बारह राशियों में चौथी · निरयन (स्थिर तारों वाले) राशिचक्र के 90°–120°
जन्म के समय चंद्रमा कर्क में हों तो आपकी राशि कर्क है: इसी से आपका राशिफल, साढ़े साती और नाम अक्षर देखे जाते हैं। जिनके चंद्रमा कर्क में हों, वे भावुक होते हैं और दूसरों का ख़याल रखते हैं। इसके स्वामी चंद्र हैं, नक्षत्र पुनर्वसु (चरण 4), पुष्य और अश्लेषा हैं, और परंपरा में कर्क राशि के बच्चे का नाम ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे या डो अक्षर से रखा जाता है।
राशि की अपनी बातें, जो हर कर्क राशि वाले के लिए एक-सी हैं।
चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए उनकी राशि बताती है कि व्यक्ति कैसा महसूस करता है और किसी बात पर कैसे पेश आता है। लग्न और बाक़ी कुंडली इसे आगे गढ़ते हैं।
यह चंद्रमा की अपनी राशि है, इसलिए भावनाएँ, घर और माँ इनके लिए बहुत मायने रखते हैं: ये रक्षा करने वाले और वफ़ादार होते हैं और हर भलाई याद रखते हैं, पर मन ज्वार-भाटे की तरह चढ़ता-उतरता है और दिल की चोट देर तक रहती है। घर में सुकून हो तो ये सबसे स्थिर रहते हैं।
बृहत् जातक के अनुसार चंद्र कर्क राशि में हों तो जातक तेज़ चलने वाला, सच्चे मित्रों वाला, ज्योतिष का जानकार और अनेक घरों का स्वामी होता है। उसका धन चंद्रमा की कलाओं की तरह घटता-बढ़ता रहता है। वह मीठे वचनों से वश में हो जाता है, घर की स्त्रियों की बात बहुत मानता है और उसे जल और बाग़-बग़ीचे प्रिय होते हैं। श्लोक उसका कद छोटा और गर्दन मोटी बताता है। वराहमिहिर स्वयं कहते हैं (17.13) कि यह फल पूरा तभी मिलता है जब जन्म के समय चंद्रमा और कर्क राशि दोनों बली हों (कर्क के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं)।
बृहत् जातक 17.4
इस राशि के स्वामी चंद्र पोषण के कारक हैं, इसलिए मेहमानों ने खाना खाया या नहीं और बड़ों की दवा ख़त्म तो नहीं हुई, यह ध्यान अक्सर कर्क वाले ही रखते हैं। चर राशि होने से इनकी भावना काम में बदल जाती है: अस्पताल ले जाना हो या पूजा करानी हो, ये किसी के कहने से पहले इंतज़ाम कर देते हैं। चंद्र जनता के भी कारक हैं, इसलिए मदद माँगने वाले अनजान लोगों से भी ये सहज होकर मिलते हैं।
कर्क वाले पूरे परिवार की चिंता अपने सिर ले लेते हैं और बदले में मदद माँगना भूल जाते हैं। किसी भाई-बंधु के क़र्ज़ की ज़मानत लेना, या लौटाने की तारीख़ तय किए बिना उधार देना: ऐसे मामलों में इस स्नेह की एक हद तय होनी चाहिए। हफ़्ते में एक शाम अपने आराम के लिए रखना, और घर में यह साफ़ कह देना, सबकी देखभाल करने वाले को ख़ुद भी स्वस्थ रखता है।
ज्योतिष चंद्र राशि को लग्न मानकर (चंद्र लग्न) भी पढ़ता है: काम के लिए चंद्र से दसवाँ भाव, विवाह के लिए सातवाँ, और सेहत के लिए राशि का अपना अंग और तत्त्व। सातवीं राशि जीवनसाथी के स्वभाव का संकेत है, इसका मतलब यह नहीं कि जीवनसाथी की राशि यही होगी। यह परंपरा है, भविष्यवाणी नहीं; पूरा फल आपकी कुंडली तय करती है।
कर्क के लिए चंद्र से दसवीं राशि मेष है, जिसके स्वामी मंगल हैं; यह साहस और फुर्ती माँगने वाले कामों की ओर इशारा है: सेना, सुरक्षा बल, सर्जरी, इंजीनियरिंग या खेल। राशि के स्वामी चंद्र सेवा, भोजन और जनता से व्यवहार जोड़ते हैं, इसलिए नर्सिंग, भोजनालय, दूध का कारोबार या जल से जुड़ा व्यापार भी इनके लिए ठीक रहता है। ख़याल रखने वाला स्वभाव परामर्श जैसे कामों के भी अनुकूल है, और ऊपर का श्लोक इन्हें अनेक घरों का स्वामी बताता है, इसलिए भवन-संपत्ति का काम भी ठीक बैठता है।
चंद्र से सातवीं राशि मकर है, जिसके स्वामी शनि हैं, इसलिए परंपरा ऐसे जीवनसाथी की बात करती है जो ज़िम्मेदार, कम बोलने वाला और प्रेम को शब्दों से अधिक कर्तव्य से जताने वाला हो। कर्क वाले भावुक होते हैं और ऐसा साथी व्यावहारिक और स्थिर; कर्क वालों की भावना को साथी की स्थिरता मिले और दोनों अपनी ज़रूरत साफ़ कह दें तो रिश्ता मज़बूत होता है। घर में नरम लहजा बहुत काम आता है, क्योंकि कड़वी बात कर्क वालों के मन में झगड़ा निपटने के बाद भी देर तक रहती है।
परंपरा कालपुरुष के शरीर में कर्क को हृदय से जोड़ती है (बृहत् जातक 1.4), और जल तत्त्व की राशि होने से शरीर के तरल पदार्थों से। चंद्र इस राशि के स्वामी भी हैं और मन के कारक भी, इसलिए परंपरा यहाँ मन और तन को साथ जोड़कर देखती है, और घर का सुकून और पूरा विश्राम भी शरीर की देखभाल का हिस्सा मानती है।
हर राशि में नौ चरण होते हैं, हर एक किसी नक्षत्र का एक चौथाई। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, परंपरा में नाम उसी के अक्षर से रखा जाता है।
| नक्षत्र | स्वामी | कर्क में अंश | कर्क में चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|
| पुनर्वसु | गुरु | 0°–3°20′ | 4 | ही |
| पुष्य | शनि | 3°20′–16°40′ | चारों | हू, हे, हो, डा |
| अश्लेषा | बुध | 16°40′–30° | चारों | डी, डू, डे, डो |
ये भाव चंद्र राशि से गिने गए हैं, जैसे राशिफल में। चंद्र से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में शनि हों तो साढ़े साती होती है, लगभग साढ़े सात साल; चौथे (कंटक) या आठवें (अष्टम) में हों तो ढैय्या, लगभग ढाई साल। यह हर कर्क राशि वाले के लिए एक जैसा है; असर कैसा होगा, यह आपकी कुंडली तय करती है।
राशि को उसके स्वामी के ज़रिए बल मिलता है। ये उपाय मुफ़्त हैं, और हर एक के साथ उसकी वजह है।
रत्न राशि से नहीं बताया जाता। जो रत्न एक कुंडली को फ़ायदा देता है, वही दूसरी को नुकसान कर सकता है, इसलिए रत्न पूरी कुंडली देखकर चुना जाता है।
गुण मिलान के आठ कूटों (मिलान के हिस्सों) में से चार सिर्फ़ राशि से देखे जाते हैं, जो 36 में से 15 अंक के हैं: वर्ण (1, राशि का वर्ग), वश्य (2, आपसी आकर्षण), ग्रह मैत्री (5, स्वामियों की मित्रता) और भकूट (7, प्रेम और परिवार की भलाई)।
राशि का अपना स्वरूप, उसमें बैठे ग्रहों से अलग।
सत्त्व, रज और तम तीन गुण हैं (शांत समझ, सक्रियता और जड़ता)। वात, पित्त और कफ आयुर्वेद के तीन दोष हैं (शरीर में वायु, अग्नि और जल)। राशि का उदय सिर की ओर से (शीर्षोदय) या पीठ की ओर से (पृष्ठोदय) होता है, जैसे उसकी आकृति पूर्व में उगती है; शास्त्र इसे, दिन या रात के बल के साथ, फल का समय देखने में लेते हैं। पराशर राशि की अपनी प्रकृति बताते हैं, और ऊपर वराहमिहिर उस व्यक्ति की जिसके चंद्रमा इसमें हों, इसलिए दोनों में अंतर हो सकता है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.5, 4.10–11
कर्क बारह राशियों में चौथी है, निरयन राशिचक्र के 90°–120°, और इसके स्वामी चंद्र हैं। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हों तो यह आपकी राशि है।
ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो: नौ चरणों के लिए एक-एक, क्रम से। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हों, उसी का अक्षर लिया जाता है।
राशि से तय होने वाले चार कूटों पर बाक़ी ग्यारह राशियों में कर्क का सबसे अच्छा मेल मेष से है (13/15, कर्क को वर की राशि मानकर); एक ही राशि के दो लोगों को पूरे 15 अंक मिलते हैं। असली मिलान के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए: 36 में से 21 अंक नक्षत्र के कूटों से आते हैं।
इसके स्वामी चंद्र का मंत्र ॐ सोमाय नमः, सोमवार को 108 बार। बीज मंत्र और देवता ऊपर उपाय वाले हिस्से में हैं।
अभी दोनों में से कोई नहीं। शनि मीन में हैं, कर्क से नौवें भाव में। आगे पहले साढ़े साती 31 मई 2032 से 22 अक्टूबर 2038 तक, फिर 5 अप्रैल 2039 से 13 जुलाई 2039 तक; फिर कंटक शनि (ढैय्या, शनि चौथे भाव में) 28 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक, फिर 26 सितंबर 2041 से 11 दिसंबर 2043 तक, फिर 23 जून 2044 से 30 अगस्त 2044 तक।
2027 में सबसे अच्छे महीने सितंबर और नवंबर हैं और सबसे कमज़ोर फ़रवरी और दिसंबर। 2027 के राशिफल में हर महीने का हाल है, ऊपर बताए शनि, गुरु और राहु के बदलावों के साथ।
आपका लग्न, नक्षत्र का चरण और दशा बाक़ी बताते हैं। आचार्य पराशर (AI ज्योतिषी) आपकी पूरी कुंडली देखकर जवाब देते हैं।
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