हर दिन सूर्योदय की तिथि, पूर्णिमांत मास (उत्तर भारत का, जो पूर्णिमा पर ख़त्म होता है), और उसमें आने वाले व्रत-त्योहार, नई दिल्ली के लिए।
हर ख़ाने में लिखी संख्या उस दिन नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है, पक्ष के भीतर गिनी हुई, जैसी दीवार वाले कैलेंडर में छपी होती है। जिस तारीख़ पर क्लिक हो सकता है, उसका पूरा पंचांग अलग पेज पर है।
खरमास सोमवार, 15 मार्च से मंगलवार, 13 अप्रैल तक: सूर्य मीन में, मेष संक्रांति तक; यह शादी और मुंडन के मुहूर्त बुधवार, 14 अप्रैल तक, उस दिन समेत, बंद रखता है: सूर्य उस दिन सूर्योदय के बाद राशि बदलते हैं, इसलिए वह दिन भी खरमास में गिना जाता है; जनेऊ, गृह प्रवेश, ज़मीन-जायदाद की ख़रीद, नई गाड़ी और नए व्यापार के मुहूर्त पंचांग में फिर भी हैं, पर उत्तर भारत में कई परिवार इसके ख़त्म होने तक रुकते हैं।
होलाष्टक मंगलवार, 16 मार्च से रविवार, 21 मार्च तक: फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा, यानी होलिका दहन की रात, तक की आठ तिथियाँ, जो इस बार 6 दिनों में पूरी हो जाती हैं; यह शादी, मुंडन, जनेऊ, नामकरण, विद्यारंभ और गृह प्रवेश के मुहूर्त रविवार, 21 मार्च तक बंद रखता है।
2027 के सारे त्योहार, महीने के हिसाब से: हिंदू त्योहार 2027
नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।
| दिन | सूर्योदय की तिथि | मास | व्रत-त्योहार |
|---|---|---|---|
| 1 सोम | कृष्ण नवमी | फाल्गुन | |
| 2 मंगल | कृष्ण दशमी | फाल्गुन | |
| 3 बुध | कृष्ण एकादशी | फाल्गुन | |
| 4 गुरु | कृष्ण एकादशी | फाल्गुन | विजया एकादशी |
| 5 शुक्र | कृष्ण द्वादशी | फाल्गुन | शुक्र प्रदोष व्रत |
| 6 शनि | कृष्ण त्रयोदशी | फाल्गुन | महाशिवरात्रि |
| 7 रवि | कृष्ण चतुर्दशी | फाल्गुन | |
| 8 सोम | अमावस्या | फाल्गुन | सोमवती अमावस्या |
| 9 मंगल | शुक्ल प्रतिपदा | फाल्गुन | |
| 10 बुध | शुक्ल द्वितीया | फाल्गुन | फुलेरा दूज |
| 11 गुरु | शुक्ल तृतीया | फाल्गुन | |
| 12 शुक्र | शुक्ल चतुर्थी | फाल्गुन | |
| 13 शनि | शुक्ल पंचमी | फाल्गुन | |
| 14 रवि | शुक्ल षष्ठी | फाल्गुन | |
| 15 सोम | शुक्ल सप्तमी | फाल्गुन | मीन संक्रांति |
| 16 मंगल | शुक्ल अष्टमी | फाल्गुन | मासिक दुर्गाष्टमी · होलाष्टक शुरू |
| 17 बुध | शुक्ल नवमी | फाल्गुन | |
| 18 गुरु | शुक्ल एकादशी | फाल्गुन | आमलकी एकादशी |
| 19 शुक्र | शुक्ल द्वादशी | फाल्गुन | |
| 20 शनि | शुक्ल त्रयोदशी | फाल्गुन | शनि प्रदोष व्रत |
| 21 रवि | शुक्ल चतुर्दशी | फाल्गुन | होलिका दहन |
| 22 सोम | पूर्णिमा | फाल्गुन | होली · फाल्गुन पूर्णिमा व्रत |
| 23 मंगल | कृष्ण प्रतिपदा | चैत्र | |
| 24 बुध | कृष्ण द्वितीया | चैत्र | |
| 25 गुरु | कृष्ण तृतीया | चैत्र | संकष्टी चतुर्थी |
| 26 शुक्र | कृष्ण चतुर्थी | चैत्र | |
| 27 शनि | कृष्ण पंचमी | चैत्र | रंग पंचमी |
| 28 रवि | कृष्ण षष्ठी | चैत्र | |
| 29 सोम | कृष्ण सप्तमी | चैत्र | |
| 30 मंगल | कृष्ण अष्टमी | चैत्र | |
| 31 बुध | कृष्ण नवमी | चैत्र |
तिथि वाले कॉलम में नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है। हर व्रत और त्योहार अपनी तिथि के अपने समय से तय होता है: प्रदोष शाम को, शिवरात्रि आधी रात (निशीथ) को, संकष्टी चंद्रोदय पर, पूर्णिमा का व्रत दोपहर में, दिवाली सूर्यास्त के बाद। इसलिए कोई व्रत ऐसे दिन भी पड़ सकता है जिसकी सूर्योदय वाली तिथि उससे पिछली हो।
होलिका दहन रविवार, 21 मार्च को है और फाल्गुन पूर्णिमा व्रत सोमवार, 22 मार्च को: होलिका दहन में पूर्णिमा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में देखी जाती है, और पूर्णिमा का व्रत उस पहले दिन रखा जाता है जिस दिन मध्याह्न में, यानी दोपहर में पूर्णिमा हो।
विजया एकादशी गुरुवार, 4 मार्च को है: एकादशी दो सूर्योदयों पर है, पिछले दिन और इस दिन, और ऐसे में व्रत दूसरे दिन रखा जाता है।
जब तारीख़ अदालत दे, तो कोर्ट की सुनवाई वाले पेज पर हर दिन की सूर्य होरा है; क़ानूनी नोटिस के लिए नोटिस का जवाब वाले पेज पर जवाब के दिन हैं।
उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में 1 मार्च से 22 मार्च तक फाल्गुन; फिर 23 मार्च से 31 मार्च तक चैत्र। विक्रम संवत 2083।
नई दिल्ली में फाल्गुन पूर्णिमा व्रत सोमवार, 22 मार्च को।
नई दिल्ली में सोमवती अमावस्या सोमवार, 8 मार्च को।
नई दिल्ली में विजया एकादशी गुरुवार, 4 मार्च को और आमलकी एकादशी गुरुवार, 18 मार्च को।
महाशिवरात्रि शनिवार, 6 मार्च को; होलिका दहन रविवार, 21 मार्च को; होली सोमवार, 22 मार्च को। नई दिल्ली के लिए।
नई दिल्ली में निशीथ काल की पूजा 6–7 मार्च की रात 12:08 से 12:57 तक है; माना जाता है कि इसी समय शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। जो परिवार रात भर पूजा करते हैं, वे सूर्यास्त (शाम 6:24) से सूर्योदय (सुबह 6:40) तक चार प्रहरों में करते हैं। व्रत का पारण 7 मार्च, सुबह 6:40 से दोपहर 1:46 तक, जब तक चतुर्दशी चल रही हो।
नई दिल्ली में शाम 6:33 से रात 8:55 तक: प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद की शाम, जब पूर्णिमा चल रही हो। भद्रा इसमें 22 मार्च, सुबह 5:16 तक है; जो परिवार भद्रा ख़त्म होने का इंतज़ार करते हैं, वे उसके बाद होलिका जलाते हैं।
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