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नई दिल्ली

हिंदू कैलेंडर नवंबर 2027
कार्तिक – अगहन

हर दिन सूर्योदय की तिथि, पूर्णिमांत मास (उत्तर भारत का, जो पूर्णिमा पर ख़त्म होता है), और उसमें आने वाले व्रत-त्योहार, नई दिल्ली के लिए।

विक्रम संवत 2084पूर्णिमांत11 त्योहार
पूर्णिमा13 नवंबरकार्तिक पूर्णिमा व्रत
अमावस्या28 नवंबरअगहन अमावस्या
एकादशी10 नवंबरदेवउठनी एकादशी24 नवंबरउत्पन्ना एकादशी
संक्रांति17 नवंबरवृश्चिक संक्रांति
नवंबर 2027 कार्तिक · अगहन
रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि132435लाभ पंचमी46छठ पूजा5768गोपाष्टमी79अक्षय नवमी8109101011एकादशी1112तुलसी विवाह1213वैकुंठ चतुर्दशी1314देव दीपावली14○कार्तिक पूर्णिमा151163174संकष्टी185196207काल भैरव जयंती21822923102411एकादशी2512प्रदोष2613शिवरात्रि271428●291302
शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष त्योहार ○ पूर्णिमा   ● अमावस्या

हर ख़ाने में लिखी संख्या उस दिन नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है, पक्ष के भीतर गिनी हुई, जैसी दीवार वाले कैलेंडर में छपी होती है। जिस तारीख़ पर क्लिक हो सकता है, उसका पूरा पंचांग अलग पेज पर है।

चातुर्मास बुधवार, 14 जुलाई से बुधवार, 10 नवंबर तक: विष्णु जी के विश्राम के चार महीने, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक; इसमें शादी, जनेऊ और विद्यारंभ के मुहूर्त नहीं निकलते; ये बुधवार, 10 नवंबर, यानी देवउठनी एकादशी के दिन से फिर हो सकते हैं; मुंडन के मुहूर्त इन दिनों सूर्य की राशि के कारण वैसे भी नहीं हैं; गृह प्रवेश के मुहूर्त पंचांग में फिर भी हैं, पर उत्तर भारत में कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं।

नवंबर 2027 के व्रत-त्योहार

11 त्योहार, 8 व्रत
नवंबर 20273बुधलाभ पंचमीगुजरात कार्तिक शुक्ल पंचमी · सूर्योदय पर4गुरुछठ पूजाबिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश छठ का तीसरा दिन, शाम का अर्घ्य · कार्तिक शुक्ल षष्ठी · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · संध्या अर्घ्य, सूर्यास्त पर शाम 5:344गुरुस्कंद षष्ठीतमिलनाडु कार्तिक शुक्ल षष्ठी · दोपहर बाद (अपराह्न)6शनिगोपाष्टमीकार्तिक शुक्ल अष्टमी · सूर्योदय पर7रविअक्षय नवमीकार्तिक शुक्ल नवमी · सूर्योदय पर11गुरुतुलसी विवाहकार्तिक शुक्ल द्वादशी · सूर्योदय पर12शुक्रवैकुंठ चतुर्दशीकार्तिक शुक्ल चतुर्दशी · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष)13शनिदेव दीपावलीकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा · सूर्यास्त के बाद (प्रदोष) · दीपदान मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 5:29 से रात 8:08 तक14रविकार्तिक पूर्णिमाकार्तिक शुक्ल पूर्णिमा · सूर्योदय पर14रविगुरु नानक जयंतीसिख कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन20शनिकाल भैरव जयंतीअगहन कृष्ण अष्टमी · तिथि शुरू होने वाले दिन, क्योंकि 2027 में केवल उसी दिन का प्रदोष काल इस तिथि में पड़ता है
नवंबर 20276शनिमासिक दुर्गाष्टमीअष्टमी 5–6 नवंबर की रात 12:09 से 6–7 नवंबर की रात 2:50 तक10बुधदेवउठनी एकादशीएकादशी 9 नवंबर, सुबह 7:35 से 10 नवंबर, सुबह 9:11 तक · पारण 11 नवंबर, सुबह 6:41 से 8:49 तक11गुरुगुरु प्रदोष व्रतत्रयोदशी 11 नवंबर, सुबह 10:07 से 12 नवंबर, सुबह 10:21 तक · पूजा शाम 5:30 से रात 8:08 तक17बुधसंकष्टी चतुर्थीचतुर्थी 16–17 नवंबर की रात 3:42 से 17–18 नवंबर की रात 1:35 तक · चंद्रोदय रात 8:2624बुधउत्पन्ना एकादशीएकादशी 23 नवंबर, दोपहर 1:45 से 24 नवंबर, दोपहर 12:11 तक · पारण 25 नवंबर, सुबह 6:52 से 8:57 तक25गुरुगुरु प्रदोष व्रतत्रयोदशी 25 नवंबर, सुबह 10:51 से 26 नवंबर, सुबह 9:48 तक · पूजा शाम 5:25 से रात 8:06 तक26शुक्रमासिक शिवरात्रिचतुर्दशी 26 नवंबर, सुबह 9:48 से 27 नवंबर, सुबह 9:07 तक · निशीथ 26 नवंबर, रात 11:41 से 12:35 तक28रविअगहन अमावस्याअमावस्या 27 नवंबर, सुबह 9:07 से 28 नवंबर, सुबह 8:54 तक

इस महीने ये दिन भी

2नवंबर · मंगलनहाय-खाय बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशछठ का पहला दिन · छठ का पहला दिन: नदी या तालाब में स्नान, और कद्दू-भात का एक सात्विक भोजन।
3नवंबर · बुधखरना बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशछठ का दूसरा दिन · छठ का दूसरा दिन: दिन भर का व्रत, जो रात को गुड़ की खीर और रोटी से खुलता है; इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
5नवंबर · शुक्रउषा अर्घ्य बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेशछठ का चौथा दिन, शाम के अर्घ्य की अगली सुबह · छठ की आख़िरी सुबह: उगते सूर्य को अर्घ्य, और व्रत का पारण।

2027 के सारे त्योहार, महीने के हिसाब से: हिंदू त्योहार 2027

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

दिन-ब-दिन

सूर्योदय की तिथि और मास
दिनसूर्योदय की तिथिमासव्रत-त्योहार
1 सोमशुक्ल तृतीयाकार्तिक
2 मंगलशुक्ल चतुर्थीकार्तिकनहाय-खाय
3 बुधशुक्ल पंचमीकार्तिकलाभ पंचमी (गुजरात) · खरना
4 गुरुशुक्ल षष्ठीकार्तिकछठ पूजा (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) · स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु)
5 शुक्रशुक्ल सप्तमीकार्तिकउषा अर्घ्य
6 शनिशुक्ल अष्टमीकार्तिकगोपाष्टमी · मासिक दुर्गाष्टमी
7 रविशुक्ल नवमीकार्तिकअक्षय नवमी
8 सोमशुक्ल दशमीकार्तिक
9 मंगलशुक्ल दशमीकार्तिक
10 बुधशुक्ल एकादशीकार्तिकदेवउठनी एकादशी
11 गुरुशुक्ल द्वादशीकार्तिकतुलसी विवाह · गुरु प्रदोष व्रत
12 शुक्रशुक्ल त्रयोदशीकार्तिकवैकुंठ चतुर्दशी
13 शनिशुक्ल चतुर्दशीकार्तिकदेव दीपावली
14 रविपूर्णिमाकार्तिककार्तिक पूर्णिमा · गुरु नानक जयंती (सिख)
15 सोमकृष्ण प्रतिपदाअगहन
16 मंगलकृष्ण तृतीयाअगहन
17 बुधकृष्ण चतुर्थीअगहनसंकष्टी चतुर्थी · वृश्चिक संक्रांति
18 गुरुकृष्ण पंचमीअगहन
19 शुक्रकृष्ण षष्ठीअगहन
20 शनिकृष्ण सप्तमीअगहनकाल भैरव जयंती
21 रविकृष्ण अष्टमीअगहन
22 सोमकृष्ण नवमीअगहन
23 मंगलकृष्ण दशमीअगहन
24 बुधकृष्ण एकादशीअगहनउत्पन्ना एकादशी
25 गुरुकृष्ण द्वादशीअगहनगुरु प्रदोष व्रत
26 शुक्रकृष्ण त्रयोदशीअगहनमासिक शिवरात्रि
27 शनिकृष्ण चतुर्दशीअगहन
28 रविअमावस्याअगहनअगहन अमावस्या
29 सोमशुक्ल प्रतिपदाअगहन
30 मंगलशुक्ल द्वितीयाअगहन

तिथि वाले कॉलम में नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है। हर व्रत और त्योहार अपनी तिथि के अपने समय से तय होता है: प्रदोष शाम को, शिवरात्रि आधी रात (निशीथ) को, संकष्टी चंद्रोदय पर, पूर्णिमा का व्रत दोपहर में, दिवाली सूर्यास्त के बाद। इसलिए कोई व्रत ऐसे दिन भी पड़ सकता है जिसकी सूर्योदय वाली तिथि उससे पिछली हो।

कार्तिक पूर्णिमा रविवार, 14 नवंबर को है और कार्तिक पूर्णिमा व्रत शनिवार, 13 नवंबर को: कार्तिक पूर्णिमा में पूर्णिमा सूर्योदय पर देखी जाती है, और पूर्णिमा का व्रत उस पहले दिन रखा जाता है जिस दिन मध्याह्न में, यानी दोपहर में पूर्णिमा हो। स्नान-दान रविवार, 14 नवंबर को है, जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो।

काल भैरव जयंती शनिवार, 20 नवंबर को है, जिस दिन इसकी तिथि, अष्टमी, शुरू होती है: 2027 में यह 20 नवंबर, शाम 7:17 से 21 नवंबर, शाम 5:20 तक है, इसलिए केवल उसी दिन का प्रदोष काल इस तिथि में पड़ता है।

इस पेज के शब्द

हर शब्द का मतलब
  • पूर्णिमांत: उत्तर भारत का कैलेंडर, जिसमें महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है। पश्चिम और दक्षिण के अमांत कैलेंडर में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है, इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों महीने का नाम अलग बताते हैं।
  • शुक्ल और कृष्ण पक्ष: महीने का उजाला पखवाड़ा, जब चंद्रमा बढ़कर पूर्णिमा तक जाता है, और अँधेरा पखवाड़ा, जब घटकर अमावस्या तक।
  • संक्रांति: जिस दिन सूर्य नई राशि में प्रवेश करते हैं; इनमें मकर संक्रांति सबसे जानी-मानी है।
  • प्रदोष: सूर्यास्त के ठीक बाद की शाम का समय।
  • निशीथ: आधी रात का समय, जब शिवरात्रि और जन्माष्टमी की पूजा होती है।
  • अपराह्न और मध्याह्न: दोपहर बाद का समय (दिन के पाँच बराबर भागों में चौथा) और दिन का बीच का समय, यानी दोपहर।
  • पारण: व्रत खोलने का समय, जैसे एकादशी का व्रत अगली सुबह खोला जाता है।
  • स्नान-दान: पूर्णिमा या अमावस्या पर पवित्र स्नान और दान।
  • क्षय: वह तिथि जो एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाए, इसलिए किसी सूर्योदय पर न दिखे; वह उसी दिन मानी जाती है जिस दिन शुरू होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

7 सवाल
नवंबर 2027 में कौन-सा हिंदू महीना है?

उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में 1 नवंबर से 14 नवंबर तक कार्तिक; फिर 15 नवंबर से 30 नवंबर तक अगहन। विक्रम संवत 2084।

नवंबर 2027 में पूर्णिमा कब है?

नई दिल्ली में कार्तिक पूर्णिमा व्रत शनिवार, 13 नवंबर को।

नवंबर 2027 में अमावस्या कब है?

नई दिल्ली में अगहन अमावस्या रविवार, 28 नवंबर को।

नवंबर 2027 में एकादशी कब है?

नई दिल्ली में देवउठनी एकादशी बुधवार, 10 नवंबर को और उत्पन्ना एकादशी बुधवार, 24 नवंबर को।

नवंबर 2027 में कौन-से हिंदू त्योहार हैं?

लाभ पंचमी (गुजरात) बुधवार, 3 नवंबर को; छठ पूजा (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) गुरुवार, 4 नवंबर को; स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु) गुरुवार, 4 नवंबर को; गोपाष्टमी शनिवार, 6 नवंबर को; अक्षय नवमी रविवार, 7 नवंबर को; तुलसी विवाह गुरुवार, 11 नवंबर को; वैकुंठ चतुर्दशी शुक्रवार, 12 नवंबर को; देव दीपावली शनिवार, 13 नवंबर को; कार्तिक पूर्णिमा रविवार, 14 नवंबर को; गुरु नानक जयंती (सिख) रविवार, 14 नवंबर को; काल भैरव जयंती शनिवार, 20 नवंबर को। नई दिल्ली के लिए।

2027 में छठ पूजा का संध्या अर्घ्य कब है?

नई दिल्ली में सूर्यास्त पर, शाम 5:34: व्रती पानी में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर, 5 नवंबर, सुबह 6:35, होता है, और उसके बाद व्रत खोला जाता है। दोनों समय हर शहर के अपने सूर्यास्त और सूर्योदय के साथ बदलते हैं; इस पेज की तालिका में चालीस शहरों के समय हैं।

2027 में देव दीपावली का मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में शाम 5:29 से रात 8:08 तक: प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद की शाम, जब कार्तिक पूर्णिमा चल रही हो। घाटों पर और घर में दीये तभी जलाए जाते हैं।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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9 विस्तृत रिपोर्ट, जिनमें जन्म कुंडली, कुंडली मिलान और वार्षिक भविष्यवाणी हैं।हिंदी, अंग्रेज़ी और हिंग्लिशरिपोर्ट देखें
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