चे मित्रों वाला, ज्योतिष का जानकार और अनेक घरों का स्वामी होता है। उसका धन चंद्रमा की कलाओं की तरह घटता-बढ़ता रहता है। वह मीठे वचनों से वश में हो जाता है, घर की स्त्रियों की बात बहुत मानता है और उसे जल और बाग़-बग़ीचे प्रिय होते हैं। श्लोक उसका कद छोटा और गर्दन मोटी बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा और कर्क राशि दोनों बली हों (कर्क के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं)।

बृहत् जातक 17.4

ख़ूबियाँ

इस राशि के स्वामी चंद्र पोषण के कारक हैं, इसलिए मेहमानों ने खाना खाया या नहीं और बड़ों की दवा ख़त्म तो नहीं हुई, यह ध्यान अक्सर कर्क वाले ही रखते हैं। चर राशि होने से इनकी भावना काम में बदल जाती है: अस्पताल ले जाना हो या पूजा करानी हो, ये किसी के कहने से पहले इंतज़ाम कर देते हैं। चंद्र जनता के भी कारक हैं, इसलिए मदद माँगने वाले अनजान लोगों से भी ये सहज होकर मिलते हैं।

किन बातों का ध्यान रखें

कर्क वाले पूरे परिवार की चिंता अपने सिर ले लेते हैं और बदले में मदद माँगना भूल जाते हैं। किसी भाई-बंधु के क़र्ज़ की ज़मानत लेना, या लौटाने की तारीख़ तय किए बिना उधार देना: ऐसे मामलों में इस स्नेह की एक हद तय होनी चाहिए। हफ़्ते में एक शाम अपने आराम के लिए रखना, और घर में यह साफ़ कह देना, सबकी देखभाल करने वाले को ख़ुद भी स्वस्थ रखता है।

कर्क राशि: काम-काज, विवाह और सेहत

ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।

काम-काज

कर्क के लिए चंद्र से दसवीं राशि मेष है, जिसके स्वामी मंगल हैं; यह साहस और फुर्ती माँगने वाले कामों की ओर इशारा है: सेना, सुरक्षा बल, सर्जरी, इंजीनियरिंग या खेल। राशि के स्वामी चंद्र सेवा, भोजन और जनता से व्यवहार जोड़ते हैं, इसलिए नर्सिंग, भोजनालय, दूध का कारोबार या जल से जुड़ा व्यापार भी इनके लिए ठीक रहता है। ख़याल रखने वाला स्वभाव परामर्श जैसे कामों के भी अनुकूल है, और ऊपर का श्लोक इन्हें अनेक घरों का स्वामी बताता है, इसलिए भवन-संपत्ति का काम भी ठीक बैठता है।

विवाह

चंद्र से सातवीं राशि मकर है, जिसके स्वामी शनि हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो ज़िम्मेदार, कम बोलने वाला और प्रेम को शब्दों से अधिक कर्तव्य से जताने वाला हो। कर्क वाले भावुक होते हैं और ऐसा साथी व्यावहारिक और स्थिर; कर्क वालों की भावना को साथी की स्थिरता मिले और दोनों अपनी ज़रूरत साफ़ कह दें तो रिश्ता मज़बूत होता है। घर में नरम लहजा बहुत काम आता है, क्योंकि कड़वी बात कर्क वालों के मन में झगड़ा निपटने के बाद भी देर तक रहती है।

सेहत

परंपरा कालपुरुष के शरीर में कर्क को हृदय से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और जल तत्त्व की राशि होने से शरीर के तरल पदार्थों से। चंद्र इस राशि के स्वामी भी हैं और मन के कारक भी, इसलिए परंपरा यहाँ मन और तन को साथ जोड़कर देखती है, और घर का सुकून और पूरा विश्राम भी शरीर की देखभाल का हिस्सा मानती है।

कर्क राशि के नक्षत्र और नाम अक्षर

हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।

नक्षत्रस्वामीकर्क में अंशकर्क में चरणनाम अक्षर
पुनर्वसुगुरु0°–3°20′4ही
पुष्यशनि3°20′–16°40′चारोंहू, हे, हो, डा
अश्लेषाबुध16°40′–30°चारोंडी, डू, डे, डो

नक्षत्र और चरण से बच्चों के नाम →

कर्क राशि के लिए अभी शनि, गुरु और राहु

ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर कर्क राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।

  • शनिअभी मीन में, चंद्र राशि से नौवें भाव में हैं, इसलिए न साढ़े साती है, न ढैय्या। आगे: साढ़े साती 31 मई 2032 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक और कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 28 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक, फिर 26 सितंबर 2041 से 11 दिसंबर 2043 तक, फिर 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक। साढ़े साती · ढैय्या की तारीख़ें।
  • गुरुअभी चंद्र राशि से पहले भाव (अपनी सेहत, आत्मविश्वास और दूसरों की नज़र में आपकी छवि) में हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 से दूसरे भाव (परिवार, जमा-पूँजी और बोलचाल) में, 25 जनवरी 2027 से फिर पहले भाव में, 26 जून 2027 से फिर दूसरे भाव में और 26 नवंबर 2027 से तीसरे भाव (साहस, छोटे भाई-बहन और छोटी यात्राएँ) में रहेंगे।
  • राहुअभी चंद्र राशि से आठवें भाव (सेहत, अचानक की घटनाएँ, छिपी बातें और ससुराल) में हैं। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 से सातवें भाव (विवाह, साझेदार और कारोबारी लेन-देन) में रहेंगे।

कर्क राशिफल 2027: महीने दर महीने →

कर्क राशि का उपाय: स्वामी चंद्र

राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।

  • चंद्र का मंत्र, सोमवार को 108 बारॐ सोमाय नमःकर्क राशि के स्वामी का सबसे सरल मंत्र, शांत मन और माँ की कुशलता के लिए।
  • बीज मंत्र, नियमित जप के लिएॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमःचंद्र के पूरे जप के लिए, रोज़ 108 बार, जब कर्क राशि के स्वामी को बल चाहिए: उनकी दशा (ग्रह की अवधि) में, या जब वे आपकी कुंडली में निर्बल हों।
  • देवी पार्वती की पूजाकर्क राशि से परंपरा में जुड़ी देवी, जिनकी पूजा मन की स्थिरता और परिवार में मेल के लिए की जाती है; मंदिर में दर्शन या घर में दीया सबसे सरल रूप है।

रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।

कुंडली मिलान में कर्क राशि

गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।

  • सिर्फ़ राशि से सबसे अच्छा और सबसे कठिन मेलकर्क को लड़के की राशि मानें, तो बाक़ी ग्यारह राशियों में कर्क का सबसे ज़्यादा मेल मेष से (13/15) और सबसे कम कुंभ से (2.5/15) है। एक ही राशि के दो लोगों को इन चारों पर पूरे 15 अंक मिलते हैं। वर्ण और वश्य में लड़के और लड़की की राशि अदल-बदल करने से अंक बदल सकते हैं, इसलिए जोड़ी वाले पेज पर दोनों तरह से गिनती दी गई है। बाक़ी चार कूट, 21 अंक, दोनों के नक्षत्र से निकलते हैं।
  • भकूटभकूट, 7 अंकों का कूट, तब 0 देता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से दूसरे-बारहवें, पाँचवें-नौवें या छठे-आठवें स्थान पर हों। मिथुन, वृश्चिक, मीन, धनु और कुंभ के साथ भकूट दोष बनता है और बना रहता है। सिंह के साथ दोष बनता है पर रद्द हो जाता है, क्योंकि दोनों राशियों के स्वामी एक ही ग्रह हैं या आपस में मित्र: भकूट के 7 में से 0 अंक ही रहते हैं, पर ज्योतिषी इसे मिलान में रुकावट नहीं मानते।
  • वश्य (2 अंक)कर्क जलचर (जल में रहने वाला) राशि है। वश्य कूट (आपसी आकर्षण) में कर्क को पूरे 2 अंक तब मिलते हैं जब साथी की राशि कर्क या मीन हो। धनु और मकर का वर्ग 15° पर बदल जाता है, और ऊपर की गिनती उनके पहले आधे की है: मकर के दूसरे आधे में चंद्रमा हों तो कर्क को 2 अंक मिलते हैं।

हर राशि से कर्क का मेल, कूट दर कूट → · पूरा कुंडली मिलान

पराशर के शब्दों में कर्क राशि

राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।

  • रंग: हल्का लाल (पाटल)
  • भारी शरीर
  • बहुपद (केकड़े की तरह कई पैरों वाली)
  • रात्रि में बली
  • वन में वास
  • सत्त्वगुणी
  • जल तत्त्व
  • पृष्ठोदय (पीठ से उदय होने वाली)
  • स्वामी: चंद्र
  • चर, स्त्री और सौम्य राशि
  • कफ प्रकृति

सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.10–11

आम सवाल

कर्क राशि क्या है?

कर्क बारह राशियों में चौथी है, निरयन राशिचक्र के 90°–120°, और इसके स्वामी चंद्र हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।

कर्क राशि के नाम अक्षर क्या हैं?

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।

कर्क राशि का सबसे अच्छा मेल किन राशियों से है?

राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में कर्क का सबसे अच्छा मेल मेष से है (13/15, कर्क को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।

कर्क राशि का मंत्र क्या है?

इसके स्वामी चंद्र का मंत्र ॐ सोमाय नमः, सोमवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।

क्या कर्क राशि पर अभी साढ़े साती या ढैय्या है?

अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, कर्क से नौवें भाव में। आगे पहले साढ़े साती 31 मई 2032 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक; फिर कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 28 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक, फिर 26 सितंबर 2041 से 11 दिसंबर 2043 तक, फिर 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक।

कर्क राशि के लिए 2027 कैसा है?

2027 में सबसे अच्छे महीने सितंबर और नवंबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।

आपकी राशि आपकी कुंडली का बस एक हिस्सा है

आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।

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AI वैदिक ज्योतिषी। किसी भी भारतीय भाषा में चैट करें; कॉल हिंदी और अंग्रेज़ी में।ऐसे पूछें“मेरी कुंडली का पूरा और विस्तार से विश्लेषण कीजिए”“मेरी जन्म कुंडली में कौन-से दुर्लभ योग हैं?”“इस महीने की मेरी सूक्ष्म दशा का विश्लेषण कीजिए”चैट कॉल शुल्क हर मिनट के हिसाब से लगता है, और सिर्फ़ तब तक जब तक चैट या कॉल चालू रहे। जब चाहें बंद करें।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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