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नई दिल्ली

हिंदू कैलेंडर दिसंबर 2026
अगहन – पौष

हर दिन सूर्योदय की तिथि, पूर्णिमांत मास (उत्तर भारत का, जो पूर्णिमा पर ख़त्म होता है), और उसमें आने वाले व्रत-त्योहार, नई दिल्ली के लिए।

विक्रम संवत 2083पूर्णिमांत5 त्योहार
पूर्णिमा23 दिसंबरअगहन पूर्णिमा व्रत
अमावस्या8 दिसंबरअगहन अमावस्या
एकादशी4 दिसंबरउत्पन्ना एकादशी20 दिसंबरमोक्षदा एकादशी
संक्रांति16 दिसंबरधनु संक्रांति
दिसंबर 2026 अगहन · पौष
रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि18काल भैरव जयंती29310411एकादशी512613प्रदोष714शिवरात्रि8●91101112123134145विवाह पंचमी156167178दुर्गाष्टमी18919102011गीता जयंती2112प्रदोष22132314दत्तात्रेय जयंती241252263संकष्टी274285296307318
शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष त्योहार ○ पूर्णिमा   ● अमावस्या

हर ख़ाने में लिखी संख्या उस दिन नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है, पक्ष के भीतर गिनी हुई, जैसी दीवार वाले कैलेंडर में छपी होती है। जिस तारीख़ पर क्लिक हो सकता है, उसका पूरा पंचांग अलग पेज पर है।

खरमास बुधवार, 16 दिसंबर से गुरुवार, 14 जनवरी 2027 तक: सूर्य धनु में, मकर संक्रांति तक; यह शादी, मुंडन और जनेऊ के मुहूर्त गुरुवार, 14 जनवरी 2027 तक बंद रखता है; गृह प्रवेश, ज़मीन-जायदाद की ख़रीद, नई गाड़ी और नए व्यापार के मुहूर्त पंचांग में फिर भी हैं, पर उत्तर भारत में कई परिवार इसके ख़त्म होने तक रुकते हैं।

दिसंबर 2026 के व्रत-त्योहार

5 त्योहार, 8 व्रत
दिसंबर 20264शुक्रउत्पन्ना एकादशीएकादशी 3 दिसंबर, रात 11:04 से 4 दिसंबर, रात 11:45 तक · पारण 5 दिसंबर, सुबह 6:59 से 9:04 तक6रविरवि प्रदोष व्रतत्रयोदशी 5–6 दिसंबर की रात 12:52 से 6–7 दिसंबर की रात 2:22 तक · पूजा शाम 5:24 से रात 8:08 तक7सोममासिक शिवरात्रिचतुर्दशी 6–7 दिसंबर की रात 2:22 से 8 दिसंबर, सुबह 4:13 तक · निशीथ 7 दिसंबर, रात 11:45 से 12:40 तक8मंगलअगहन अमावस्याअमावस्या 8 दिसंबर, सुबह 4:13 से 9 दिसंबर, सुबह 6:21 तक17गुरुमासिक दुर्गाष्टमीअष्टमी 16 दिसंबर, रात 10:46 से 17 दिसंबर, रात 11:26 तक20रविमोक्षदा एकादशीएकादशी 19 दिसंबर, रात 10:09 से 20 दिसंबर, रात 8:15 तक · पारण 21 दिसंबर, सुबह 7:10 से 9:13 तक21सोमसोम प्रदोष व्रतत्रयोदशी 21 दिसंबर, शाम 5:36 से 22 दिसंबर, दोपहर 2:24 तक · पूजा शाम 5:36 से रात 8:13 तक26शनिसंकष्टी चतुर्थीचतुर्थी 26 दिसंबर, रात 8:05 से 27 दिसंबर, शाम 5:13 तक · चंद्रोदय रात 8:19

नई दिल्ली के लिए, भारतीय समय में। तिथि हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होती है; व्रत का दिन और उसके समय नई दिल्ली के हैं, और विदेश में एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

दिन-ब-दिन

सूर्योदय की तिथि और मास
दिनसूर्योदय की तिथिमासव्रत-त्योहार
1 मंगलकृष्ण अष्टमीअगहनकाल भैरव जयंती
2 बुधकृष्ण नवमीअगहन
3 गुरुकृष्ण दशमीअगहन
4 शुक्रकृष्ण एकादशीअगहनउत्पन्ना एकादशी
5 शनिकृष्ण द्वादशीअगहन
6 रविकृष्ण त्रयोदशीअगहनरवि प्रदोष व्रत
7 सोमकृष्ण चतुर्दशीअगहनमासिक शिवरात्रि
8 मंगलअमावस्याअगहनअगहन अमावस्या
9 बुधशुक्ल प्रतिपदाअगहन
10 गुरुशुक्ल प्रतिपदाअगहन
11 शुक्रशुक्ल द्वितीयाअगहन
12 शनिशुक्ल तृतीयाअगहन
13 रविशुक्ल चतुर्थीअगहन
14 सोमशुक्ल पंचमीअगहनविवाह पंचमी
15 मंगलशुक्ल षष्ठीअगहन
16 बुधशुक्ल सप्तमीअगहनधनु संक्रांति
17 गुरुशुक्ल अष्टमीअगहनमासिक दुर्गाष्टमी
18 शुक्रशुक्ल नवमीअगहन
19 शनिशुक्ल दशमीअगहन
20 रविशुक्ल एकादशीअगहनगीता जयंती · मोक्षदा एकादशी
21 सोमशुक्ल द्वादशीअगहनसोम प्रदोष व्रत
22 मंगलशुक्ल त्रयोदशीअगहन
23 बुधशुक्ल चतुर्दशीअगहनदत्तात्रेय जयंती · मार्गशीर्ष (अगहन) पूर्णिमा
24 गुरुकृष्ण प्रतिपदापौष
25 शुक्रकृष्ण द्वितीयापौष
26 शनिकृष्ण तृतीयापौषसंकष्टी चतुर्थी
27 रविकृष्ण चतुर्थीपौष
28 सोमकृष्ण पंचमीपौष
29 मंगलकृष्ण षष्ठीपौष
30 बुधकृष्ण सप्तमीपौष
31 गुरुकृष्ण अष्टमीपौष

तिथि वाले कॉलम में नई दिल्ली में सूर्योदय के समय की तिथि है। हर व्रत और त्योहार अपनी तिथि के अपने समय से तय होता है: प्रदोष शाम को, शिवरात्रि आधी रात (निशीथ) को, संकष्टी चंद्रोदय पर, पूर्णिमा का व्रत दोपहर में, दिवाली सूर्यास्त के बाद। इसलिए कोई व्रत ऐसे दिन भी पड़ सकता है जिसकी सूर्योदय वाली तिथि उससे पिछली हो।

मार्गशीर्ष (अगहन) पूर्णिमा बुधवार, 23 दिसंबर को है, जिस दिन इसकी तिथि, पूर्णिमा, शुरू होती है: 2026 में यह तिथि एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाती है।

इस पेज के शब्द

हर शब्द का मतलब
  • पूर्णिमांत: उत्तर भारत का कैलेंडर, जिसमें महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है। पश्चिम और दक्षिण के अमांत कैलेंडर में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है, इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों महीने का नाम अलग बताते हैं।
  • शुक्ल और कृष्ण पक्ष: महीने का उजाला पखवाड़ा, जब चंद्रमा बढ़कर पूर्णिमा तक जाता है, और अँधेरा पखवाड़ा, जब घटकर अमावस्या तक।
  • संक्रांति: जिस दिन सूर्य नई राशि में प्रवेश करते हैं; इनमें मकर संक्रांति सबसे जानी-मानी है।
  • प्रदोष: सूर्यास्त के ठीक बाद की शाम का समय।
  • निशीथ: आधी रात का समय, जब शिवरात्रि और जन्माष्टमी की पूजा होती है।
  • अपराह्न और मध्याह्न: दोपहर बाद का समय (दिन के पाँच बराबर भागों में चौथा) और दिन का बीच का समय, यानी दोपहर।
  • पारण: व्रत खोलने का समय, जैसे एकादशी का व्रत अगली सुबह खोला जाता है।
  • स्नान-दान: पूर्णिमा या अमावस्या पर पवित्र स्नान और दान।
  • क्षय: वह तिथि जो एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ख़त्म हो जाए, इसलिए किसी सूर्योदय पर न दिखे; वह उसी दिन मानी जाती है जिस दिन शुरू होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

5 सवाल
दिसंबर 2026 में कौन-सा हिंदू महीना है?

उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में 1 दिसंबर से 23 दिसंबर तक अगहन; फिर 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक पौष। विक्रम संवत 2083।

दिसंबर 2026 में पूर्णिमा कब है?

नई दिल्ली में अगहन पूर्णिमा व्रत बुधवार, 23 दिसंबर को।

दिसंबर 2026 में अमावस्या कब है?

नई दिल्ली में अगहन अमावस्या मंगलवार, 8 दिसंबर को।

दिसंबर 2026 में एकादशी कब है?

नई दिल्ली में उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार, 4 दिसंबर को और मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर को।

दिसंबर 2026 में कौन-से हिंदू त्योहार हैं?

काल भैरव जयंती मंगलवार, 1 दिसंबर को; विवाह पंचमी सोमवार, 14 दिसंबर को; गीता जयंती रविवार, 20 दिसंबर को; दत्तात्रेय जयंती बुधवार, 23 दिसंबर को; मार्गशीर्ष (अगहन) पूर्णिमा बुधवार, 23 दिसंबर को। नई दिल्ली के लिए।

व्रत का दिन सबके लिए एक होता है, पर हर किसी की कुंडली अलग होती है।

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